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जगी उम्मीद, हुलासनगरा क्रॉसिंग पर जाम से जल्द मिलेगी मुक्ति
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बरेली। हुलासनगरा रेलवे क्रासिंग पर रात-रात भर के जाम से निजात मिलने की उम्मीद फिर जगी है। क्रॉसिंग पर बनने वाले ओवरब्रिज के लिए कुछ दिन पहले खोले गए टेक्निकल टेंडर में दो फर्में पास हो गई हैं, अब इसी हफ्ते फाइनेंशियल टेंडर भी खोले जाने हैं। इसके बाद तय हो जाएगा कि ओवरब्रिज का निर्माण कौन सी फर्म करेगी।
बरेली-शाहजहांपुर के बीच हुलासनगरा रेलवे क्रासिंग पर आए दिन जाम लगा रहता है। लखनऊ से बरेली होते हुए दिल्ली आने-जाने वालों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है। पहले यह प्रोजेक्ट 2200 करोड़ के बरेली-सीतापुर फोरलेन प्रोजेक्ट में ही शामिल था, लेकिन इरा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के बीच में ही काम छोड़कर भाग जाने से ओवरब्रिज का निर्माण लटक गया। कमिश्नर रणवीर प्रसाद की पैरवी के बाद एनएचएआई ने हुलासनगरा क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को भेजा था। हाल ही में मंत्रालय ने 45.23 करोड़ की लागत से 1000 मीटर लंबे इस ओवरब्रिज को बनाने की अनुमति दे दी। एनएचएआई ने टेंडर के लिए कई बार तारीखें बदलीं। फाइनल तारीख पांच दिसंबर तय की गई थी। एनएचएआई के पीडी एनपी सिंह ने बताया की टेक्निकल टेंडर में जिन दो फर्मों ने हिस्सा लिया, जांच में वे सही पाई गईं। अब इसी हफ्ते फाइनेंशियल टेंडर खुलेंगे। इसके साथ ही यह तय हो जाएगा कि यह प्रोजेक्ट पर कौन सी फर्म काम करेगी।
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बरेली-शाहजहांपुर के बीच हुलासनगरा रेलवे क्रासिंग पर आए दिन जाम लगा रहता है। लखनऊ से बरेली होते हुए दिल्ली आने-जाने वालों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है। पहले यह प्रोजेक्ट 2200 करोड़ के बरेली-सीतापुर फोरलेन प्रोजेक्ट में ही शामिल था, लेकिन इरा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के बीच में ही काम छोड़कर भाग जाने से ओवरब्रिज का निर्माण लटक गया। कमिश्नर रणवीर प्रसाद की पैरवी के बाद एनएचएआई ने हुलासनगरा क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को भेजा था। हाल ही में मंत्रालय ने 45.23 करोड़ की लागत से 1000 मीटर लंबे इस ओवरब्रिज को बनाने की अनुमति दे दी। एनएचएआई ने टेंडर के लिए कई बार तारीखें बदलीं। फाइनल तारीख पांच दिसंबर तय की गई थी। एनएचएआई के पीडी एनपी सिंह ने बताया की टेक्निकल टेंडर में जिन दो फर्मों ने हिस्सा लिया, जांच में वे सही पाई गईं। अब इसी हफ्ते फाइनेंशियल टेंडर खुलेंगे। इसके साथ ही यह तय हो जाएगा कि यह प्रोजेक्ट पर कौन सी फर्म काम करेगी।
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