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25 को होगा टेल्गो का ट्रायल, 8 बोगियों में काम जारी
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Fri, 20 May 2016 01:49 AM IST
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टेल्गो ट्रेन
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भारत में तेज रफ्तार से दौड़ने वाली पहली रेल के ट्रायल की तैयारियों का जायजा लेने शुक्रवार को पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक कार्यालय से इंजीनियरों की टीम इज्जनगर पहुंच रही है। टीम में चीफ मैकेनिकल इंजीनियर (सीएमई) के साथ उनके सहायक अधिकारी होंगे। यह टीम 25 मई से प्रस्तावित टेल्गो हाईस्पीड ट्रेन के ट्रायल की तैयारियों की समीक्षा करेगी। सीएमई की टीम के विजिट का कार्यक्रम बृहस्पतिवार को ही घोषित हुआ, जिसके बाद मुख्य कारखाना अधिकारी ने मीटिंग कर दौरे से संबंधित योजना बनाई।
गोरखपुर स्थित महाप्रबंधक कार्यालय से मीटिंग लेने आ रहे सीएमई एके सिंह ट्रायल की समीक्षा करेंगे। वर्कशॉप सूत्रों के मुताबिक, ट्रायल के लिए लाई गईं बोगियां सेकेंड हैंड हैं। टेल्गो कंपनी ने इंपोर्ट में होने वाले खर्च के कारण सेकेंड हैंड बोगियों को ट्रायल के लिए भारत भेजा है। 10 दिन पहले स्पेन से जल मार्ग से ये आठ बोगियां मुंबई बंदरगाह लाई गई थीं जो बरेली एनईआर के इज्जतनगर कारखाना पहुंच गईं हैं। इनको जोड़कर ट्रेन बनाने का काम चल रहा है। एनईआर के कई टेक्नीकल कर्मचारी आशंका जता रहे हैं कि कम वजन वाली यह ट्रेन आखिर किस तरह ओवर लोड बोगियों का भार उठाएगी।
रफ्तार के लिए किया है डिजायन
इस समय एनईआर की वर्कश्रॉप में स्पेन की कंपनी टेल्गो की आठ सदस्यीय टेक्नीकल टीम बोगियों की असेंबलिंग का काम कर रही है। टीम के तकनीकी सदस्य कार्नोस ने बताया कि अभी इस काम में एक सप्ताह का समय और लगेगा। इस ट्रेन को पाटो नाम से भी जाना जाता है, जो बत्तख का स्पेनिश नाम है। इस ट्रेन का आगे से हिस्सा बत्तख के मुंह जैसा है, जो कि एरोडायनमिक प्रतिरोध रोकने का काम करता है। जिससे ट्रेन हवा के दबाव को तेज गति में नियंत्रित कर सके। बोगी की बॉडी को वजन में हल्का और एयर टाइट और प्रेशराइज्ड बनाया गया है। जिससे ट्रेन टनल और क्रासिंग पर आसानी गुजर सके। ट्रेन का गुरुत्व केंद्र बहुत कम रखा गया है, जिससे यात्रियों को सफर करते समय आराम महसूस हो। इस ट्रेन की अधिकतम गति 350 किलोमीटर प्रति घंटा है, हर बोगी में 36 सीटें हैं। ट्रेन बोगी और इंजन निर्माता कंपनी टेल्गो लोकोमोटिव हाईस्पीड ट्रेन, इंटरसिटी और कंप्यूटर ट्रेन का निर्माण करती है।
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गोरखपुर स्थित महाप्रबंधक कार्यालय से मीटिंग लेने आ रहे सीएमई एके सिंह ट्रायल की समीक्षा करेंगे। वर्कशॉप सूत्रों के मुताबिक, ट्रायल के लिए लाई गईं बोगियां सेकेंड हैंड हैं। टेल्गो कंपनी ने इंपोर्ट में होने वाले खर्च के कारण सेकेंड हैंड बोगियों को ट्रायल के लिए भारत भेजा है। 10 दिन पहले स्पेन से जल मार्ग से ये आठ बोगियां मुंबई बंदरगाह लाई गई थीं जो बरेली एनईआर के इज्जतनगर कारखाना पहुंच गईं हैं। इनको जोड़कर ट्रेन बनाने का काम चल रहा है। एनईआर के कई टेक्नीकल कर्मचारी आशंका जता रहे हैं कि कम वजन वाली यह ट्रेन आखिर किस तरह ओवर लोड बोगियों का भार उठाएगी।
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रफ्तार के लिए किया है डिजायन
इस समय एनईआर की वर्कश्रॉप में स्पेन की कंपनी टेल्गो की आठ सदस्यीय टेक्नीकल टीम बोगियों की असेंबलिंग का काम कर रही है। टीम के तकनीकी सदस्य कार्नोस ने बताया कि अभी इस काम में एक सप्ताह का समय और लगेगा। इस ट्रेन को पाटो नाम से भी जाना जाता है, जो बत्तख का स्पेनिश नाम है। इस ट्रेन का आगे से हिस्सा बत्तख के मुंह जैसा है, जो कि एरोडायनमिक प्रतिरोध रोकने का काम करता है। जिससे ट्रेन हवा के दबाव को तेज गति में नियंत्रित कर सके। बोगी की बॉडी को वजन में हल्का और एयर टाइट और प्रेशराइज्ड बनाया गया है। जिससे ट्रेन टनल और क्रासिंग पर आसानी गुजर सके। ट्रेन का गुरुत्व केंद्र बहुत कम रखा गया है, जिससे यात्रियों को सफर करते समय आराम महसूस हो। इस ट्रेन की अधिकतम गति 350 किलोमीटर प्रति घंटा है, हर बोगी में 36 सीटें हैं। ट्रेन बोगी और इंजन निर्माता कंपनी टेल्गो लोकोमोटिव हाईस्पीड ट्रेन, इंटरसिटी और कंप्यूटर ट्रेन का निर्माण करती है।
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