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बरेली में पहला भूमि अर्जन प्राधिकरण बना
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बरेली। प्रदेश में भूमि अधिग्रहण संबंधी विवाद सुलझाने और मुआवजा आदि तय करने के लिए बरेली समेत आधा दर्जन मंडलों में भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुर्नव्यवस्थापन प्राधिकरण में पीठासीन अधिकारी नियुक्त हो गए हैं। साथ ही आधे अधूरे संसाधनों के बीच कामकाज भी शुरू हो गया है। जिला जज झांसी को बरेली में तैनात किया गया है।
विभिन्न सरकारी योजनाएं और विकास कार्यों के लिए भूमि अर्जन कार्य होता है। ज्यादातर मामलों में मुआवजा आदि पर विवाद हो जाते हैं और सिविल न्यायालय में मामले पहुंचते हैं। न्यायालयों पर ज्यादातर बोझ होने से वाद तय होने में देरी होती है। इसलिए सरकार ने सभी मंडलों में भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुर्नव्यवस्थापन प्राधिकरण गठित कर दिए हैं। पहले दौर में निसामुद्दीन- बरेली, मेरठ- एसवाई मियां, उमेश सिंह- झांसी, पीके कंसल- मुरादाबाद, चंद्रभान- फैजाबाद, सुभाष चंद्र शर्मा- कानपुर में पीठासीन अधिकारी तैनात किए गए हैं। पीठासीन अधिकारी वरिष्ठ जिला जज हैं। इन सभी स्थानों पर सीमित संसाधनों के बीच कामकाज शुरू हो गया है।
बताया जाता है कि वरिष्ठ जिला जजों को छह कमरों वाला आवास मिलना चाहिए क्योंकि सभी तैनात जज मंडलीय अधिकारी हो गए हैं, उनका स्तर भी कमिश्नर के समान हो गया है। अब बरेली समेत सभी मंडल मुख्यालयों पर अनुकूल आवास समस्या आ रही है, उनके प्राधिकरण कार्यालय परिसर भी छोटे हैं। बरेली में एडीएम सिटी समेत चार बड़े कमरों वाली अदालतें हैं, लेकिन परिसर प्राधिकरण को आवंटित नहीं किया है। साथ ही प्रतिनियुक्त पर दिया गया ज्यादातर स्टाफ भी अवकाश पर है।
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विभिन्न सरकारी योजनाएं और विकास कार्यों के लिए भूमि अर्जन कार्य होता है। ज्यादातर मामलों में मुआवजा आदि पर विवाद हो जाते हैं और सिविल न्यायालय में मामले पहुंचते हैं। न्यायालयों पर ज्यादातर बोझ होने से वाद तय होने में देरी होती है। इसलिए सरकार ने सभी मंडलों में भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुर्नव्यवस्थापन प्राधिकरण गठित कर दिए हैं। पहले दौर में निसामुद्दीन- बरेली, मेरठ- एसवाई मियां, उमेश सिंह- झांसी, पीके कंसल- मुरादाबाद, चंद्रभान- फैजाबाद, सुभाष चंद्र शर्मा- कानपुर में पीठासीन अधिकारी तैनात किए गए हैं। पीठासीन अधिकारी वरिष्ठ जिला जज हैं। इन सभी स्थानों पर सीमित संसाधनों के बीच कामकाज शुरू हो गया है।
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बताया जाता है कि वरिष्ठ जिला जजों को छह कमरों वाला आवास मिलना चाहिए क्योंकि सभी तैनात जज मंडलीय अधिकारी हो गए हैं, उनका स्तर भी कमिश्नर के समान हो गया है। अब बरेली समेत सभी मंडल मुख्यालयों पर अनुकूल आवास समस्या आ रही है, उनके प्राधिकरण कार्यालय परिसर भी छोटे हैं। बरेली में एडीएम सिटी समेत चार बड़े कमरों वाली अदालतें हैं, लेकिन परिसर प्राधिकरण को आवंटित नहीं किया है। साथ ही प्रतिनियुक्त पर दिया गया ज्यादातर स्टाफ भी अवकाश पर है।
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