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बीडीए की ख्वाहिश... ग्रेटर बरेली के लिए पांच गांवों में मिले 22.5 वर्ग मीटर जमीन
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बरेली। ग्रेटर बरेली बसाने की योजना पर बीडीए ने काम शुरू कर दिया है। पांच गांवों के लोगों से ली जाने वाली जमीन के अनुमानित क्षेत्रफल का आकलन कर लिया गया है जिसके मुताबिक सर्वाधिक 7.70 लाख वर्ग मीटर जमीन जमीन मोहनपुर गांव से लेने की तैयारी है। जमीन लेने के लिए किसानों को सहमत करने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित साइट पर जमीन, आवास, दुकान जैसी संपत्तियों का भी सर्वे किया जा रहा है।
रामगंगा नगर आवासीय योजना की सफलता के बाद बीडीए ने नई कॉलोनी के तौर पर ग्रेटर बरेली बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है जिसे करीब दो सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में बसाने की योजना है। इस कॉलोनी के लिए जमीन का इंतजाम करने के लिए पांच गांवों के किसानों से संपर्क साधा जा रहा है। सभी गांवों में जमीन का अनुमानित क्षेत्रफल अलग-अलग है। रामनगर उर्फ मोहनपुर से 7.70 लाख वर्ग मीटर, अहिरोला से 6.20 लाख वर्ग मीटर, वालीपुर अहमदपुर से 6.70 लाख, नवदिया झादा से 1.60 लाख और कचौली से 24 हजार वर्ग मीटर जमीन समेत कुल 22.5 लाख वर्ग मीटर जमीन ली जानी है। इसके लिए किसानों से बातचीत चल रही है। बताते हैं कि बीडीए की टीम गांवों में सर्वे कर रही है। इसमें निजी और सरकारी भवनों की गिनती भी हो रही है।
ग्रेटर बरेली में प्लॉट बेचेगा बीडीए
बताया जा रहा है कि कि ग्रेटर बरेली में बीडीए प्लॉट बेचेगा लेकिन आवंटियों के आवास एक ही का मॉडल पर तैयार होंगे। सत्तर गज से लेकर दो सौ गज तक के प्लॉट होंगे। व्यावसायिक कार्यों के लिए अलग जगह कॉलोनी में होगी। उसका मूल्य भी बीडीए उसी अनुसार तय करेगा। यहां प्लॉट रामगंगा नगर आवासीय योजना से महंगे होंगे। कारण बताया जा रहा है कि जमीन का मूल्य बीडीए को अधिक चुकाना पड़ेगा। उसी के मुताबिक प्लॉटों के रेट तय होंगे। हालांकि इसमें सामान्य आवासों का भी कोटा होगा जिनकी दरें कम होंगी। इसके लिए बीडीए अलग नियम बनाएगा।
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18 साल बाद आबाद हो पाई रामगंगा नगर परियोजना
बीडीए ने 2004 में रामगंगा नगर आवासीय योजना की शुरूआत की थी। शुरू में यह परियोजना फ्लॉप हो गई। लोग यहां प्लॉट नहीं खरीदना चाहते थे। पिछले कुछ सालों में बीडीए के अफसरों ने कोशिशें शुरू कीं तो परियोजना ने कुछ गति पकड़ी। 2020 के बाद परियोजना ने रफ्तार पकड़ना शुरू किया। अब 13 में से 12 सेक्टरों में बसावट हो चुकी है। एक सेक्टर के लिए प्लाट मुहैया कराने की तैयारी चल रही है। यह योजना अब अंतिम चरण में है।
ग्रेटर बरेली के लिए जमीन का सत्यापन आखिरी चरण में है। जल्द ही इस योजना को धरातल पर उतारा जाएगा।
- योगेंद्र कुमार, सचिव बीडीए
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रामगंगा नगर आवासीय योजना की सफलता के बाद बीडीए ने नई कॉलोनी के तौर पर ग्रेटर बरेली बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है जिसे करीब दो सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में बसाने की योजना है। इस कॉलोनी के लिए जमीन का इंतजाम करने के लिए पांच गांवों के किसानों से संपर्क साधा जा रहा है। सभी गांवों में जमीन का अनुमानित क्षेत्रफल अलग-अलग है। रामनगर उर्फ मोहनपुर से 7.70 लाख वर्ग मीटर, अहिरोला से 6.20 लाख वर्ग मीटर, वालीपुर अहमदपुर से 6.70 लाख, नवदिया झादा से 1.60 लाख और कचौली से 24 हजार वर्ग मीटर जमीन समेत कुल 22.5 लाख वर्ग मीटर जमीन ली जानी है। इसके लिए किसानों से बातचीत चल रही है। बताते हैं कि बीडीए की टीम गांवों में सर्वे कर रही है। इसमें निजी और सरकारी भवनों की गिनती भी हो रही है।
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ग्रेटर बरेली में प्लॉट बेचेगा बीडीए
बताया जा रहा है कि कि ग्रेटर बरेली में बीडीए प्लॉट बेचेगा लेकिन आवंटियों के आवास एक ही का मॉडल पर तैयार होंगे। सत्तर गज से लेकर दो सौ गज तक के प्लॉट होंगे। व्यावसायिक कार्यों के लिए अलग जगह कॉलोनी में होगी। उसका मूल्य भी बीडीए उसी अनुसार तय करेगा। यहां प्लॉट रामगंगा नगर आवासीय योजना से महंगे होंगे। कारण बताया जा रहा है कि जमीन का मूल्य बीडीए को अधिक चुकाना पड़ेगा। उसी के मुताबिक प्लॉटों के रेट तय होंगे। हालांकि इसमें सामान्य आवासों का भी कोटा होगा जिनकी दरें कम होंगी। इसके लिए बीडीए अलग नियम बनाएगा।
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18 साल बाद आबाद हो पाई रामगंगा नगर परियोजना
बीडीए ने 2004 में रामगंगा नगर आवासीय योजना की शुरूआत की थी। शुरू में यह परियोजना फ्लॉप हो गई। लोग यहां प्लॉट नहीं खरीदना चाहते थे। पिछले कुछ सालों में बीडीए के अफसरों ने कोशिशें शुरू कीं तो परियोजना ने कुछ गति पकड़ी। 2020 के बाद परियोजना ने रफ्तार पकड़ना शुरू किया। अब 13 में से 12 सेक्टरों में बसावट हो चुकी है। एक सेक्टर के लिए प्लाट मुहैया कराने की तैयारी चल रही है। यह योजना अब अंतिम चरण में है।
ग्रेटर बरेली के लिए जमीन का सत्यापन आखिरी चरण में है। जल्द ही इस योजना को धरातल पर उतारा जाएगा।
- योगेंद्र कुमार, सचिव बीडीए