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बरेली कॉलेज में प्राचार्य पद पर विवाद- अफसरों ने जवाब तक नहीं दिया तो हाईकोर्ट पहुंचीं डॉ. पूर्णिमा
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बरेली। वरिष्ठता को नजरअंदाज कर बरेली कॉलेज में डॉ. अनुराग मोहन बनाए जाने के मामले में प्रशासन से शासन तक प्रत्यावेदन देने के बावजूद कोई जवाब तक नहीं मिला तो आखिरकार डॉ. पूर्णिमा अनिल आखिरकार हाईकोर्ट पहुंच गईं। प्राचार्य पद पर दावा करते हुए उन्होंने शासन के अलावा कमिश्नर, कुलपति और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को पार्टी बनाया है। सोमवार को जस्टिस सरल श्रीवास्तव की बेंच इस पर सुनवाई करेगी।
बताया जा रहा है कि हाल ही में मुरादाबाद के डीएके कॉलेज में प्राचार्य पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट से डॉ. अनुपमा मेहरोत्रा के पक्ष में फैसला आने के बाद डॉ. पूर्णिमा ने भी हाईकोर्ट जाने का निर्णय लिया। खुद को वरिष्ठ बताते हुए डॉ. पूर्णिमा ने बरेली कॉलेज में प्राचार्य पद पर डॉ. अनुराग मोहन की तैनाती को चुनौती दी है। पहले उन्होंने इस मामले में डीएम, कमिश्नर, कुलपति और क्षेत्रीय उच्चशिक्षा अधिकारी समेत कई स्तर पर प्रत्यावेदन दिया था। कमिश्नर और डीएम ने पहले डॉ. अनुराग मोहन की नियुक्ति को गलत माना लेकिन फिर अचानक इस प्रकरण से हाथ खींच लिए। डॉ. पूर्णिमा ने हाल ही में कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल से मुलाकात कर मुरादाबाद कॉलेज के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर निर्णय लेने का आग्रह भी किया था लेकिन कुलपति से जवाब मिला कि उनके मामले में स्पष्ट आदेश होने पर ही निर्णय लिया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने 12 दिसंबर को उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी जिस पर सोमवार को सुनवाई होगी। दूसरी ओर प्रबंधन ने इस मामले में एक और दांव खेल दिया है। पिछले दिनों डॉ. पीके अग्रवाल से प्राचार्य पद के लिए आवेदन ले लिया गया था ताकि डॉ. अनुराग मोहन को हटाने की नौबत आने पर उन्हें आगे किया जा सके।
कॉलेज भी रखेगा अपना पक्ष
बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट में डॉ. पूर्णिमा अनिल की घेराबंदी पर बरेली कॉलेज से एक शिक्षक को अधिवक्ता के साथ पक्ष रखने के लिए इलाहाबाद भेजा गया है। कॉलेज में यह भी चर्चा है कि पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा से भी इस मामले को लेकर कुछ दस्तावेजों पर साइन कराए गए हैं।
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बताया जा रहा है कि हाल ही में मुरादाबाद के डीएके कॉलेज में प्राचार्य पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट से डॉ. अनुपमा मेहरोत्रा के पक्ष में फैसला आने के बाद डॉ. पूर्णिमा ने भी हाईकोर्ट जाने का निर्णय लिया। खुद को वरिष्ठ बताते हुए डॉ. पूर्णिमा ने बरेली कॉलेज में प्राचार्य पद पर डॉ. अनुराग मोहन की तैनाती को चुनौती दी है। पहले उन्होंने इस मामले में डीएम, कमिश्नर, कुलपति और क्षेत्रीय उच्चशिक्षा अधिकारी समेत कई स्तर पर प्रत्यावेदन दिया था। कमिश्नर और डीएम ने पहले डॉ. अनुराग मोहन की नियुक्ति को गलत माना लेकिन फिर अचानक इस प्रकरण से हाथ खींच लिए। डॉ. पूर्णिमा ने हाल ही में कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल से मुलाकात कर मुरादाबाद कॉलेज के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर निर्णय लेने का आग्रह भी किया था लेकिन कुलपति से जवाब मिला कि उनके मामले में स्पष्ट आदेश होने पर ही निर्णय लिया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने 12 दिसंबर को उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी जिस पर सोमवार को सुनवाई होगी। दूसरी ओर प्रबंधन ने इस मामले में एक और दांव खेल दिया है। पिछले दिनों डॉ. पीके अग्रवाल से प्राचार्य पद के लिए आवेदन ले लिया गया था ताकि डॉ. अनुराग मोहन को हटाने की नौबत आने पर उन्हें आगे किया जा सके।
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कॉलेज भी रखेगा अपना पक्ष
बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट में डॉ. पूर्णिमा अनिल की घेराबंदी पर बरेली कॉलेज से एक शिक्षक को अधिवक्ता के साथ पक्ष रखने के लिए इलाहाबाद भेजा गया है। कॉलेज में यह भी चर्चा है कि पूर्व प्राचार्य डॉ. अजय शर्मा से भी इस मामले को लेकर कुछ दस्तावेजों पर साइन कराए गए हैं।
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