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इलेक्शन दफ्तर में रहा सन्नाटा, कलक्ट्रेट खुला लेकिन कामकाज ठप
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बरेली। मतदान के बाद बुधवार को सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों और कर्मचारियों में थकान का असर साफ दिखाई दिया। करीब महीने भर से चहल-पहल के बाद बुधवार को इलेक्शन कार्यालय में सन्नाटा छाया रहा। दफ्तर तो खुला लेकिन कर्मचारी नदारद थे। ज्यादातर कर्मचारी परसाखेड़ा में चुनाव संबंधी रिपोर्ट बनाने के लिए चले गए थे। इसके अलावा कलक्ट्रेट के भी तमाम दूसरे कार्यालयों का भी यही हाल था। यहां भी अधिकांश अधिकारियों के ऑफिस बंद थे। कुछ कर्मचारी बैठे भी थे, लेकिन कोई काम नहीं हो रहा था। ऐसे में छोटे-मोटे काम कराने के लिए आए लोग इधर-उधर भटकने के बाद वापस चले गए।
10 मार्च को आचार संहिता लगने के साथ ही जिला प्रशासन चुनाव की तैयारियों में लग गया था। अप्रैल की शुरुआत में इलेक्शन दफ्तर भी काफी सक्रिय हो गया। इसके बाद मतदान से पहले तक यहां अधिकारियों के आने-जाने के साथ ही चुनाव तैयारियों में जुटे कर्मचारी, प्रत्याशियों के अभिकर्ताओं का दिनभर आना जाना लगा रहा, लेकिन मंगलवार को मतदान के बाद बुधवार को माहौल बदल गया। इलेक्शन ऑफिस में सुबह से काफी सन्नाटा था। दिन में एक-दो कर्मचारी दिखाई दिए। कुछ फाइलें और कागज ले जाने के बाद वे भी चले गए। इसके बाद में उसमें ताला लग गया। इसके अलावा कलक्ट्रेट के दूसरे कार्यालयों का भी यही हाल रहा। सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यालय में भी एक-दो कर्मचारी ही थे। एडीएम वित्त मनोज कुमार पांडेय भी नहीं थे। डीएम कार्यालय में कुछ कर्मचारी कुर्सियों पर बैठे थे, लेकिन एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी, एडीएम सिटी महेंद्र कुमार सहित दूसरे अधिकारी न होने से विभागीय काम नहीं हो पा रहे थे। कलक्ट्रेट में दो बजे के बाद सन्नाटा पसर गया।
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10 मार्च को आचार संहिता लगने के साथ ही जिला प्रशासन चुनाव की तैयारियों में लग गया था। अप्रैल की शुरुआत में इलेक्शन दफ्तर भी काफी सक्रिय हो गया। इसके बाद मतदान से पहले तक यहां अधिकारियों के आने-जाने के साथ ही चुनाव तैयारियों में जुटे कर्मचारी, प्रत्याशियों के अभिकर्ताओं का दिनभर आना जाना लगा रहा, लेकिन मंगलवार को मतदान के बाद बुधवार को माहौल बदल गया। इलेक्शन ऑफिस में सुबह से काफी सन्नाटा था। दिन में एक-दो कर्मचारी दिखाई दिए। कुछ फाइलें और कागज ले जाने के बाद वे भी चले गए। इसके बाद में उसमें ताला लग गया। इसके अलावा कलक्ट्रेट के दूसरे कार्यालयों का भी यही हाल रहा। सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यालय में भी एक-दो कर्मचारी ही थे। एडीएम वित्त मनोज कुमार पांडेय भी नहीं थे। डीएम कार्यालय में कुछ कर्मचारी कुर्सियों पर बैठे थे, लेकिन एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी, एडीएम सिटी महेंद्र कुमार सहित दूसरे अधिकारी न होने से विभागीय काम नहीं हो पा रहे थे। कलक्ट्रेट में दो बजे के बाद सन्नाटा पसर गया।
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