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मोदी जी! गरीबों पर नहीं ‘कालाधन’ इसलिए बंद हुए ‘जनधन’ खाते
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Wed, 27 Jun 2018 04:54 PM IST
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जन धन योजना
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ऐसी चर्चा थी कि नोटबंदी से जमा होेने वाला कालाधन गरीबों के खाते में आएगा, इसलिए लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकता वाली जनधन योजना को लेकर काफी तेजी दिखाई दी थी। लेकिन कालाधन न मिलने पर शून्य बैलेंस पर जनधन खाता खुलवाने के लिए लोगों ने शुरूआत में जितनी दिलचस्पी दिखाई थी, अब उतनी ही तेजी से इन खातों के बंद होने का सिलसिला जारी है। खातों में लेनदेन न करने की वजह से करीब पांच लाख लोगों के अकाउंट निष्क्रिय हो चुके हैं। बैंक अफसरों का कहना है कि करीब 30 फीसदी खाताधारकों ने एटीएम ही नहीं लिए, जिन्हें बैंक वापस कर चुका है। जिन लोगों ने एटीएम कार्ड लिए लेकिन ट्रांजेक्शन नहीं किया, उसके कार्ड भी सर्विस से बाहर हो गए हैं। ऐसे खाताधारकों को बड़ा नुकसान यह हुआ है कि वे अब इन एटीएम पर हर साल मिलने वाले एक लाख का दुर्घटना बीमा का फायदा भी नहीं उठा सकेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने काफी जोर दिया था कि देश के हर नागरिक के पास अपना खाता हो। उनकी मंशा पूरी करने के लिए बैंकों ने बड़ी मुहिम चलाई। शुरूआत में जनधन खाते खोलने में लोगों ने ऊा काफी दिलचस्पी दिखाई। बरेली जिले में राष्ट्रीयकृत बैंकों की 381 शाखाओं में करीब 12 लाख खाते खुले, लेकिन यह संख्या एक आंकड़े से ज्यादा कुछ भी साबित नहीं हो सकी। खाताधारकों को यह उम्मीद थी कि जनधन खाते खुलवाने पर सरकार से कोई बड़ा फायदा मिलेगा, लेकिन समय गुजरने के साथ लोगों की इन खातों को लेकर दिलचस्पी खत्म होती चली गई। बैंक अफसरों की मानें तो जिले में 40 प्रतिशत यानी करीब पांच लाख जनधन खाते लेनदेन न होने से निष्क्रिय हो गए हैं। इन खाताधारकों को एटीएम कार्ड पर मिलने वाला एक लाख का रिस्क कवर भी नहीं मिल पाएगा।
खुद पैसा जमा करवाकर भी खाते नहीं बचा सके बैंक वाले
रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) ने भी करीब सालभर पहले यह आदेश जारी किया था कि शून्य बैलेंस वाले जिन खातों में लेनदेन नहीं हो रहा, उनकी छंटनी कर दी जाए। इसके बाद करीब बैंकों में 20 से 25 फीसदी तक जनधन खातों को बंद कर दिया गया था। सूत्र बताते हैं कि सरकार की छवि बचाने के लिए बैंक स्टाफ ने इन खातों में दो से लेकर पांच रुपये तक जमा करके उन्हें बंद होने से भी रोका था।
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नया शासनादेश : फिर नए जनधन खाते खुलवाने से बैंक वाले परेशान
जनधन खुलवाने की करीब सालभर की सुस्ती के बाद सरकार एक बार फिर जनधन खाता खुलवाने को लेकर सक्रिय हो गई है। केंद्र सरकार की तरफ से सभी बैंकों को आदेश जारी हुए हैं कि जो लोग वयस्क हो चुके हैं और उनके खाते नहीं खुले हैं, उन सभी के जनधन खातों से जोड़ा जाए। इसके लिए राज्य सरकार बैंकों को लिस्ट भी उपलब्ध कराएगी। इसके लिए बैंकों को जगह-जगह के कैंप लगाए जाने हैं। हालांकि बैंक अधिकारियों का कहना है कि जनधन खातों को खुलवाने को लेकर अब लोगों को राजी कर पाना काफी कठिन होगा।
342 रुपये में चार लाख के बीमा का करना है प्रचार
जनधन खाता खुलवाने के लिए बैंको में लगने वाले कैंप में लोगों को 342 रुपये में चार लाख का बीमा कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बैंक अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में 330 रुपये में दो लाख और जीवन सुरक्षा बीमा योजना में 12 रुपये में भी दो लाख का बीमा सालभर के लिए होता है।
नए खाते भी नहीं खुल रहे
जनधन खातों के बंद होने का सिलसिला तो जारी है ही, साथ ही बैंकों में अब जनधन के नए खाते खुलना भी तकरीबन न के बराबर हो गया है। एक बैंक अधिकारी ने बताया कि इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इन खातों से महीनेभर में चार ट्रांजेक्शन से केवल दस हजार रुपये ही निकाला जा सकता है, जबकि दूसरे खातों से हर दिन 25 से 40 हजार रुपये का कैश लिया जा सकता है।
