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आयुष्मान का सच- ऑटो-मकान बिक गया... इलाज नहीं मिला
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बरेली। आयुष्मान योजना के तहत कार्ड धारकों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल चक्कर काटते रहते है। इलाज के लिए किसी को जेवर बेचने पड़ रहे हैं तो किसी का मकान तक बिक जा रहा है। शहर के कटरा चांद खां निवासी एक मरीज को जिला अस्पताल से निजी अस्पताल रेफर किया गया। इसके बाद भी अस्पताल ऑपरेशन करने की बजाय उसे हर बार नई तारीखें देकर टरका रहा है।
मोहल्ला कटरा चांद खां निवासी पप्पू मौर्या के बाएं पैर के पंजे में करीब एक साल पहले दर्द शुरू हुआ। उसने जिला अस्पताल से लेकर निजी चिकित्सकों के यहां दिखाया। कुछ ही दिन में उसका पैर काला पड़ने लगा। उसने दिल्ली के एक अस्पताल में दिखाया, जहां जांचें हुईं और घुटने के नीचे से पैर काटने की बात कहकर एक महीने बाद आने को कहा गया। इलाज और जांचों में ही पप्पू मौर्या का मकान बिक गया। उसके पास दिल्ली जाने तक के पैसे नहीं बचे तो वह दोबारा जिला अस्पताल आया। यहां से उसे भोजीपुरा के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया। यहां पप्पू तीन महीने से चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे इलाज नहीं दिया जा रहा। इलाज न होने से पप्पू के पैर का दर्द बढ़ने के साथ ही इंफेक्शन भी बढ़ रहा है। पप्पू ने बताया कि जिस अस्पताल में रेफर किया गया, वह लोग भर्ती कर बाहर से जांच कराने के नाम पर छह से सात हजार रुपये खर्च कराते हैं। पैर काटने की बात कह रहे हैं, लेकिन आपरेशन के लिए हर बार एक माह बाद आने की बात कह देते हैं। अब उसके पास पैसे नहीं बचे तो वह दोबारा अस्पताल भी नहीं जा सका। बताया कि उसके पांच बेटियां हैं। वह ऑटो चलाता था, लेकिन पैर खराब होने के बाद उसका ऑटो भी बिक गया। अब पत्नी घरों में काम करके परिवार चला रही है।
मरीज मुझसे आकर मिले
‘आयुष्मान कार्ड है तो रेफर होने के बाद इलाज के लिए अस्पताल मना नहीं कर सकता है। उन्हें इलाज करना होगा। पीड़ित मुझे आकर मिले, उसका इलाज अविलंब कराया जाएगा।’
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-डॉ. विनीत कुमार शुक्ल, सीएमओ
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मोहल्ला कटरा चांद खां निवासी पप्पू मौर्या के बाएं पैर के पंजे में करीब एक साल पहले दर्द शुरू हुआ। उसने जिला अस्पताल से लेकर निजी चिकित्सकों के यहां दिखाया। कुछ ही दिन में उसका पैर काला पड़ने लगा। उसने दिल्ली के एक अस्पताल में दिखाया, जहां जांचें हुईं और घुटने के नीचे से पैर काटने की बात कहकर एक महीने बाद आने को कहा गया। इलाज और जांचों में ही पप्पू मौर्या का मकान बिक गया। उसके पास दिल्ली जाने तक के पैसे नहीं बचे तो वह दोबारा जिला अस्पताल आया। यहां से उसे भोजीपुरा के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया। यहां पप्पू तीन महीने से चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे इलाज नहीं दिया जा रहा। इलाज न होने से पप्पू के पैर का दर्द बढ़ने के साथ ही इंफेक्शन भी बढ़ रहा है। पप्पू ने बताया कि जिस अस्पताल में रेफर किया गया, वह लोग भर्ती कर बाहर से जांच कराने के नाम पर छह से सात हजार रुपये खर्च कराते हैं। पैर काटने की बात कह रहे हैं, लेकिन आपरेशन के लिए हर बार एक माह बाद आने की बात कह देते हैं। अब उसके पास पैसे नहीं बचे तो वह दोबारा अस्पताल भी नहीं जा सका। बताया कि उसके पांच बेटियां हैं। वह ऑटो चलाता था, लेकिन पैर खराब होने के बाद उसका ऑटो भी बिक गया। अब पत्नी घरों में काम करके परिवार चला रही है।
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मरीज मुझसे आकर मिले
‘आयुष्मान कार्ड है तो रेफर होने के बाद इलाज के लिए अस्पताल मना नहीं कर सकता है। उन्हें इलाज करना होगा। पीड़ित मुझे आकर मिले, उसका इलाज अविलंब कराया जाएगा।’
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-डॉ. विनीत कुमार शुक्ल, सीएमओ