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नहाय-खाय के बाद खरना के साथ शुरू हुआ निर्जल व्रत

Wed, 10 Nov 2021 02:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 02:09 AM IST
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Chhath puja
विवि में छठ महापर्व के लिए सजा मन्दिर और घाट- अमर उजाला
बरेली। भगवान भास्कर की आराधना और लोक आस्था के महापर्व छठ के दूसरे दिन खरना का अनुष्ठान संपन्न हुआ। व्रती महिलाओं ने मंगलवार को दिनभर उपवास रखकर शाम के समय गन्ने के रस की खीर खाकर व्रत का पारायण किया और फिर निर्जल उपवास शुरू हुआ। खरना के बाद व्रती महिलाएं बुधवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी में जुट गईं।
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छठ महापर्व के दूसरे दिन मंगलवार को व्रती महिलाएं सुबह जल्दी उठकर घरों की साफ-सफाई में जुट र्गइं। स्नान कर महिलाओं ने मिट्टी के चूल्हे पर मिट्टी के बर्तन में गन्ने के रस की खीर का प्रसाद बनाया। इस दौरान दिनभर व्रती महिलाएं निराहार रहकर छठी मइया के गीत गाती रहीं। शाम के समय पांच कन्याओं और गाय को भोग लगाने के बाद प्रसाद ग्रहण किया। पूर्वांचल समाज के लोगों ने बताया खरना छठ से जुड़ा महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। छठी मइया को समर्पित यह अनुष्ठान अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने से एक दिन पहले किया जाता है। अनुष्ठान में व्रती महिला अकेले भाग लेती है। इस दौरान व्रती महिला को कोई टोकता नहीं है। इस नियम का सख्ती से पालन किया जाता है। खरना का प्रसाद भी सबसे पहले व्रती महिला ही ग्रहण करती है। इसके बाद ही इस प्रसाद को दूसरे लोगों में बांटा जाता है। खरना का अनुष्ठान संपन्न होने के बाद देर रात तक व्रती महिलाएं कलश पर दीपक जलाकर छठ मैया की स्तुति करती रहीं। खरना का अनुष्ठान संपन्न होने के बाद अब बुधवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस अनुष्ठान की तैयारियों के लिए मंगलवार को दिनभर महिलाएं बाजार में जरूरी चीजों की खरीदारी करती रहीं।
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नमक और चीनी के प्रयोग से परहेज
छठ पूजा में शुद्धता पर बहुत जोर दिया जाता है। खरना अनुष्ठान के दौरान भी इसका विशेष ध्यान रखा गया। इसके साथ ही व्रती महिलाओं ने चीनी के साथ नमक के प्रयोग से भी परहेज किया। चीनी के प्रयोग से बचने के लिए ही गन्ने के रस में खीर बनाई जाती है।
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बरेली में बड़ी संख्या में रहते हैं पूर्वांचल के परिवार
शहर में पूर्वांचल समाज के लोग बड़ी तादाद में रहते हैं। इनमें से कुछ लोग त्योहार मनाने के लिए अपने घर चले जाते हैं तो कुछ यहीं रहकर छठ का त्योहार मनाते हैं। हर साल इज्जतनगर, रुहेलखंड यूनिवर्सिटी सहित शहर में कई जगह छठ पूजा का सामूहिक आयोजन होता है।
व्रती महिलाएं बोलीं-
छठ का व्रत रखने की प्रेरणा मुझे मां से मिली थी। ससुराल के सभी सदस्यों की छठ माता में गहरी आस्था है। हर साल इस पर्व का इंतजार रहता है। - सारिका
छठ पर्व का इंतजार पूरे साल रहता है। परिवार के दूसरे सदस्य भी त्योहार मनाने के लिए घर आते हैं। छठ महापर्व की हर रस्म पूरी श्रद्धा, आस्था से निभाती हूं।- आशा देवी
दीपावली का पर्व समाप्त होने के बाद से ही घर में छठ की तैयारियां चल रही हैं। हर साल पूरा परिवार विधि-विधान से छठ मैया की पूजा करता है। छठ मैया से आज तक जो भी मांगा है, सब मिला है। - बच्ची देवी
छठ का व्रत रखने की प्रेरणा मायके से मिली। मां की आस्था ने मुझे भी यह व्रत रखने के लिए प्रेरित किया। छठ मैया अपने भक्तों की मनोकामनाएं जरूर पूरी करती हैं। - लक्ष्मी
पुरुष बढ़ चढ़कर देते हैं योगदान
छठ पर्व को लेकर कई सप्ताह से तैयारियां चल रही हैं। घाट की रंगाई-पुताई के साथ ही साज-सज्जा में पुरुष बढ़ चढ़कर योगदान देते हैं। पूजा से जुड़ी छोटी से छोटी व्यवस्था भी पूरा समाज मिलकर करता है। - देवेंद्र रॉय

छठ पूजा के लिए बरेली आए
नौकरी के सिलसिले में गोरखपुर में रहना पड़ रहा है, मगर छठ का त्योहार मनाने हर साल बरेली जरूर आते हैं। इस साल भी पूरा परिवार त्योहार मनाने के लिए गोरखपुर से बरेली आया है। - रमाकांत गुप्ता

विवि में छठ महापर्व के लिए खरना तैयार करती महिलायें - अमर उजाला

विवि में छठ महापर्व के लिए खरना तैयार करती महिलायें - अमर उजाला

 

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