{"_id":"5d79605b8ebc3e015c0ca46a","slug":"actident-bareilly-news-bly3757478133","type":"story","status":"publish","title_hn":"डॉक्टर की झपकी ने कराया हादसा, तीन दिन से खड़े ट्रक में घुस गई कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डॉक्टर की झपकी ने कराया हादसा, तीन दिन से खड़े ट्रक में घुस गई कार
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फरीदपुर। राजमार्ग पर तीन दिन से ट्रक खड़ा होने के बाद भी किसी ने इसे हटाने की जहमत नहीं उठाई और यही भीषण हादसे की वजह बन गया। शायद तभी मामूली सी लापरवाही से कानपुर के नर्सिंग होम मालिक की मौत के साथ ही पांच लोगों की जान पर बन आई।
बरेली से लेकर सीतापुर तक फोरलेन का निर्माण हो रहा है। कई जगह निर्माण दस साल से अधूरा पड़ा हुआ है। यही नहीं लोगों ने हाईवे पर अतिक्रमण शुरू कर दिया है। राजमार्ग के किनारे कबाड़ियों का कब्जा हो हो गया है। राजमार्ग पर वैसे ही अधूरा निर्माण होने के कारण चौड़ाई कम है। ऊपर से अतिक्रमण करके लकड़ी का कारोबार करने वालों ने किनारों पर लकड़ियां डालकर कब्जा कर लिया है। अक्सर स्थानीय गांवों और कस्बों के ट्रक चालक भी अपने घर आते वक्त ट्रकों को राजमार्ग किनारे व ढाबों पर खड़ा कर देते हैं। फरीदपुर बाईपास पर भूरे खां गौंटिया में बुधवार सुबह हुए हादसे की वजह भी यही थी।
तीन दिन से यह ट्रक बाईपास पर खड़ा था। इसका काफी हिस्सा मिट्टी पर तो कुछ सड़क पर था। यह ट्रक रुद्रपुर की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में लगा हुआ है। वहीं से बाइक भरकर लाया था। पुलिस ने जानकारी की तो पता लगा कि ट्रक को फरीदपुर के भूरे खां गौंटिया का ड्राइवर चलाता है। ड्राइवर मोहर्रम पर घर आया था। उसने बाईपास किनारे ट्रक खड़ा कर दिया। बताते हैं कि फिजीशियन डॉ. देवेश कार चला रहे थे। कानपुर से लखनऊ होते हुए रात भर ये लोग चले तो इन्हें नींद आ गई। दूसरे लोगों के साथ उन्हें भी झपकी लग गई और इसी ट्रक में कार घुस गई। कार की स्पीड भी काफी थी इसलिए वह ट्रक के नीचे अंदर तक घुस गई। कार में फंसे लोगों को निकालने के लिये क्रेन मंगवानी पड़ी और फिर कार को काटकर लोगों को निकालना पड़ा।
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गड्ढों ने भी बनाया एक्सीडेंट जोन, मंत्री पुत्र और आयकर अफसर की जान गई
- फरीदपुर में जेढ़ गांव के आसपास का इलाका एक्सीडेंट जोन के रूप में जाना जाता है। हाईवे के खतरनाक मोड़ और जगह जगह गड्ढे जानलेवा हो गए हैं और अब तक कई लोगों की जान ले चुके हैं। कहीं रोड सिंगल है तो कहीं सड़क किनारे की मिट्टी धंस गई है। भूरे खां गौंटिया के पास कई होटल खुल गए हैं जहां बिरयानी खाने को ड्राइवर वाहन सड़क पर खड़े कर देते हैं। टोल प्लाजा के पास संकेतक नहीं है। यहां कहीं रोड है तो कहीं बीच में खाली जगह है। नए वाहन चालक अक्सर इस खाली जगह में घुस जाते हैं। पिछले तीन महीनों में ही यहां कई हादसे और मौतें हुई हैं। 25 जून को उत्तराखंड के शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय के युवा पुत्र अंकित पांडेय व उसके साथी की इसी जगह हादसे में मौत हो गई थी। इनके कई साथी घायल हुए थे जो बारात में जा रहे थे। इसके अलावा 13 जुलाई को उत्तराखंड के अल्मोड़ा परिक्षेत्र के आयकर अधिकारी व उनके अर्दली की भी यहीं मौत हुई।
धमाके की आवाज पर निकले लोग
- कार जब खडे़ ट्रक में घुसी तो बहुत जोर का धमाका हुआ। सुबह छह बजे की इस घटना के वक्त अधिकांश लोग अपने घरों में थे। तेज आवाज से वे बाहर निकलकर आए। देखा तो कार में फंसें लोग चिल्ला रहे थे। तब मोहल्ले वालों ने मदद की और पुलिस को सूचना दी।
