{"_id":"120-97439","slug":"Bareilly-97439-120","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरटीओ ने लिपिक को सस्पेंड किया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरटीओ ने लिपिक को सस्पेंड किया
Bareilly
Updated Tue, 08 Jul 2014 05:33 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। बिना लाइसेंस शुल्क जमा किए वाहन का रजिस्ट्रेशन कर विभाग को लाखों रुपये का चूना लगाने वाले लिपिक चंद्र प्रकाश अग्रवाल को आरटीओ ने सस्पेंड कर दिया है। इस मामले में उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज है, पर पुलिस एक महीने बीतने के बाद भी कार्रवाई नहीं कर पाई है। पुलिस ने सिर्फ एक दलाल को पकड़कर जेल भेज कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है।
आरटीओ आफिस में दलालों के माध्यम से फर्जी रजिस्ट्रेशन करने का धंधा भी होता है। दलाल और कर्मी मिलकर बिना शुल्क जमा किए वाहन को नंबर आवंटित कर देते हैं। इसका खुलासा 26 मई को हुआ था। एआरटीओ आरके वर्मा ने थाना कैंट में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि दलालों के कहने पर गोपनीय पासवर्ड विभाग के लिपिक चंद्रप्रकाश अग्रवाल ने पंजीकरण नंबर जानकर एक वाहन को आवंटित कर दिया। इसकी फीस जमा नहीं की गई। फीस खुद हड़प ली गई। इस मामले में वाहन स्वामी मेराज अली निवासी फरीदपुर के अलावा लिपिक चंद्रप्रकाश और अस्थाई तौर पर आरटीओ आफिस में काम करने वाले विनोद, बरेली साहूकारा के जाहिद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मेराज का कहना था कि उसने रजिस्ट्रेशन कराने को एक बैंक मैनेजर के सामने पंजीयन शुल्क दलाल कमल जगवानी के माध्यम से लिपिक को दिया। इसके बावजूद पैसा जमा न करके उसे नंबर आवंटित कर दिया गया। इसमें उसकी क्या गलती है। कैंट पुलिस ने पिछले दिनों कमल जगवानी को तो गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन इसके अलावा अभी तक किसी अन्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। इंस्पेक्टर देवराज राठी का कहना है कि लिपिक और दलाल ही नहीं, बल्कि इस फर्जीवाड़े में एक अफसर भी शामिल है, जिसे विवेचना के दौरान मुकदमे में नामजद कर गिरफ्तार किया जाएगा।
विज्ञापन
आरटीओ आफिस में दलालों के माध्यम से फर्जी रजिस्ट्रेशन करने का धंधा भी होता है। दलाल और कर्मी मिलकर बिना शुल्क जमा किए वाहन को नंबर आवंटित कर देते हैं। इसका खुलासा 26 मई को हुआ था। एआरटीओ आरके वर्मा ने थाना कैंट में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि दलालों के कहने पर गोपनीय पासवर्ड विभाग के लिपिक चंद्रप्रकाश अग्रवाल ने पंजीकरण नंबर जानकर एक वाहन को आवंटित कर दिया। इसकी फीस जमा नहीं की गई। फीस खुद हड़प ली गई। इस मामले में वाहन स्वामी मेराज अली निवासी फरीदपुर के अलावा लिपिक चंद्रप्रकाश और अस्थाई तौर पर आरटीओ आफिस में काम करने वाले विनोद, बरेली साहूकारा के जाहिद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मेराज का कहना था कि उसने रजिस्ट्रेशन कराने को एक बैंक मैनेजर के सामने पंजीयन शुल्क दलाल कमल जगवानी के माध्यम से लिपिक को दिया। इसके बावजूद पैसा जमा न करके उसे नंबर आवंटित कर दिया गया। इसमें उसकी क्या गलती है। कैंट पुलिस ने पिछले दिनों कमल जगवानी को तो गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन इसके अलावा अभी तक किसी अन्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। इंस्पेक्टर देवराज राठी का कहना है कि लिपिक और दलाल ही नहीं, बल्कि इस फर्जीवाड़े में एक अफसर भी शामिल है, जिसे विवेचना के दौरान मुकदमे में नामजद कर गिरफ्तार किया जाएगा।
विज्ञापन