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 बरेली को अभी इंतजार है मोदी इम्पैक्ट का

Sat, 27 May 2017 01:28 AM IST
बरेली। 
बरेली।  Updated Sat, 27 May 2017 01:28 AM IST
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Bareilly is waiting for Modi's empact
Bareilly is waiting for Modi's impact - फोटो : Bareilly is waiting for Modi's impact
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के तीन साल पूरे हो गए। तीन साल में केंद्र सरकार ने 70 से ज्यादा योजनाएं शुरू कीं लेकिन उनका पूरा फायदा अबी जनता को नहीं मिल पाया। इसकी बड़ी वजह पहले यूपी में सपा की सरकार का होना बताया गया। जनता ने वह बात भी स्वीकार की। विधानसभा चुनाव में भाजपा को 325 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ प्रदेश की सत्ता भी सौंप दी। अभी भी सरकारी तंत्र की मंद रफ्तार से गांव के आखिरी छोर पर रहने वाले गरीब और कमजोर विकास योजनाओं के पहुंचने के इंतजार में हैं।  मोदी सरकार की कुछ विकास योजनाओं की प्रगति पर एक नजर-
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स्वच्छ भारत मिशन
दो अक्टूबर (गांधी जयंती) 2014 को प्रधानमंत्री ने ‘स्वच्छ भारत मिशन’ योजना शुरू की। पीएम के खुद हाथ में झाड़ू उठाने का असर दिखा। मंत्री, विधायक, महापौर से लेकर पार्षद और आम जनता भी झाड़ू लेकर सड़कों पर उतर पड़ी। सिस्टम की लाचारी यहां भी भारी पड़ी। नगर निगम ने उत्साह नहीं दिखाया। न तो तीन साल में कूड़ा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट प्लाँट चालू हो पाया। न ही ट्रंचिंग ग्राउंड का इंतजाम। कूड़ा सड़कों पर न दिखे। इसके लिए डोर टू डोर योजना चली। वह भी फ्लाप हो चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में 18 हजार का शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। गांवों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित करने का काम अधूरा है।
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पीएम आवास योजना
सबको आवास देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू हुई। इसमें तीन लाख वार्षिक से लेकर 20 लाख तक की आमदनी वाले परिवारों के लिए ब्याज सब्सिडी की अलग-अलग स्कीम हैं। पीपीपी मोड पर प्रारंभ होने वाली इस योजना में लाभार्थियों को मकान बनाने, मरम्मत कराने या बने हुए 12 लाख तक के मकान खरीदने के लिए 2.5 लाख तक सब्सिडी या ब्याज की छूट दी गई है। अभी तक आवेदकों से ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन ही लिए जा रहे हैं।  गरीब और मध्यमवर्ग को ये योजना जमीन पर उतरने का इंतजार है।
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प्रधानमंत्री जनधन योजना
इस योजना में बरेली में भी बैंकों ने कैंप लगाकर जीरो बैलेंस पर 2.75 लाख से ज्यादा खाते खोले गए। नोटबंदी के दौरान कालाधन नए नोटों में बदलने के लिए बड़े लोगों ने इन खातों का इस्तेमाल किया। अधिकांश खातों में गैस सब्सिडी ही आ रही है। हालांकि बैंक खाते खोलने के बाद ये उम्मीद थी अधिकांश लोग कैशलेश सिस्टम से जुड़ेंगे। मगर, ऐसा नहीं हो पाया। लेन देन न होने के चलते जनधन योजना के तमाम खाते बंद हो गए। सरकार केवल खाते खुलना ही उपलब्धि मान रही है जबकि गरीबों को खातों से कोई फायदा नहीं हो पाया। न तो उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी और न ही आमदनी के साधन बढ़े। 
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
ये योजना निजी बीमा कंपनी चला रही है। केवल उन किसानों का ही बीमा हो पाता है जिनका केसीसी बना है। बीमा कंपनी किसानों से प्रीमियम तो जमा करती है लेकिन जब फसल को नुकसान होता है तो 48 घंटे के अंदर उसके खेत का सर्वे कर नुकसान का आकलन हो पाने में कठिनाइयां आती हैं। इसलिए किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाता। बीमा कंपनी का टोल फ्री नंबर बंद होने की बात भी सामने आ चुकी है। शहर में बीमा कंपनी का कोई दफ्तर नहीं है। जहां किसान अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इसका परिणाम ये है कि जिस अनुपात में किसान अपनी फसल का प्रीमियम जमा करते हैं। उसका 20 फीसदी भी मुआवजा नहीं मिल पाता। 

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
पीएम उज्जवला योजना की शुरूआत एक मई 2016 को उत्तर प्रदेश के बलिया से की गई। इसमें बीपीएल परिवार की महिलाओं को मुफ्त में रसोई गैस कनेक्शन जरूर मिले। बरेली में भी 20 हजार से ज्यादा परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन मिल गए। हालांकि वे गरीब इस योजना में गैस कनेक्शन पाने में कामयाब नहीं हो पाए जिनके नाम बीपीएल सूची में दर्ज नहीं थे। इस योजना में ऐसे परिवारों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन देने के इंतजाम नहीं किए गए जो बीपीएल सूची में नहीं थे और उनकी आमदनी कम थी। ऐसे गरीब सरकार की अन्य योजनाओं से भी वंचित हो रहे हैं।  
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