दो बच्चों के पिता थे सत्यदेव
- हादसे में मरे सत्यदेव कुशवाहा के परिवार में पत्नी मधु, छह साल का बेटा देव और चार साल की बेटी गुड़िया है। रिश्तेदार नितिन ने बताया कि उन्होंने मधु को शाम तक उसके पति की मौत की सूचना नहीं दी है।
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बरेली से लेकर सीतापुर तक फोरलेन का निर्माण हो रहा है। कई जगह निर्माण दस साल से अधूरा पड़ा हुआ है। यही नहीं लोगों ने हाईवे पर अतिक्रमण शुरू कर दिया है। राजमार्ग के किनारे कबाड़ियों का कब्जा हो हो गया है। राजमार्ग पर वैसे ही अधूरा निर्माण होने के कारण चौड़ाई कम है। ऊपर से अतिक्रमण करके लकड़ी का कारोबार करने वालों ने किनारों पर लकड़ियां डालकर कब्जा कर लिया है। अक्सर स्थानीय गांवों और कस्बों के ट्रक चालक भी अपने घर आते वक्त ट्रकों को राजमार्ग किनारे व ढाबों पर खड़ा कर देते हैं। फरीदपुर बाईपास पर भूरे खां गौंटिया में बुधवार सुबह हुए हादसे की वजह भी यही थी।
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तीन दिन से यह ट्रक बाईपास पर खड़ा था। इसका काफी हिस्सा मिट्टी पर तो कुछ सड़क पर था। यह ट्रक रुद्रपुर की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में लगा हुआ है। वहीं से बाइक भरकर लाया था। पुलिस ने जानकारी की तो पता लगा कि ट्रक को फरीदपुर के भूरे खां गौंटिया का ड्राइवर चलाता है। ड्राइवर मोहर्रम पर घर आया था। उसने बाईपास किनारे ट्रक खड़ा कर दिया। बताते हैं कि फिजीशियन डॉ. देवेश कार चला रहे थे। कानपुर से लखनऊ होते हुए रात भर ये लोग चले तो इन्हें नींद आ गई। दूसरे लोगों के साथ उन्हें भी झपकी लग गई और इसी ट्रक में कार घुस गई। कार की स्पीड भी काफी थी इसलिए वह ट्रक के नीचे अंदर तक घुस गई। कार में फंसे लोगों को निकालने के लिये क्रेन मंगवानी पड़ी और फिर कार को काटकर लोगों को निकालना पड़ा।
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गड्ढों ने भी बनाया एक्सीडेंट जोन, मंत्री पुत्र और आयकर अफसर की जान गई
- फरीदपुर में जेढ़ गांव के आसपास का इलाका एक्सीडेंट जोन के रूप में जाना जाता है। हाईवे के खतरनाक मोड़ और जगह जगह गड्ढे जानलेवा हो गए हैं और अब तक कई लोगों की जान ले चुके हैं। कहीं रोड सिंगल है तो कहीं सड़क किनारे की मिट्टी धंस गई है। भूरे खां गौंटिया के पास कई होटल खुल गए हैं जहां बिरयानी खाने को ड्राइवर वाहन सड़क पर खड़े कर देते हैं। टोल प्लाजा के पास संकेतक नहीं है। यहां कहीं रोड है तो कहीं बीच में खाली जगह है। नए वाहन चालक अक्सर इस खाली जगह में घुस जाते हैं। पिछले तीन महीनों में ही यहां कई हादसे और मौतें हुई हैं। 25 जून को उत्तराखंड के शिक्षामंत्री अरविंद पांडेय के युवा पुत्र अंकित पांडेय व उसके साथी की इसी जगह हादसे में मौत हो गई थी। इनके कई साथी घायल हुए थे जो बारात में जा रहे थे। इसके अलावा 13 जुलाई को उत्तराखंड के अल्मोड़ा परिक्षेत्र के आयकर अधिकारी व उनके अर्दली की भी यहीं मौत हुई।
धमाके की आवाज पर निकले लोग
- कार जब खडे़ ट्रक में घुसी तो बहुत जोर का धमाका हुआ। सुबह छह बजे की इस घटना के वक्त अधिकांश लोग अपने घरों में थे। तेज आवाज से वे बाहर निकलकर आए। देखा तो कार में फंसें लोग चिल्ला रहे थे। तब मोहल्ले वालों ने मदद की और पुलिस को सूचना दी।
दो बच्चों के पिता थे सत्यदेव
- हादसे में मरे सत्यदेव कुशवाहा के परिवार में पत्नी मधु, छह साल का बेटा देव और चार साल की बेटी गुड़िया है। रिश्तेदार नितिन ने बताया कि उन्होंने मधु को शाम तक उसके पति की मौत की सूचना नहीं दी है।