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रात में जितने घंटे प्रगति पढ़तीं जागती रहतीं उनकी मां
Updated Sun, 27 May 2018 02:40 AM IST
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बरेली।
प्रगति अग्रवाल ने भी 98 फीसदी अंक लेकर जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बीबीएल पब्लिक स्कूल में कॉमर्स ग्रुप की होनहार स्टूडेंट प्रगति के पिता मनोज अग्रवाल एलआईसी में नौकरी करते हैं जबकि मां रेनू अग्रवाल गृहणी हैं। प्रगति को एकाउंट और अर्थशास्त्र में 100 में 100 अंक मिले हैं। क्रिकेट और डांस के अलावा फिल्मी गाने सुनने का शौक है। प्रगति के मुताबिक, इस सफलता के लिए उन्होंने जितनी मेहनत की है, उससे कहीं ज्यादा परिस्रम उनकी मां रेनू ने किया है। प्रगति रात में जितनी देर पढ़ती थीं, उनकी मां भी उतनी देर जागती रहती थीं। सुबह प्रगति के जल्दी उठाने के लिए उन्हें भी उठना पढ़ता था। घर-गृहस्थी के काम की थकान के बावजूद उन्होंने अपने आराम से ज्यादा बेटी की पढ़ाई को तबज्जो दी। प्रगति भी अपनी सफलता का श्रेय सबसे पहले मां को ही देती हैं। इसके बाद पिता और शिक्षकों के सहयोग को सराहती हैं। बोलीं- यह सफलता छह से सात घंटे की कड़ी मेहनत से मिली है। कॅरियर के लिहाज से वह अभी सीए की तैयारी करेंगी। भविष्य में इनकम टैक्स ऑफीसर बनना चाहती हैं। आयकर विभाग में नौकरी करने की मंशा के पीछे उनका तर्क है कि वह कालाधन इकट्ठा करने वालों से पैसा निकालकर सरकारी खजाने में जमा कराना चाहती हैं, ताकि यह पैसा देश के काम आए और भ्रष्टाचार दूर हो। उनकी नजर में भ्रष्टाचार ही सबसे बड़ी समस्या है।
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प्रगति अग्रवाल ने भी 98 फीसदी अंक लेकर जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। बीबीएल पब्लिक स्कूल में कॉमर्स ग्रुप की होनहार स्टूडेंट प्रगति के पिता मनोज अग्रवाल एलआईसी में नौकरी करते हैं जबकि मां रेनू अग्रवाल गृहणी हैं। प्रगति को एकाउंट और अर्थशास्त्र में 100 में 100 अंक मिले हैं। क्रिकेट और डांस के अलावा फिल्मी गाने सुनने का शौक है। प्रगति के मुताबिक, इस सफलता के लिए उन्होंने जितनी मेहनत की है, उससे कहीं ज्यादा परिस्रम उनकी मां रेनू ने किया है। प्रगति रात में जितनी देर पढ़ती थीं, उनकी मां भी उतनी देर जागती रहती थीं। सुबह प्रगति के जल्दी उठाने के लिए उन्हें भी उठना पढ़ता था। घर-गृहस्थी के काम की थकान के बावजूद उन्होंने अपने आराम से ज्यादा बेटी की पढ़ाई को तबज्जो दी। प्रगति भी अपनी सफलता का श्रेय सबसे पहले मां को ही देती हैं। इसके बाद पिता और शिक्षकों के सहयोग को सराहती हैं। बोलीं- यह सफलता छह से सात घंटे की कड़ी मेहनत से मिली है। कॅरियर के लिहाज से वह अभी सीए की तैयारी करेंगी। भविष्य में इनकम टैक्स ऑफीसर बनना चाहती हैं। आयकर विभाग में नौकरी करने की मंशा के पीछे उनका तर्क है कि वह कालाधन इकट्ठा करने वालों से पैसा निकालकर सरकारी खजाने में जमा कराना चाहती हैं, ताकि यह पैसा देश के काम आए और भ्रष्टाचार दूर हो। उनकी नजर में भ्रष्टाचार ही सबसे बड़ी समस्या है।