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Bareilly News: कोरोना में संजीवनी बना 300 बेड अस्पताल
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बरेली। सपा सरकार में वर्ष 2018 में जब 300 बेड अस्पताल का निर्माण पूरा हुआ तो मंडल भर के मरीजों में आस जगी कि अब बेहतर इलाज के लिए दिल्ली और लखनऊ के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, लेकिन ये आस बीते करीब 8 वर्ष से अभी भी बाकी है। शासन से लेकर प्रशासन तक जिम्मेदारों ने अस्पताल के संचालन के दावे तो किए लेकिन धरातल पर ये दावे दम तोड़ गए। हालांकि अब कैबिनेट में मंजूरी मिलने के बाद इस अस्पताल को पीपीपी मोड पर संचालन होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जिला व महिला अस्पताल के अलावा मरीजों को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, इसके लिए शासन ने 300 बेड के लिए दिल खोलकर धनराशि खर्च की। मार्च 2013 से इस अस्पताल को बनाने का प्रोजेक्ट शुरू हुआ। करीब 10 साल बाद कोविड काल में इसे कोविड अस्पताल बनाया गया। तत्कालीन कमिश्नर संयुक्ता समद्दार ने यहां औपचारिक ओपीडी संचालन कराने का आदेश दिया।
उस दौरान से ही यहां ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीजों को इलाज मिल रहा है लेकिन स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया आरंभ न होने से गंभीर मरीजों को गैर अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है।
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अस्पताल में जनरल ओपीडी शुरू करने का आदेश देने के साथ यहां आईपीडी शुरू करने के लिए शासन को बजट का प्रस्ताव भेजा। शासन ने करीब 8.33 करोड़ रुपये स्वास्थ्य विभाग को भेजे। इस पैसे से डीप फ्रीजर, स्ट्रेचर, मरीजों के बेड, अलमारी, ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर, बाइपैप, आईसीयू बेड समेत तमाम उपकरणों की खरीद की गई। इन सभी उपकरणों को फिलहाल अस्पताल के स्टोर रूम में डंप कर दिया गया है। लेकिन आईपीडी कब शुरू होगी, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
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विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जिला व महिला अस्पताल के अलावा मरीजों को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, इसके लिए शासन ने 300 बेड के लिए दिल खोलकर धनराशि खर्च की। मार्च 2013 से इस अस्पताल को बनाने का प्रोजेक्ट शुरू हुआ। करीब 10 साल बाद कोविड काल में इसे कोविड अस्पताल बनाया गया। तत्कालीन कमिश्नर संयुक्ता समद्दार ने यहां औपचारिक ओपीडी संचालन कराने का आदेश दिया।
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उस दौरान से ही यहां ओपीडी में बड़ी संख्या में मरीजों को इलाज मिल रहा है लेकिन स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया आरंभ न होने से गंभीर मरीजों को गैर अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है।
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अस्पताल में जनरल ओपीडी शुरू करने का आदेश देने के साथ यहां आईपीडी शुरू करने के लिए शासन को बजट का प्रस्ताव भेजा। शासन ने करीब 8.33 करोड़ रुपये स्वास्थ्य विभाग को भेजे। इस पैसे से डीप फ्रीजर, स्ट्रेचर, मरीजों के बेड, अलमारी, ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर, बाइपैप, आईसीयू बेड समेत तमाम उपकरणों की खरीद की गई। इन सभी उपकरणों को फिलहाल अस्पताल के स्टोर रूम में डंप कर दिया गया है। लेकिन आईपीडी कब शुरू होगी, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।