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यानी स्कूली बच्चे फिर पहनेंगे आधा स्वेटर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Tue, 25 Sep 2018 11:29 PM IST
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बेसिक शिक्षा विभाग इस बार भी बच्चों को सस्ते ही स्वेटर बांटेगा। यानी बच्चे इस साल भी आधा स्वेटर ही पहनेंगे, क्योंकि 200 रुपये में पूरा स्वेटर आना तो मुमकिन ही नहीं है। विभाग ने बच्चों के स्वेटर खरीद के रेट इस बार भी दो सौ रुपये ही रखे हैं। उसमें भी कमीशनबाजी का खेल चलना है। जाहिर है कि बड़ी संख्या में बच्चों को स्वेटर मिलना ही मुश्किल हैं और जिन्हें मिलेंगे भी उनकी क्वालिटी का अंदाज लगाया जा सकता है। बहरहाल, शासन की तरफ से 31 अक्तूबर तक सभी बच्चों को स्वेटर बांटने के आदेश दे दिए गए हैं।
करीब तीन हजार परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले करीब सवा तीन लाख बच्चों को इस बार स्वेटर खरीदकर देने हैं। इसके लिए प्रत्येक स्कूल में बनी विद्यालय प्रबंध समिति को खरीद करनी है। टीचरों का कहना है कि इस महंगाई में महज दो सौ रुपये में बच्चों का बढ़िया क्वालिटी का स्वेटर दे पाना मुमकिन नहीं है। पिछली बार भी स्वेटर की इतनी ही रकम निर्धारित थी। इससे बड़ी संख्या में अभिभावकों ने ये शिकायत की थी कि उनके बच्चों को स्वेटर ही नहीं मिले हैं। शासन ने पहली किस्त के तौर पर सौ रुपये स्वेटर का ही बजट दिया था। बाद में सौ रुपये की दूसरी किस्त मिलने के बाद स्वेटर की खरीद में फर्जीवाड़ा हुआ। इस मामले की जांच भी हुई लेकिन बाद में सारा मामला दबा दिया गया। हालांकि इस बार विभागीय अधिकारी खरीद में पूरी पारदर्शिता बरतने का दावा कर रहे हैं।
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करीब तीन हजार परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाले करीब सवा तीन लाख बच्चों को इस बार स्वेटर खरीदकर देने हैं। इसके लिए प्रत्येक स्कूल में बनी विद्यालय प्रबंध समिति को खरीद करनी है। टीचरों का कहना है कि इस महंगाई में महज दो सौ रुपये में बच्चों का बढ़िया क्वालिटी का स्वेटर दे पाना मुमकिन नहीं है। पिछली बार भी स्वेटर की इतनी ही रकम निर्धारित थी। इससे बड़ी संख्या में अभिभावकों ने ये शिकायत की थी कि उनके बच्चों को स्वेटर ही नहीं मिले हैं। शासन ने पहली किस्त के तौर पर सौ रुपये स्वेटर का ही बजट दिया था। बाद में सौ रुपये की दूसरी किस्त मिलने के बाद स्वेटर की खरीद में फर्जीवाड़ा हुआ। इस मामले की जांच भी हुई लेकिन बाद में सारा मामला दबा दिया गया। हालांकि इस बार विभागीय अधिकारी खरीद में पूरी पारदर्शिता बरतने का दावा कर रहे हैं।
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