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नवाबगंज जमीन घोटाला- खतौनियों की सवाल नकल और फोटो कापी पर लगी मुहर भी फर्जी

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Mon, 17 Jun 2019 01:47 AM IST
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बरेली। नवाबगंज जमीन घोटाले में फंसे राजस्व अभिलेखागार के कर्मचारियों से पूछताछ में यह सामने आया है कि खतौनियों की सवाल नकल और रिकार्ड की फोटो कापी पर लगी रिकार्ड रूम की मुहर भी फर्जी निकली है। नकल नवीस ने जांच अधिकारी को यह बताया कि इन अभिलेखों की छाया प्रति गुपचुप तरीके से कराई गई है। । हालांकि नकल नवीस पर यह आरोप सिद्घ पाया गया है कि उप संचालक चकबंदी (एसओसी) न्यायालय के आदेश में जब व्हाइटनर लगाकर छेड़छाड़ हुई थी तो रिकार्ड रूम के बाबुओं ने खतौनियों में अमल दरामद करने से पहले इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को क्यों नहीं दी?
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गांव डंडिया नजमुल निशा में अबरार हुसैन की सौ बीघा जमीन राजस्व रिकॉर्ड में जालसाजी कर हड़पने की कोशिश की गई थी। जनवरी में तत्कालीन एडीएम सिटी ओपी वर्मा ने एसीएम फर्स्ट से इस मामले की जांच कराई जिसमें राजस्व निरीक्षक चोखे सिंह, परगना अरेंजर राम मनोहर सक्सेना, रिकॉर्ड रूम के नकल नवीस रकिमुल हसनैन, डाक रनर वेद प्रकाश, चकबंदी विभाग के अहलमद रमोद सक्सेना और उप संचालक चकबंदी कोर्ट के चपरासी मकरूद्दीन को दोषी माना गया। डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह के आदेश के बाद सभी आरोपियों पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इसमें चकबंदी के रमोद और मरूद्दीन सस्पेंड हो चुके हैं। इधर एसीएम फर्स्ट मदन कुमार परगना अरेंजर राम मनोहर सक्सेना और नकल नवीस रकिमुल हसनैन भी जांच पूरी कर ली है। इस घोटाले में जालसाजों ने एसओसी कोर्ट के आदेश को व्हाइटनर लगाकर पलट दिया था। इसके आधार पर खतौनियों में भी नाम बदल दिए गए थे। बताते हैं कि कलक्ट्रेट के रिकार्ड रूम में नकल लेने के बहाने खतौनियों को बाहर लाया गया और विभागीय स्टाफ की मिलीभगत से उसमें खुर्द-बुर्द कर दिया। एसडीएम फर्स्ट ने जांच में पाया है कि खतौनी के सवाल नकल और उनकी फोटो कापी पर रिकार्ड रूम की जो मुहर लगी है, वह फर्जी है। ताकि यह साबित ही न हो सके कि रिकार्ड किसने निकाला है। जांच अधिकारी का कहना है कि हालांकि एसओसी के आर्डर पर व्हाइटनर लगा होने के बावजूद उच्चाधिकारियों को सूचना न देने पर रिकार्ड रूम के दोनों कर्मचारी आरोपी है। इसकी रिपोर्ट डीएम को दे दी गई है।

जांच दबाने के लिए फर्जी चिट्ठी से भी गुमराह करने की हुई थी कोशिश
नवाबगंज के डंडिया नजमुल निशा के अबरार हुसैन की सौ बीघा जमीन को धोखाधड़ी करके हापुड़ के तारिक के नाम दर्ज करा दिया गया था। बाद में तारिक के बेटे फिरोज ने इस जमीन का बैनामा तीन लोगों के नाम कर दिया। पहली बार इस जमीन की वर्ष 2005 में अमल दरामद हुई थी। इसके बाद वर्ष 2014 में उप संचालक चकबंदी रमाकांत शुक्ला ने इस खारिज करने के आदेश दिए थे, लेकिन वर्ष 2016 में इस आदेश को व्हाइटनर लगाकर पलट दिया गया। साथ ही जमीन का फर्जी ढंग से खतौनी में घोटालेबाजों के नाम चढ़ा दिए गए। घोटाले की जांच को दबाने के लिए जालसाजों ने फर्जी चिट्ठी तैयार करके अफसरों को गुमराह करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।

इस मामले में रिकार्ड रूम के दोनों कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई के लिए डीएम को फाइल भेज दी है। इसमें कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। हालांकि इसमें मास्टर माइंड से भी कड़ी पूछताछ करने की जरूरत है। -मदन कुमार, एसीएम फस्ट/जांच अधिकारी

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