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बरेली और आसपास के जिलों में अधिक बारिश से नदियां उफान पर

Mon, 18 Jul 2016 01:20 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली Updated Mon, 18 Jul 2016 01:20 AM IST
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Bareilly and surrounding districts more rain rivers
बहगुल नदी में बढ़ा जलस्तर
अधिक बारिश के कारण बरेली जिले के आधा दर्जन गांवों की आबादी में पानी घुस आया है। भविष्य में और खतरा हो सकता है, इसलिए प्रशासन ने सदर, बहेड़ी और मीरगंज तहसील के जल प्लावन से प्रभावित होेने वाले दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को अलर्ट कर दिया है। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
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राम गंगा नदी खतरे के निशान से कुछ ही नीचे हैं, जबकि शारदा नदी खतरे के निशान के आसपास है। वहीं दूसरी ओर बरेली सहित प्रदेश के सभी जिलों में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए सिंचाई मंत्री शिव पाल यादव ने मंगलवार को लखनऊ में बैठक बुलाई है। जिला प्रशासन ने तीन महीने पहले शासन से मोटर वोट तथा अन्य उपकरण बाढ़ से बचाव के लिए मांगे थे लेकिन नहीं मिले। तहसील सदर, बहेड़ी और मीरगंज इलाकों में पूरी तरह से बाढ़ चौकी भी स्थापित नहीं हुईं हैं। आपूर्ति और स्वास्थ्य विभाग की ओर से इंतजाम नहीं हुए हैं।
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गोला बैराज से बीती रात करीब एक बजे  किच्छा नदी में करीब 45 हजार क्यूसक पानी छोड़ने के बाद किच्छा नदी उफान पर आ गई थी। इसी कारण प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों  रजपुरा, बगिया, रतनपुर नौडांडी, बांकौली के लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की सलाह दी है। अकेले बांकौली के 18 घरों में पानी भर गया है।
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बाढ से निपटने को 10 चौकियां बनाई गई हैं
तहसीलदार कुंवर बहादुर सिंह ने बताया कि बाढ़ से निपटने को करीब दस चौकियां बना कर उसमें कर्मचारियों को तैनात कर दिया है। बाढ़ प्रभावित वाले गांवों में अवैध रूप से रेता खनन खतरा बना हुआ है। ग्रामीण लगातार प्रशासन से अवैध खनन रोकने की मांग कर चुके हैं। लेकिन उभनकी शिकायत को अनसुना कर दिया है।
बारिश से जलस्तर बढ़ा, कई गांव बाढ़-कटान की जद में
मीरगंज में बारिश से नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बाढ़-कटान का खतरा मंडराने लगा है। सुल्तानपुर, धर्मपुरा, नगरिया कलां और बफरी अब्दुल नवीपुर समेत कई नदियों किनारे बसे कई गांवों के लोग कटान की जद में आ गए हैं। नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम पूरे दिन लोगों को खबरदार करती रही।

 बिहारीपुर की ओर कटान का खतरा
बिहारीपुर की ओर दुनका-शेरगढ़ रोड पर बहगुल नदी के पास के गांवों के कटने का खतरा है। यहां पर नदी सड़क से कुछ ही मीटर नीचे यह नदी बह रही है। वसई में भागीरथ गंगवार के आम के बाग के 15 साल पुराने दो फलदार पेड़ बहगुल के कटान के कारण गिरकर बह गए । बाग के कम से कम 20 और पेड़ों के नदी में समाने का डर है। नायब तहसीलदार अवधेश कुमार, कानूनगो राकेश शर्मा और लेखपाल चोखेलाल नदी किनारे बसे गांवों में पहुंचे और लोगों के घरों से कीमती सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर डेरा डालने को कह दिया।
‘जिले में बाढ़ नियंत्रण के इंतजाम पूरे हैं। शासन से कुछ उपकरण मांगे हैं, जो कि जल्द ही मिल जाएंगे।’ मनोज कुमार एडीएम (फाइनेंस)
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