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राजस्थान से खरीद, बदायूं में पिसाई और फिर %उड़ता पंजाब%
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बदायूं। ककराला के अब्दुल्ला डिग्री कॉलेज की आड़ में प्रबंधक नजमुल का मुख्य धंधा डोडा तस्करी का ही था। सोमवार को छापे मारे जाने के बाद इस धंधे के भंडाफोड़ के बाद धंधे से जुड़ी सारी चीजें खुलने लगी हैं। नजमुल के इस गोरखधंधे में कई व्यापारी, सप्लायर, ट्रक चालक और मजदूर जुड़े थे। इसके लिए उन्हें मोटी रकम दी जाती थी। पोस्ता राजस्थान से बड़े पैमाने पर मंगाया जाता था। फिर उसे कॉलेज परिसर के मैदान में पीसकर डोडा तैयार कर उसमें केमिकल मिलाकर खासतौर से पंजाब और दिल्ली सप्लाई कर दिया जाता था।
डोडा तस्कर नजमुल पुत्र लुकमान मूलरूप से अलापुर थाना क्षेत्र के कस्बा ककराला का ही रहने वाला है। उसका एक मकान शहर कोतवाली क्षेत्र में भी है। कई साल पहले उसके पास डोडे का लाइसेंस था लेकिन सरकार ने उसे निरस्त करा दिया था और कॉलेज के पास ही स्थित उसके गोदाम को सील कर दिया गया था। दातागंज सीओ और प्रशासनिक अधिकारियों ने बाद में 27 सितंबर 2018 को गोदाम खुलवाकर डोडा खेतों में फिकवाकर उसके ऊपर ट्रैक्टर चलवा दिया था। सूत्रों की माने तो नजमुल का यह गोदाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की नजर में था। स्थानीय लोग भी उसे अच्छी तरह जान चुके थे।
वर्ष 2015 में सपा सरकार के दौरान नजमुल ने अपने बेटे अब्दुल्ला के नाम पर डिग्री कॉलेज खोला था। उसका उद्घाटन समाजवादी पार्टी के एक नेता ने किया था। सूत्रों की माने तो नजमुल ने गोदाम बंद होने के बाद इसी डिग्री कॉलेज में डोडा बनाने और सप्लाई करने का धंधा शुरू कर दिया था। कॉलेज में बड़ी संख्या में छात्र आते हैं, इसलिए उनकी निगाह से धंधे को बचाने के लिए पोस्ता से डोडा बनाने का सारा काम कॉलेज से जुड़े खेतों में ही किया जाता था। केवल तैयार डोडा के बोरे कॉलेज के कमरों में रखे जाते थे, ताकि खराब न हों।
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बताते हैं कि नजमुल बड़े पैमाने पर राजस्थान से पोस्ता खरीद रहा था। यहां से आने वाले प्याज या अन्य सब्जियों आदि को मंड़ी समिति में उतार दिया जाता था और पोस्ता कॉलेज में पहुंचा दिया जाता। बाद में ककराला से जाने वाले गेहूं के ट्रकों में डोडा पंजाब और दिल्ली के लिए भेज दिया जाता था। इतने बड़े पैमाने पर डोडा तस्करी का धंधा चल रहा था और स्थानीय पुलिस इससे अंजान थी। सोमवार को धंधे का भंडाफोड़ तो हो गया, मगर नजमुल और उसके साथी हाथ नहीं आए। डोडा पकड़े जाने के बाद एसपी सिटी की टीम ने जमकर वाहवाही बटोरी तो वहीं अलापुर थाना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
गोवंशीय पशुओं को मरवाकर मांस सप्लाई करता था नजमुल
सपा सरकार के दौरान डोडा तस्कर नजमुल अधिकारियों पर रौब झाड़ता था। वह ककराला में गोवंशीय पशुओं को मरवाकर मांस सप्लाई करता था। कुछ साल पहले नजमुल और उसके लोगों ने छापा मारने जाने के दौरान पुलिस टीम पर पथराव कर दिया था। उस समय भी सपा की सरकार थी, जिससे नजमुल पुलिस कार्रवाई से बच गया था।
घंटाघर पर खोला अब्दुल्ला कलेक्शन, खरीदी जमीन
नजमुल ने डोडे के धंधे से जुटाई गई रकम से घंटाघर के पास एक दुकान खरीदी। उसमें अब्दुल्ला कलेक्शन के नाम से कपड़े की दुकान खोली, जो उसका बेटा अब्दुल्ला चलाता है। उसी दुकान के पीछे नजमुल ने काफी जगह खरीद रखी है।
पत्थर व्यापारी से मांग चुका था रंगदारी
नजमुल और उसके बेटों ने लालपुल स्थित एक पत्थर व्यापारी की दुकान पर कब्जा कर लिया था। व्यापारी ने इस संबंध में उसके खिलाफ रंगदारी मांगने और दुकान पर कब्जा करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में उसने अपने बेटे अब्दुल्ला की ओर से व्यापारी के खिलाफ एफआईआर कराई थी। अब तक वह रंगदारी के मामले में बचा हुआ है, मामले की जांच अब भी चल रही है।
जिला पंचायत सदस्य है नजमुल की पत्नी
सपा सरकार के दौरान डोडा का धंधा शुरू करने वाला नजमुल ने राजनीति में भी अपनी पकड़ बनाए रखी। पहले वह स्वयं जिला पंचायत सदस्य रहा था। इस समय उसकी पत्नी रुखसाना विलहरी से जिला पंचायत सदस्य है। आज भी वह खुद को सपा कार्यकर्ता बताता है। क्षेत्र के कुछ बड़े नेताओं से भी उसके करीबी संबंध हैं।
