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Bareilly News: 30 साल बाद धुला हत्या का दाग, अदालत ने दो आरोपियों को किया दोषमुक्त

Sun, 19 May 2024 04:17 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 19 May 2024 04:17 PM IST
सार

बरेली में 30 साल बाद हत्या के मुकदमे में दो आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया। अभियोजन पक्ष अदालत में आरोपियों को दोषी सिद्ध करने में नाकाम रहा। अदालत ने शनिवार को दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। 

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court acquits two accused of murder in Bareilly
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में हत्या के मुकदमे में 30 साल बाद अदालत ने दो आरोपियों को दोषमुक्त किया है। जबकि एक आरोपी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। हत्या के इस मुकदमे में कई बार तो खुद वादी पक्ष पर ही सवालिया निशान लगे। इससे उसे भारतीय जीवन बीमा कंपनी ने क्लेम नहीं दिया।

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हाफिजगंज के कस्बा सेंथल के रहने वाले रईस ने हल्द्वानी में भाई इदरीश की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसमें कहा था कि उसका भाई इदरीश हल्द्वानी में ठेला लगाकर स्पोर्ट्स का सामान बेचता था। हल्द्वानी में वह धर्मशाला में रहता था। 10 अगस्त 1994 को जब वह भाई के पास गया तो वहां उसका ठेला खड़ा मिला। इदरीश का कोई पता नहीं चला। 
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सेंथल के नवाब हुसैन, शरीफल, नायाब हुसैन रुपयों को लेकर रंजिश चल रही थी। 25 अगस्त 1994 को भोजीपुरा में पचदौरा के जंगल में ईख के खेत एक कंकाल मिला। पास में कपड़े पड़े हुए थे। रईस ने बताया कि कपड़े उसके भाई इदरीश के हैं। उसके भाई की नवाब, शरीफल व नायाब हुैसन ने हत्या कर लाश यहां फेंक दी। 

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भाई ने कराया था इदरीश का बीमा
आरोपियों की तरफ से अधिवक्ता अमजद सलीम ने अदालत में कहा कि रईस की रुपयों के लेनदेने को लेकर कई लोगों से रंजिश चल रही है। आरोपियों से भी लेनदेन को लेकर रंजिश चल रही थी। इसी खुन्नस में नाम लिखाया गया है। मुकदमे की सुनवाई में यह तथ्य भी आया कि खुद रईस ने अपने भाई का बीमा कराकर उसका नॉमिनी अपनी पत्नी को बनाया था। 

भारतीय जीवन बीमा कंपनी का कहना था कि रईस ने इदरीश के कत्ल का झूठा मुकदमा लिखवाया है। बीमा कंपनी ने बीमा निरस्त कर दिया। इससे मामला और संदिग्ध हो गया। इधर पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया कि हत्या का कारण स्पष्ट नहीं है। चूंकि महज कंकाल मिला था। घटना का कोई साक्षी नहीं था। अभियोजन पक्ष अदालत में आरोपियों को दोषी सिद्ध करने में नाकाम रहा। सुनवाई के दौरान आरोपी नायाब हुसैन की मौत हो गई। 

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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पशुपति नाथ मिश्रा ने आरोपी नवाब हुसैन व शरीफल को दोष मुक्त करार दिया। अधिवक्ता अमजद सलीम ने बताया कि 30 साल चले इस मुकदमे के दौरान आरोपी करीब 70 साल के हो गए। उनसे अब ठीक से चला भी नहीं जाता। बीमा कराकर पत्नी को नॉमिनी बनाना बाद में दावे से मुकरने से मुकदमे में अहम मोड़ आ गया।

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