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Bareilly: भाई की हत्या करने वाले बड़े भाई-भतीजे को फांसी की सजा, कोर्ट ने फैसले में किया श्रीराम का जिक्र

Tue, 24 Dec 2024 08:02 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 24 Dec 2024 08:02 PM IST
सार

Bareilly News: बरेली में युवक की हत्या के मामले में उसके बड़े भाई और भतीजे को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय) प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। 

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court sentenced the two convicted to death for murder in Bareilly
हत्या के दोषी पिता-पुत्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राम के साथ छोटे भाई लक्ष्मण भी वनवास पर चले गए। भरत ने राम की खड़ाऊ को गद्दी पर रखकर 14 साल राज्य चलाया। राम जैसे ही वनवास से लौटे, भरत ने उनको राज्य लौटा दिया। रामचरितमानस के इन प्रसंगों के माध्यम से भाई के प्रति भाई के त्याग और प्रेम की महिमा का मंडन करते हुए अदालत ने छोटे भाई की हत्या करने वाले बड़े भाई और भतीजे को फांसी की सजा सुनाई है। बुआ-फूफा की गवाही के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय) प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने रघुवीर सिंह और उसके बेटे मोनू उर्फ तेजपाल सिंह को दोषी मानते हुए एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। 

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घटना 20 नवंबर 2014 को बहेड़ी थाने के ग्राम भोजपुर में हुई थी। रघुवीर सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसका छोटा भाई चरन सिंह मीरगंज थाना क्षेत्र में मामा भूप सिंह के यहां रहता था। मामा की कोई संतान नहीं थी। मामा ने सारी संपत्ति उनकी मां सोमवती के नाम कर दी थी। मीरगंज थाना क्षेत्र के गांव हल्दी निवासी उसके बड़े मामा का लड़का हरपाल इस बात से रंजिश मानता था। घटना से चार दिन पहले ही चरन सिंह मामा के घर से अपने घर आया था। 20 नवंबर को शाम साढ़े छह बजे हरपाल व अन्य साथियों ने चरन सिंह की हत्या कर दी थी। 
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पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की तो रघुवीर और उसके बेटे मोनू का ही नाम सामने आया था। जांच में पता चला था कि मोनू ने चरन सिंह के सीने में दो गोलियां मारी थीं और रघुवीर ने फरसा मारकर सिर धड़ से अलग कर दिया था। 21 दिसंबर को ही न्यायालय ने दोषी करार दिया था। मंगलवार को सजा सुनाई गई। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि भगवान राम को रघुवीर भी कहा जाता है। एक वह रघुवीर थे और एक यह रघुवीर है। 


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समाज को जाएगा यह संदेश
कोर्ट ने सजा सुनाते समय रामचरितमानस के प्रसंगों का उल्लेख कर राम-लक्ष्मण और राम-भरत के पारस्परिक प्रेम का जिक्र किया। कहा कि राम को रघुवीर के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन इस रघुवीर ने इसके विपरीत कृत्य किया है।

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दया एक मानवीय गुण है, लेकिन इस मामले में दोषियों में इसका घोर अभाव है। अगर ऐसे व्यक्तियों को मृत्युदंड नहीं दिया जाता है, तो कोई भी भाई संपत्ति के लालच में भाई की हत्या कर देगा। यह घटना रिश्तों को भी तार-तार करती है। मृत्युदंड से ही ऐसे व्यक्तियों से समाज को मुक्ति दिलाई जा सकती है। इससे समाज में सकारात्मक संदेश भी जाएगा। कोर्ट ने कहा कि रघुवीर सिंह एवं मोनू को तब तक फंदे पर लटकाया जाए, जब तक मृत्यु न हो जाए।

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