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लावारिस मिली मासूम, ऑटो ड्राइवर ने पुलिस को सौंपा
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बरेली। चार दिन पहले लावारिस मिली 15 दिन की बच्ची को पाल रहे ऑटो ड्राइवर ने पड़ोसियों के कहने पर पुलिस को सौंप दिया। किला पुलिस ने उसे चाइल्ड लाइन टीम को सौंपा है। मलद्वार विकसित न होने से परेशान बच्ची का फिलहाल जिला अस्पताल में इलाज कराया जा रहा है। अब बच्ची को लखनऊ के केजीएमयू में रेफर किया जा रहा है। रात में बाल कल्याण समिति ने उसे लखनऊ भेजने के आदेश कर दिए।
बृहस्पतिवार को मिलक निवासी ऑटो ड्राइवर नाजिम 15 दिन की बच्ची को लेकर किला थाने पहुंचा। वहां उसने इंस्पेक्टर डीसी शर्मा को यह बच्ची सौंप दी। बताया कि चार अगस्त को बुकिंग लेकर भगवंतापुर गया था। वहां चौराहे के पास इस बच्ची को पड़ा देखा तो मानवता के नाते घर ले आया। चार दिन से बच्ची को पत्नी पाल रही थी। पड़ोसियों ने कहा कि तुम फंस जाओगे, बच्ची पुलिस को दे दो तो उसे लेकर आया है। पुलिस ने बच्ची को चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया। चाइल्ड लाइन की टीम ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। पता लगा कि उसका मलद्वार विकसित नहीं है। बच्ची की हालत में सुधार होता न देख डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफर करने की बात कही। बच्ची का जिले से बाहर इलाज कराने के लिए बाल कल्याण समिति की अनुमति की औपचारिकता पूरी होनी थी। सीडब्ल्यूडी के डीएन शर्मा ने बताया कि बच्ची को लखनऊ ले जाने के लिए रात में ही अनुमति दे दी गई है। चाइल्ड लाइन की देखरेख में ही बच्ची का इलाज होगा।
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बृहस्पतिवार को मिलक निवासी ऑटो ड्राइवर नाजिम 15 दिन की बच्ची को लेकर किला थाने पहुंचा। वहां उसने इंस्पेक्टर डीसी शर्मा को यह बच्ची सौंप दी। बताया कि चार अगस्त को बुकिंग लेकर भगवंतापुर गया था। वहां चौराहे के पास इस बच्ची को पड़ा देखा तो मानवता के नाते घर ले आया। चार दिन से बच्ची को पत्नी पाल रही थी। पड़ोसियों ने कहा कि तुम फंस जाओगे, बच्ची पुलिस को दे दो तो उसे लेकर आया है। पुलिस ने बच्ची को चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया। चाइल्ड लाइन की टीम ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया। पता लगा कि उसका मलद्वार विकसित नहीं है। बच्ची की हालत में सुधार होता न देख डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफर करने की बात कही। बच्ची का जिले से बाहर इलाज कराने के लिए बाल कल्याण समिति की अनुमति की औपचारिकता पूरी होनी थी। सीडब्ल्यूडी के डीएन शर्मा ने बताया कि बच्ची को लखनऊ ले जाने के लिए रात में ही अनुमति दे दी गई है। चाइल्ड लाइन की देखरेख में ही बच्ची का इलाज होगा।
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