अभी नजमुल का कुछ पता नहीं चला है। उसे तलाश किया जा रहा है। वो डोडा कहां से लाता था और कहां सप्लाई करता था, इसकी जानकारी नहीं है। यह विवेचना का विषय है। हम उसे विवेचना में शामिल करेंगे। -कृष्ण गोपाल शर्मा, इंस्पेक्टर अलापुर
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डोडा तस्कर नजमुल पुत्र लुकमान मूलरूप से अलापुर थाना क्षेत्र के कस्बा ककराला का ही रहने वाला है। उसका एक मकान शहर कोतवाली क्षेत्र में भी है। कई साल पहले उसके पास डोडे का लाइसेंस था लेकिन सरकार ने उसे निरस्त करा दिया था और कॉलेज के पास ही स्थित उसके गोदाम को सील कर दिया गया था। दातागंज सीओ और प्रशासनिक अधिकारियों ने बाद में 27 सितंबर 2018 को गोदाम खुलवाकर डोडा खेतों में फिकवाकर उसके ऊपर ट्रैक्टर चलवा दिया था। सूत्रों की माने तो नजमुल का यह गोदाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की नजर में था। स्थानीय लोग भी उसे अच्छी तरह जान चुके थे।
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वर्ष 2015 में सपा सरकार के दौरान नजमुल ने अपने बेटे अब्दुल्ला के नाम पर डिग्री कॉलेज खोला था। उसका उद्घाटन समाजवादी पार्टी के एक नेता ने किया था। सूत्रों की माने तो नजमुल ने गोदाम बंद होने के बाद इसी डिग्री कॉलेज में डोडा बनाने और सप्लाई करने का धंधा शुरू कर दिया था। कॉलेज में बड़ी संख्या में छात्र आते हैं, इसलिए उनकी निगाह से धंधे को बचाने के लिए पोस्ता से डोडा बनाने का सारा काम कॉलेज से जुड़े खेतों में ही किया जाता था। केवल तैयार डोडा के बोरे कॉलेज के कमरों में रखे जाते थे, ताकि खराब न हों।
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बताते हैं कि नजमुल बड़े पैमाने पर राजस्थान से पोस्ता खरीद रहा था। यहां से आने वाले प्याज या अन्य सब्जियों आदि को मंड़ी समिति में उतार दिया जाता था और पोस्ता कॉलेज में पहुंचा दिया जाता। बाद में ककराला से जाने वाले गेहूं के ट्रकों में डोडा पंजाब और दिल्ली के लिए भेज दिया जाता था। इतने बड़े पैमाने पर डोडा तस्करी का धंधा चल रहा था और स्थानीय पुलिस इससे अंजान थी। सोमवार को धंधे का भंडाफोड़ तो हो गया, मगर नजमुल और उसके साथी हाथ नहीं आए। डोडा पकड़े जाने के बाद एसपी सिटी की टीम ने जमकर वाहवाही बटोरी तो वहीं अलापुर थाना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
गोवंशीय पशुओं को मरवाकर मांस सप्लाई करता था नजमुल
सपा सरकार के दौरान डोडा तस्कर नजमुल अधिकारियों पर रौब झाड़ता था। वह ककराला में गोवंशीय पशुओं को मरवाकर मांस सप्लाई करता था। कुछ साल पहले नजमुल और उसके लोगों ने छापा मारने जाने के दौरान पुलिस टीम पर पथराव कर दिया था। उस समय भी सपा की सरकार थी, जिससे नजमुल पुलिस कार्रवाई से बच गया था।
घंटाघर पर खोला अब्दुल्ला कलेक्शन, खरीदी जमीन
नजमुल ने डोडे के धंधे से जुटाई गई रकम से घंटाघर के पास एक दुकान खरीदी। उसमें अब्दुल्ला कलेक्शन के नाम से कपड़े की दुकान खोली, जो उसका बेटा अब्दुल्ला चलाता है। उसी दुकान के पीछे नजमुल ने काफी जगह खरीद रखी है।
पत्थर व्यापारी से मांग चुका था रंगदारी
नजमुल और उसके बेटों ने लालपुल स्थित एक पत्थर व्यापारी की दुकान पर कब्जा कर लिया था। व्यापारी ने इस संबंध में उसके खिलाफ रंगदारी मांगने और दुकान पर कब्जा करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में उसने अपने बेटे अब्दुल्ला की ओर से व्यापारी के खिलाफ एफआईआर कराई थी। अब तक वह रंगदारी के मामले में बचा हुआ है, मामले की जांच अब भी चल रही है।
जिला पंचायत सदस्य है नजमुल की पत्नी
सपा सरकार के दौरान डोडा का धंधा शुरू करने वाला नजमुल ने राजनीति में भी अपनी पकड़ बनाए रखी। पहले वह स्वयं जिला पंचायत सदस्य रहा था। इस समय उसकी पत्नी रुखसाना विलहरी से जिला पंचायत सदस्य है। आज भी वह खुद को सपा कार्यकर्ता बताता है। क्षेत्र के कुछ बड़े नेताओं से भी उसके करीबी संबंध हैं।
अभी नजमुल का कुछ पता नहीं चला है। उसे तलाश किया जा रहा है। वो डोडा कहां से लाता था और कहां सप्लाई करता था, इसकी जानकारी नहीं है। यह विवेचना का विषय है। हम उसे विवेचना में शामिल करेंगे। -कृष्ण गोपाल शर्मा, इंस्पेक्टर अलापुर