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बरेली कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर जोगा सिंह होठी का निधन
बरेली
Updated Sat, 20 Feb 2016 01:37 AM IST
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बरेली। बरेली कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर के तौर पर अमिट छाप बनाने वाले इतिहासकार डॉ. जोगा सिंह होठी का अकस्मात निधन समूचे शिक्षा जगह को अपूर्णनीय क्षति दे गया। पिछले साल मार्च में बरेली कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष पद से रिटायर हुए डॉ. होठी एक-डेढ़ साल से अस्वस्थ थे। उन्हें किडनी की दिक्कत थी लेकिन लंबे चले इलाज के बाद वह स्वस्थ हो चुके थे। बृहस्पतिवार को देर रात पीलीभीत बाईपास स्थित 34 शक्तिनगर आवास पर उनकी तबियत अचानक बिगड़ी तो परिजनों ने निकट के एक अस्पताल में भर्ती करा दिया, जहां रात साढ़े 12 बजे के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।
शुक्रवार को सुबह से ही शहर में उनके शुभचिंतक, शिक्षा जगत और राजनीतिक तथा सामाजिक लोग उनके आवास पर शोक-संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए उमड़ने शुरू हो गए। बरेली कॉलेज में शोक की लहर दौड़ गई। शोक सभा के बाद कॉलेज बंद कर दिया गया। सारे शिक्षक और कर्मचारी उनके आवास पर पहुंचे। रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने भी गहरा शोक जताया। डॉ. होठी 1995 में बरेली कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर बनाए गए थे। उसके बाद से लगातार 18 साल तक इस पद पर रहे और इस दौरान कड़े अनुशासन के लिए उनकी पहचान सिर्फ कॉलेज तक ही सीमित नहीं रही। पूरे जिले और रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से संबद्ध सारे कॉलेजों में उनको कैंपस में अनुशासन कायम करने के लिए कड़ाई का पर्याय मना जाता था। बरेली कॉलेज में कई बड़ी घटनाओं को कंट्रोल करने में उनकी अहम भूमिका रही। खुराफाती छात्रों के साथ वह सख्ती से पेश आते थे और अपने साथ रखने वाले डंडे के सहारे वह कॉलेज का माहौल अनुशासित करते थे। उन्होंने रुहेलखंड के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और बरेली कॉलेज के इतिहास पर एक दर्जन से ज्यादा चर्चित पुस्तकें लिखकर इतिहासकार के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। डॉ. होठी अपने पीछे पत्नी अविंदर कौर और बेटा हेमंत होठी को छोड़ गए हैं। हेमंत नेवी में कार्यरत हैं। पिता के निधन की सूचना पर वह शनिवार को मुंबई से बरेली रवाना हो गए। अंत्येष्टि के लिए परिजनों के कनाडा में रहने वाले उनके भाई और बहन-बहनोई के आने का इंतजार है, जो रविवार शाम तक यहां पहुंचें। इसके चलते सोमवार को सुबह 11 बजे मॉडल टाउन में उनकी अंत्येष्टि की जाएगी।
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शुक्रवार को सुबह से ही शहर में उनके शुभचिंतक, शिक्षा जगत और राजनीतिक तथा सामाजिक लोग उनके आवास पर शोक-संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए उमड़ने शुरू हो गए। बरेली कॉलेज में शोक की लहर दौड़ गई। शोक सभा के बाद कॉलेज बंद कर दिया गया। सारे शिक्षक और कर्मचारी उनके आवास पर पहुंचे। रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के शिक्षकों ने भी गहरा शोक जताया। डॉ. होठी 1995 में बरेली कॉलेज के चीफ प्रॉक्टर बनाए गए थे। उसके बाद से लगातार 18 साल तक इस पद पर रहे और इस दौरान कड़े अनुशासन के लिए उनकी पहचान सिर्फ कॉलेज तक ही सीमित नहीं रही। पूरे जिले और रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से संबद्ध सारे कॉलेजों में उनको कैंपस में अनुशासन कायम करने के लिए कड़ाई का पर्याय मना जाता था। बरेली कॉलेज में कई बड़ी घटनाओं को कंट्रोल करने में उनकी अहम भूमिका रही। खुराफाती छात्रों के साथ वह सख्ती से पेश आते थे और अपने साथ रखने वाले डंडे के सहारे वह कॉलेज का माहौल अनुशासित करते थे। उन्होंने रुहेलखंड के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और बरेली कॉलेज के इतिहास पर एक दर्जन से ज्यादा चर्चित पुस्तकें लिखकर इतिहासकार के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। डॉ. होठी अपने पीछे पत्नी अविंदर कौर और बेटा हेमंत होठी को छोड़ गए हैं। हेमंत नेवी में कार्यरत हैं। पिता के निधन की सूचना पर वह शनिवार को मुंबई से बरेली रवाना हो गए। अंत्येष्टि के लिए परिजनों के कनाडा में रहने वाले उनके भाई और बहन-बहनोई के आने का इंतजार है, जो रविवार शाम तक यहां पहुंचें। इसके चलते सोमवार को सुबह 11 बजे मॉडल टाउन में उनकी अंत्येष्टि की जाएगी।
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