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व्यवसायिक नजरिया छोड़ें डाक्टर: प्रो. चावला

Mon, 18 Mar 2013 05:32 AM IST
Bareilly
Bareilly Updated Mon, 18 Mar 2013 05:32 AM IST
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बरेली। श्री राम मूर्ति स्मारक इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज के रविवार को आयोजित दूसरे दीक्षांत समारोह में 2006 व 2007 बैच के कुल 106 एमबीबीएस छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गई। इस दौरान उन्हें चिकित्सीय ज्ञान का उपयोग जनकल्याण में करने का संकल्प भी दिलाया गया।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए पीजीआई चंडीगढ़ के निदेशक प्रो. योगेश चावला ने कहाकि जब तक मानवता से जुड़ा कोई कार्य न किया जाए तब तक किसी चिकित्सीय सेवा का कोई मतलब नही है। महात्मा गांधी कहते थे कि स्वस्थ संस्कृति से ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है। यही सच्चा धन है। उन्होंने भावी चिकित्सकों का आह्वान करते हुए कहाकि वे मेडिकल सेक्टर को सिर्फ व्यवसायिक नजरिये से न देखें। डाक्टर भगवान का दूसरा रूप होता है। लिहाजा जनमानस की अकांक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करें। संस्थान के चेयरमैन देव मूर्ति ने कहाकि यह बड़े गौरव की बात है कि बरेली के इस मेडिकल कालेज से एमबीबीएस के दूसरे बैच के छात्र उपाधि ग्रहण किए हैं। उम्मीद है कि व समयबद्ध, विनम्रता व कर्मठता के साथ कार्य करेंगे। डीन प्रो. वीपी श्रोत्रिया ने समस्त उपाधिधारकों को 11 बिंदुओं पर शपथ दिलाई। चेयरमैन ने सभी डिग्रीधारकों को दीक्षा प्रदान की। इस मौके पर एसआरएमएस की ट्रस्टी आशा मूर्ति, प्रशासनिक निदेशक आदित्य मूर्ति, रिचा मूर्ति, श्यामल गुप्ता, सुभाष मेहरा, डा. प्रभाकर गुप्ता,डा. एचओ अग्रवाल, डा.टीडी बिष्ट, उमेश सक्सेना, डा.आईए खान, शिरीष गुप्ता, विनीत वर्मा, अजीत सक्सेना, दिनेश, नितिन रस्तोगी, अर्जित चौधरी, बीबी कंचन, केएम शर्मा आदि मौजूद रहे।
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इन मेधावियों को मिला पुरस्कार
सत्र 2006-2011
अंकित सिंह स्वर्ण पदक(51 हजार नकद)
रोली अग्रवाल रजत पदक
रचित सक्सेना कांस्य पदक
प्रियंका यादव विशेष पुरस्कार( सर्वोच्च उपस्थिति पर)
सत्र 2007-11
अनु सिंह स्वर्ण पदक(51 हजार नकद)
अभिषेक चौहान स्वर्ण पदक(बेस्ट आलराउंडर)
गरिमा सिंह रजत पदक
रूसिल जैन कांस्य पदक
गुरप्रीत कौर विशेष पुरस्कार( सर्वोच्च उपस्थिति)

इन्हें मिला सर्टिफिकेट आफ आनर सम्मान
2006 बैच की रोली अग्रवाल, अंकित सिंह, प्रियंका यादव, अंकित गुप्ता, अंकिता चौहान, रचित सक्सेना, विवेक उपाध्याय वहीं 2007 बैच की गरिमा सिंह, अनु सिंह,असबाह शम्स व रूसिल जैन को विभिन्न विषयों पर सर्टिफिकेट आफ आनर से नवाजा गया।
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रोबोटिक्स सर्जरी से मरीजों को मिलेगी राहत

बरेली।समारोह के बाद पत्रकार वार्ता में चंडीगढ़ पीजीआई के निदेशक प्रो. योगेश चावला ने जानकारी दी कि शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में नित हो रहे शोधों के जरिए अब रोबोटिक्स सर्जरी के आविष्कार में मदद मिली है। यह मरीजों के लिए खासी राहतकारी साबित हो रही है। क्योंकि इसमें रंच मात्र का कट शरीर में लगाने की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा इस प्रक्रिया से आपरेशन में नसों व धमनियों के कटाव की गुंजाइश नहंी रहती। सरकारी क्षेत्र के बजाए निजी सेक्टर में स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर होने के सवाल पर उन्होंने कह कि निजी क्षेत्र के चिकित्सकों को अच्छी खासी सेलरी मिलती है। इसके साथ ही उन्हें तमाम रिसर्च के लिए बजट भी उपलब्ध होते रहते हैं। जिससे नई-नई तकनीकों से निजी क्षेत्र के डाक्टर हमेशा अपडेट होते रहते हैं। ऐसे में सरकारी डाक्टर वीआरएस ले रहे हैं।



करेंगे सरकारी नौकरी मगर


सरकारी सुविधाएं पर्याप्त देखरेख के अभाव में दुर्व्यस्थाओं में तब्दील हो जाती हैं। ऐसे में चिकित्सक ठीक ढंग से कार्य नहीं कर पाते । लिहाजा सरकारी व्यवस्था सुधारी जानी चाहिए। डाक्टरों को अच्छे संसाधन मुहैया कराए जाने चाहिए।
अनु सिंह, गोल्ड मेडलिस्ट एमबीबीएस बैच 2007

मैं गांव का रहने वाला हूं। इस नाते ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए काम करना चाहता हूं। मगर सरकारी अस्पतालों की दीन हीन दशा देख मन में निराशा हो जाती है। काम करने की अनिच्छा होती है।
अंकित सिंह गोल्ड मेडलिस्ट एमबीबीएस बैच 2006

सरकारी अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनें व बिजली की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। ताकि डाक्टरों को उपचार में परेशानी न हो। सुविधाओं की कमी के कारण ही सरकारी नौकरी का मोह चिकित्सक छोड़ने को मजबूर होते हैं।

गरिमा सिंह, सिल्वर मेडलिस्ट एमबीबीएस बैच 2007

सरकार को स्वास्थ्य सुविधाओं की मानीटरिंग के लिए एक सुदृढ़ तंत्र विकसित करना चाहिए। ताकि उस मद में आवंटित धनराशि का गलत इस्तेमाल न हो सके। अच्छा माहौल मिलेगा तो भला कोई सरकारी नौकरी में कोई क्यों नही आना चाहेगा।
गुरप्रीत कौर, एमबीबीएस बैच 2007
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