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स्वच्छता दावों की खुल गई पोल.. टॉप सौ शहरों की सूची में बरेली गोल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sun, 24 Jun 2018 12:04 AM IST
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स्वच्छ भारत अभियान
- फोटो : SELF
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स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर तमाम दावे और इंतजाम करने के बावजूद नाकामी ही हाथ लगी है। शनिवार को देश भर में स्वच्छता को लेकर टॉप 100 शहरों की रैंकिंग जारी की गई, इसमें बरेली का नाम नहीं है। उत्तर प्रदेश के चार शहर वाराणसी, गाजियाबाद, झांसी और कानपुर इसमें जगह बनाने में कामयाब हुए हैं। वाराणसी को 29, गाजियाबाद को 36, झांसी को 60 और कानपुर को 65वीं रैंक मिली है।
नगर निगम का मेयर बनते ही उमेश गौतम ने स्वच्छता को लेकर पूरी ताकत झोंक दी थी। बड़ी-बड़ी रैलियां, कॉलोनी और प्रतिष्ठानों में बैठकों समेत जागरूकता के लिए तमाम तामझाम किए गए। नगर निगम का दावा था कि इस बार बरेली टॉप-100 में जगह जरूर बना लेगा। मगर जब शनिवार को स्वच्छता सर्वेक्षण की सूची जारी हुई तो निगम के सारे दावे फेल हो गए। यूपी से इसमें सिर्फ वाराणसी, गाजियाबाद, झांसी और कानपुर को ही जगह मिली। इस सूची में नंबर एक पर फिर से इंदौर ने बाजी मारी है।
दिखावे में जुटा रहा निगम, जमीन पर नहीं उतरी हकीकत
स्वच्छता सर्वेक्षण में जगह बनाने के लिए नगर निगम सिर्फ कागजों का पेट भरने में जुटा रहा, लेकिन प्लानिंग जमीन पर नहीं उतरी। इसके चलते नगर निगम को इस सर्वे में पिछड़ना पड़ा। वर्ष 2017 में भी नगर निगम को 298वीं रैंक ही हासिल हुई थी।
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इन बिंदुओं पर फेल हुआ निगम
- गीले और सूखे कूड़े का अलग-अलग निस्तारण नहीं।
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं।
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं।
- शत प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं।
- सभी वार्ड ओडीएफ घोषित, मगर हकीकत में फेल।
- सभी वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की व्यवस्था नहीं।
- स्वच्छता को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं।
- डस्टबिन कुछ इलाकों में लगे लेकिन इस्तेमाल नहीं।
स्वच्छता सर्वेक्षण की शनिवार को पहली सूची जारी हुई है। इसमें अधिकांश शहर मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के हैं। यूपी के सिर्फ चार शहर इसमें शामिल हैं। गीले और सूखे कूड़े का अलग-अलग निस्तारण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट न होने की वजह से हम पिछड़े हैं। - राजेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त
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नगर निगम का मेयर बनते ही उमेश गौतम ने स्वच्छता को लेकर पूरी ताकत झोंक दी थी। बड़ी-बड़ी रैलियां, कॉलोनी और प्रतिष्ठानों में बैठकों समेत जागरूकता के लिए तमाम तामझाम किए गए। नगर निगम का दावा था कि इस बार बरेली टॉप-100 में जगह जरूर बना लेगा। मगर जब शनिवार को स्वच्छता सर्वेक्षण की सूची जारी हुई तो निगम के सारे दावे फेल हो गए। यूपी से इसमें सिर्फ वाराणसी, गाजियाबाद, झांसी और कानपुर को ही जगह मिली। इस सूची में नंबर एक पर फिर से इंदौर ने बाजी मारी है।
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दिखावे में जुटा रहा निगम, जमीन पर नहीं उतरी हकीकत
स्वच्छता सर्वेक्षण में जगह बनाने के लिए नगर निगम सिर्फ कागजों का पेट भरने में जुटा रहा, लेकिन प्लानिंग जमीन पर नहीं उतरी। इसके चलते नगर निगम को इस सर्वे में पिछड़ना पड़ा। वर्ष 2017 में भी नगर निगम को 298वीं रैंक ही हासिल हुई थी।
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इन बिंदुओं पर फेल हुआ निगम
- गीले और सूखे कूड़े का अलग-अलग निस्तारण नहीं।
- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं।
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं।
- शत प्रतिशत घरों में शौचालय नहीं।
- सभी वार्ड ओडीएफ घोषित, मगर हकीकत में फेल।
- सभी वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की व्यवस्था नहीं।
- स्वच्छता को लेकर लोगों में जागरूकता नहीं।
- डस्टबिन कुछ इलाकों में लगे लेकिन इस्तेमाल नहीं।
स्वच्छता सर्वेक्षण की शनिवार को पहली सूची जारी हुई है। इसमें अधिकांश शहर मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के हैं। यूपी के सिर्फ चार शहर इसमें शामिल हैं। गीले और सूखे कूड़े का अलग-अलग निस्तारण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट न होने की वजह से हम पिछड़े हैं। - राजेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त