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रुविवि में जुलाई में आ रहा है ‘शोध गंगा’
ब्ययूराो अमर उजाला बरेली।
Updated Thu, 19 May 2016 01:35 AM IST
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में जुलाई में शोध गंगा शुरू हो जाएगा। यह सॉफ्टवेयर आने के बाद रिसर्च वर्क कॉपी-पेस्ट नहीं हो पाएगा। इसके बाद कंप्यूटर के इंतजाम किए जा रहे हैं। 15 जुलाई तक शुरू करने की योजना है।
अब तक विश्वविद्यालय में जमा होने वाली थीसिस काफी कॉपी-पेस्ट हो रही थी। इसकी वजह से रिसर्च वर्क स्कॉलर्स गंभीरता से नहीं ले रहे थे, लेकिन अब थीसिस कॉपी-पेस्ट नहीं हो पाएगी। रुहेलखंड विश्वविद्यालय अपनी लाइब्रेरी में शोध गंगा सॉफ्टवेयर लाने जा रहा है। नैक दौरे के लिए आई टीम ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में शोध गंगा सॉफ्टवेयर लाने के लिए कहा था, ताकि थीसिस की चोरी को रोका जा सके और रिसर्च वर्क में क्वालिटी आ पाए। विश्वविद्यालय ने इसके लिए काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए 20 से ज्यादा कंप्यूटर मंगाए गए हैं। इन कंप्यूटर में शोध गंगा सॉफ्टवेयर को अपलोड किया जाएगा। यह सॉफ्टवेयर अपलोड होने के बाद थीसिस का विषय डालते ही पता चल जाएगा कि कौन सा चैप्टर किस कहां से चुराया गया है। अगर चैप्टर चोरी मिली तो थीसिस दोबारा लिखने के लिए कहा जाएगा। इस सॉफ्टवेयर के आने के बाद विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर्स को कॉपी-पेस्ट की बजाय मेहनत से थीसिस लिखनी होगी। अब तक रिसर्च स्कॉलर्स पर आरोप लगाए जाते थे कि अपनी मेहनत पर रिसर्च न करके इधर-उधर से चुरा रहे हैं। भारत में कई सालों से विश्वविद्यालयों में यह सॉफ्टवेयर चल रहा है। लेकिन, रुहेलखंड विश्वविद्यालय में नहीं आ पाया था। अब रुहेलखंड विश्वविद्यालय भी जुलाई से यह सॉफ्टवेयर ला रहा है।
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थीसिस की कॉपी-पेस्ट रोकने के लिए रुहेलखंड विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में ‘शोध गंगा’ सॉफ्टवेयर लगाया जाएगा। इसकी तैयारियां तेजी से चल रही है। कंप्यूटर मंगाए गए हैं। जुलाई तक यह सॉफ्टवेयर कंप्यूटर में अपलोड कर दिया जाएगा।
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- प्रो. श्याम बिहारी लाल, अध्यक्ष, सेंट्रल लाइब्रेरी, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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अब तक विश्वविद्यालय में जमा होने वाली थीसिस काफी कॉपी-पेस्ट हो रही थी। इसकी वजह से रिसर्च वर्क स्कॉलर्स गंभीरता से नहीं ले रहे थे, लेकिन अब थीसिस कॉपी-पेस्ट नहीं हो पाएगी। रुहेलखंड विश्वविद्यालय अपनी लाइब्रेरी में शोध गंगा सॉफ्टवेयर लाने जा रहा है। नैक दौरे के लिए आई टीम ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में शोध गंगा सॉफ्टवेयर लाने के लिए कहा था, ताकि थीसिस की चोरी को रोका जा सके और रिसर्च वर्क में क्वालिटी आ पाए। विश्वविद्यालय ने इसके लिए काम करना शुरू कर दिया है। इसके लिए 20 से ज्यादा कंप्यूटर मंगाए गए हैं। इन कंप्यूटर में शोध गंगा सॉफ्टवेयर को अपलोड किया जाएगा। यह सॉफ्टवेयर अपलोड होने के बाद थीसिस का विषय डालते ही पता चल जाएगा कि कौन सा चैप्टर किस कहां से चुराया गया है। अगर चैप्टर चोरी मिली तो थीसिस दोबारा लिखने के लिए कहा जाएगा। इस सॉफ्टवेयर के आने के बाद विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर्स को कॉपी-पेस्ट की बजाय मेहनत से थीसिस लिखनी होगी। अब तक रिसर्च स्कॉलर्स पर आरोप लगाए जाते थे कि अपनी मेहनत पर रिसर्च न करके इधर-उधर से चुरा रहे हैं। भारत में कई सालों से विश्वविद्यालयों में यह सॉफ्टवेयर चल रहा है। लेकिन, रुहेलखंड विश्वविद्यालय में नहीं आ पाया था। अब रुहेलखंड विश्वविद्यालय भी जुलाई से यह सॉफ्टवेयर ला रहा है।
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थीसिस की कॉपी-पेस्ट रोकने के लिए रुहेलखंड विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में ‘शोध गंगा’ सॉफ्टवेयर लगाया जाएगा। इसकी तैयारियां तेजी से चल रही है। कंप्यूटर मंगाए गए हैं। जुलाई तक यह सॉफ्टवेयर कंप्यूटर में अपलोड कर दिया जाएगा।
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- प्रो. श्याम बिहारी लाल, अध्यक्ष, सेंट्रल लाइब्रेरी, रुहेलखंड विश्वविद्यालय