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टैग: ग्राम पंचायतों का परिसीमन कहीं फेल न हो जाए सियासी गणित
Bareilly
Updated Mon, 10 Nov 2014 05:30 AM IST
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बरेली। ग्राम पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन का प्रस्ताव तैयार करने का आदेश आने के बाद इसमें लागू किया गया सियासी गणित फेल होने के आसार पैदा हो गए हैं। माना जा रहा है कि 186 प्रस्तावों की संख्या और बढ़ सकती है और कई प्रस्ताव बदले भी जा सकते हैं क्योंकि इन पर भारी संख्या में आपत्तियां आने का अनुमान है।
बता दें कि जिले में नई ग्राम पंचायतों के लिए लगभग छह सौ प्रस्ताव आए थे, जिनमें से जिला कमेटी ने 186 को ही फाइनल करके अनुमोदन के लिए शासन को भेजा था। यह सारी प्रक्रिया गोपनीय ढंग से की गई इसलिए लोगों को पता ही नहीं लगा कि कौन-कौन से मजरों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए। अब शासन के प्रस्तावित ग्राम पंचायतों पर आपत्तियां मांगने के आदेश जारी कर देने से यह सारी गोपनीयता धरी रह जाएगी। प्रस्ताव सार्वजनिक होने के बाद उनके विरुद्ध आपत्तियों के ढेर लगने की उम्मीद है क्योंकि कई ऐसे मजरों की उम्मीदवारी खारिज कर दी गई थी जो मानकों पर पूरी तरह खरे उतर रहे थे।
सूत्रों का कहना है कि नई ग्राम पंचायत बनाने में सिर्फ मानकों को ही अनदेखी नहीं हुई बल्कि नेताओं और जनप्रतिनिधियों के सियासी गुणाभाग का भी पूरा ख्याल रखा गया। यही वजह है कि मानकों पर खरे उतरने वाले कई मजरे नई ग्राम पंचायत बनाने के लिए प्रस्तावित नहीं हो सके। शासन के आदेश पर पंचायत राज विभाग ने प्रस्तावित ग्राम पंचायतों की सूचियां खंड विकास अधिकारी कार्यालयों में भिजवा दी हैं। इन्हें सोमवार को चस्पा कर दिया जाएगा और इन पर 12 नवंबर तक आपत्तियां मांगी जाएंगी। आपत्तियों के बाद अगर उनका निस्तारण सही से होता है तो जाहिर है कि नए ग्राम पंचायतों की प्रस्तावित संख्या 186 से और ज्यादा बढ़ सकती है।
बता दें कि जिले में नई ग्राम पंचायतों के लिए लगभग छह सौ प्रस्ताव आए थे, जिनमें से जिला कमेटी ने 186 को ही फाइनल करके अनुमोदन के लिए शासन को भेजा था। यह सारी प्रक्रिया गोपनीय ढंग से की गई इसलिए लोगों को पता ही नहीं लगा कि कौन-कौन से मजरों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए। अब शासन के प्रस्तावित ग्राम पंचायतों पर आपत्तियां मांगने के आदेश जारी कर देने से यह सारी गोपनीयता धरी रह जाएगी। प्रस्ताव सार्वजनिक होने के बाद उनके विरुद्ध आपत्तियों के ढेर लगने की उम्मीद है क्योंकि कई ऐसे मजरों की उम्मीदवारी खारिज कर दी गई थी जो मानकों पर पूरी तरह खरे उतर रहे थे।
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सूत्रों का कहना है कि नई ग्राम पंचायत बनाने में सिर्फ मानकों को ही अनदेखी नहीं हुई बल्कि नेताओं और जनप्रतिनिधियों के सियासी गुणाभाग का भी पूरा ख्याल रखा गया। यही वजह है कि मानकों पर खरे उतरने वाले कई मजरे नई ग्राम पंचायत बनाने के लिए प्रस्तावित नहीं हो सके। शासन के आदेश पर पंचायत राज विभाग ने प्रस्तावित ग्राम पंचायतों की सूचियां खंड विकास अधिकारी कार्यालयों में भिजवा दी हैं। इन्हें सोमवार को चस्पा कर दिया जाएगा और इन पर 12 नवंबर तक आपत्तियां मांगी जाएंगी। आपत्तियों के बाद अगर उनका निस्तारण सही से होता है तो जाहिर है कि नए ग्राम पंचायतों की प्रस्तावित संख्या 186 से और ज्यादा बढ़ सकती है।
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