सरकार का आदेश मिलने के बाद फिर जनधन खातों को तेजी से खोलने के निर्देश सभी बैंकों को दे दिए गए हैं। इसके लिए बैंकों को कैंप भी लगाने हैं। इस योजना की समीक्षा अब नए सिरे से शुरू हो गई है। - ओपी बढेरा, लीड बैंक मैनेजर
प्रमुख बैंकों में खोले गए जनधन खाते
बैंक खातों की संख्या
बैंक आफ बड़ौदा 340613
इलाहाबाद बैंक 19598
पंजाब नेशनल बैंक 112957
एसबीआई 313137
ओबीसी 17289
यूनियन बैंक 18451
सेंट्रल बैंक आफ इंडिया 15925
बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक 280126
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प्रधानमंत्री मोदी ने काफी जोर दिया था कि देश के हर नागरिक के पास अपना खाता हो। उनकी मंशा पूरी करने के लिए बैंकों ने बड़ी मुहिम चलाई। शुरूआत में जनधन खाते खोलने में लोगों ने ऊा काफी दिलचस्पी दिखाई। बरेली जिले में राष्ट्रीयकृत बैंकों की 381 शाखाओं में करीब 12 लाख खाते खुले, लेकिन यह संख्या एक आंकड़े से ज्यादा कुछ भी साबित नहीं हो सकी। खाताधारकों को यह उम्मीद थी कि जनधन खाते खुलवाने पर सरकार से कोई बड़ा फायदा मिलेगा, लेकिन समय गुजरने के साथ लोगों की इन खातों को लेकर दिलचस्पी खत्म होती चली गई। बैंक अफसरों की मानें तो जिले में 40 प्रतिशत यानी करीब पांच लाख जनधन खाते लेनदेन न होने से निष्क्रिय हो गए हैं। इन खाताधारकों को एटीएम कार्ड पर मिलने वाला एक लाख का रिस्क कवर भी नहीं मिल पाएगा।
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खुद पैसा जमा करवाकर भी खाते नहीं बचा सके बैंक वाले
रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) ने भी करीब सालभर पहले यह आदेश जारी किया था कि शून्य बैलेंस वाले जिन खातों में लेनदेन नहीं हो रहा, उनकी छंटनी कर दी जाए। इसके बाद करीब बैंकों में 20 से 25 फीसदी तक जनधन खातों को बंद कर दिया गया था। सूत्र बताते हैं कि सरकार की छवि बचाने के लिए बैंक स्टाफ ने इन खातों में दो से लेकर पांच रुपये तक जमा करके उन्हें बंद होने से भी रोका था।
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नया शासनादेश : फिर नए जनधन खाते खुलवाने से बैंक वाले परेशान
जनधन खुलवाने की करीब सालभर की सुस्ती के बाद सरकार एक बार फिर जनधन खाता खुलवाने को लेकर सक्रिय हो गई है। केंद्र सरकार की तरफ से सभी बैंकों को आदेश जारी हुए हैं कि जो लोग वयस्क हो चुके हैं और उनके खाते नहीं खुले हैं, उन सभी के जनधन खातों से जोड़ा जाए। इसके लिए राज्य सरकार बैंकों को लिस्ट भी उपलब्ध कराएगी। इसके लिए बैंकों को जगह-जगह के कैंप लगाए जाने हैं। हालांकि बैंक अधिकारियों का कहना है कि जनधन खातों को खुलवाने को लेकर अब लोगों को राजी कर पाना काफी कठिन होगा।
342 रुपये में चार लाख के बीमा का करना है प्रचार
जनधन खाता खुलवाने के लिए बैंको में लगने वाले कैंप में लोगों को 342 रुपये में चार लाख का बीमा कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। बैंक अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में 330 रुपये में दो लाख और जीवन सुरक्षा बीमा योजना में 12 रुपये में भी दो लाख का बीमा सालभर के लिए होता है।
नए खाते भी नहीं खुल रहे
जनधन खातों के बंद होने का सिलसिला तो जारी है ही, साथ ही बैंकों में अब जनधन के नए खाते खुलना भी तकरीबन न के बराबर हो गया है। एक बैंक अधिकारी ने बताया कि इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इन खातों से महीनेभर में चार ट्रांजेक्शन से केवल दस हजार रुपये ही निकाला जा सकता है, जबकि दूसरे खातों से हर दिन 25 से 40 हजार रुपये का कैश लिया जा सकता है।
सरकार का आदेश मिलने के बाद फिर जनधन खातों को तेजी से खोलने के निर्देश सभी बैंकों को दे दिए गए हैं। इसके लिए बैंकों को कैंप भी लगाने हैं। इस योजना की समीक्षा अब नए सिरे से शुरू हो गई है। - ओपी बढेरा, लीड बैंक मैनेजर
प्रमुख बैंकों में खोले गए जनधन खाते
बैंक खातों की संख्या
बैंक आफ बड़ौदा 340613
इलाहाबाद बैंक 19598
पंजाब नेशनल बैंक 112957
एसबीआई 313137
ओबीसी 17289
यूनियन बैंक 18451
सेंट्रल बैंक आफ इंडिया 15925
बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक 280126