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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   BJP and SP were non-friends, their enemies

भाजपा और सपा में गैर दोस्त थे, अपने दुश्मन

Sun, 29 Oct 2017 01:45 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Sun, 29 Oct 2017 01:45 AM IST
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जिला पंचायत के अविश्वास प्रस्ताव की राजनीति में सपा-भाजपा नेताओं के लिए तीन दिन बेहद भारी रहे। यही पता नहीं चल पा रहा था कि किस दल में कौन किसका दोस्त है, कौन दुश्मन। संजय के अपनी पार्टी के जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव और पूर्व मंत्री भगवतसरन गंगवार संकटमोचक बनकर सदस्यों को जुटाने में लगे थे, वहीं सपा के दो पुराने दिग्गज उनको कुर्सी से हटाने के लिए भाजपा विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल से संपर्क बनाए थे। सपा के दोनों पुराने दिग्गज संजय को फूटी आंख भी जिला पंचायत की कुर्सी पर देखना नहीं चाहते थे लेकिन वह मौके की नजाकत देखकर कदम उठा रहे थे। भाजपा के एक और विधायक भी अप्रत्यक्ष रूप से संजय की सपोर्ट में थे तो एक दूसरे भाजपा विधायक तन से भाजपाई होने के बाद भी अविश्वास प्रस्ताव की वोटिंग में मन से सपाई थे। 
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संजय की कार्यशैली पर सबसे पहले आपत्ति जताई बहेड़ी विधायक छत्रपाल गंगवार ने। आंवला सांसद धर्मेंद्र कश्यप, विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल और केसर सिंह ने जिपं सदस्य मंजू देवी के पति मोहन सिंह को 15 दिन पहले कलक्ट्रेट ले जाकर अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। दिवाली से पहले तक संजय को हटाने की कमान दोनों भाजपा विधायकों पर थी। पार्टी सूत्र बताते हैं कि दबंग विधायक पप्पू भरतौल ने बड़ी संख्या में जिपं सदस्यों को इकट्ठा कर डाला। सपा के एक पूर्व विधायक के बेटे, पूर्व बसपा विधायक के जिपं सदस्य भाई के अलावा सपा के दिग्गज दो बुजुर्ग समर्थक 10 जिला पंचायत सदस्य भाजपा के पाले में खड़े नजर आ रहे थे। सपा के एक युवा दिग्गज संजय की कार्यशैली से बहुत खुश नहीं थे लेकिन उनका कद बढ़ने के बाद विधानसभा चुनाव में एक भी सीट न जीतकर पार्टी की किरकिरी पहले ही हो चुकी थी, इसलिए जिला पंचायत की कुर्सी बचाकर किसी तरह हाईकमान की नजरों में खुद को चढ़ाना था। इसलिए वह विधायक पप्पू भरतौल को जिला पंचायत की लड़ाई सीधे न लड़ने के लिए मना रहे थे। हालांकि एक ब्लाक प्रमुख की मानें तो सपा के युवा दिग्गज ने अपने दो वोट देने के बदले भी संजय से हिसाब किया था। वह भी मन से नहीं चाहते थे कि संजय की कुर्सी बनी रहे लेकिन पार्टी की खातिर बचानी मजबूरी थी।  
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भाजपा के कद्दावर नेता की सहानुभूति अपनी ही पार्टी के मोहन सिंह के साथ नहीं थी। तीन दिन पहले वह सात जिपं सदस्यों को बारातघर से बुला लाए। यह सब उनके अपने थे जो उनके कहने पर किसी को भी वोट दे सकते थे। एक पूर्व मंत्री वैसे तो कद्दावर नेता के विरोधी माने जाते हैं लेकिन बिरादरी के सदस्यों के वोट संजय के पक्ष में कराने के लिए राजनीतिक दुश्मनी भुलाकर कद्दावर नेता के दोस्त बन गए। तीन दिन में सातों वोट संजय के पक्ष में मैनेज कर लिए। कद्दावर नेता दिखावे के लिए ही सही, उस बारातघर में पहुंच गए, जहां भाजपा समर्थक सदस्य रुके थे, उससे नाराज होकर पप्पू भरतौल और केसर सिंह बिदक गए और जिला पंचायत की लड़ाई से खुद को दूर कर लिया। कद्दावर नेता पहले ही पार्टी के साथ नहीं थे, दोनों विधायक भी दूर हो गए तो अविश्वास प्रस्ताव की यह दुर्गति तो होनी ही थी।   
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