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इलाज के चक्कर में बच्ची का पैर ही खराब हो गया
Updated Sat, 10 Jun 2017 01:23 PM IST
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बरेली।
आलोक नगर के राजीव कुमार और उनकी पत्नी दुर्गेश की शादी के चार साल बाद घर में बेटी जन्मी तो खुशियां आई लेकिन अब पूरा परिवार परेशान है। इलाज के चक्कर में एक माह की बच्ची का पैर खराब हो गया अब डॉक्टर कह रहे हैं पैर काटना पड़ेगा। राजीव और दुर्गेश के आंसू रुक नहीं रहे हैं । परिवार ने पहले पुलिस से मदद मांगी बात नहीं बनी तो अब सीजेएम की अदलत में वाद दायर किया है मवाधिकार आयोग तक कई जगह शिकायत भेजी है। इस बीच सीएमओ ने मामले का संज्ञान लेकर पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय बोर्ड गठित कर दिया है।
आलोक नगर शिव मंदिर के पास रहने वाले राजीव कुमार की पत्नी दुर्गेश को 2 मई को गर्भवती हालत में राजेंद्र नगर स्थित डॉ. नीरा अग्रवाल के मानस अस्पताल में भर्ती किया गया था। परिजनों ने कोर्ट में पत्र देकर कहा है कि डॉ. नीरा ने जच्चा- बच्चा की जान को खतरा बताते हुए तुरंत आपरेशन करने को बताया। मेजर आपरेशन से तीन किलो छह सौ ग्राम की स्वस्थ बच्ची ने जन्म लिया। आरोप है कि तीन मई को डॉ. नीरा ने डॉ. रवि खन्ना से बात कर बच्चे को सांस लेने में तकलीफ बताते हुए वेंटीलेटर की जरूरत बताई और डॉ. खन्ना के अस्पताल से आकर एंबुलेंस बच्ची को रामपुरबाग स्थित रवि खन्ना के अस्पताल में ले आई। परिजनाें ने बताया कि 4 मई से 8 मई तक डॉ. रवि खन्ना के अस्पताल में बच्ची भर्ती रही। बच्ची को वेंटीलेटर में रखा गया और ठीक होने का दिलासा देते रहे। आरोप है कि डॉ. खन्ना बाहर चले गए और फोन के माध्यम से स्टॉफ से इलाज करवाते रहे। इस दौरान बच्ची का दायां पैर उठना बंद हो गया और पैर सड़ने लगा। परिजनाें ने डिस्चार्ज कराने के लिए कहा तो इस पर भी झगड़ा हुआ। परिजनों ने बताया कि जब तक बेटी वेंटीलेटर पर रही तब तक 15 हजार रुपये रोज लिए गए और किसी को मिलने नहीं दिया गया। जब मिलने गए तो बच्ची का पैर खराब पाया। मेंहदी रत्ता अस्पताल में ले गए तो डॉक्टर ने केस गंभीर बताकर भर्ती करने से मना कर दिया और दिल्ली ले जाने को कहा। हालांकि बहुत सिफारिश के बाद मेंहदी रत्ता में बच्ची को भर्ती किया और बाहर से बाल रोग विशेषज्ञ बुलाकर दिखाया तो उन्हाेंने पैर काटने की बात कही है। अब बच्ची एसआरएमएस में भर्ती है और वहीं इलाज चल रहा है।
डॉक्टरों का पैनल 12 को देगा रिपोर्ट
परिजनाें ने शिकायत डीएम पिंकी जोवल से भी की है। जिन्होंने सीएमओ को मामला देखने के लिए कहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव ने इस मामले में तीन सदस्यीय बोर्ड गठित किया है। 12 जून को सभी सदस्याें के सामने परिजनों और डॉक्टराें को बुलाया गया है ताकि वे अपने साक्ष्य पेश करें। इसमें दो एसीएमओ और एक बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।
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बच्ची में जहरवाद था उसकी पहले दिन की रिपोर्ट में ही इसकी पुष्टि हो गई थी। इंफेक्शन से खून की सप्लाई रुकने लगती है और खून के थक्के जमने से उंगली व शरीर के अन्य छोटे अंगाें में इंफेक्शन बढ़ता है। बच्ची की नब्ज भी कम थी और बीपी भी नहीं उठ रहा था। मां के पेशाब में भी इंफेक्शन पाया गया। वह शॉक में थी। फोन से इलाज करने की बात गलत है। बच्ची हमारे यहां 4 से 5 दिन रहीं। परिजनाें को सब बता दिया गया था।
- डॉ. रवि खन्ना, बाल रोग विशेषज्ञ
मां को इन्फेक्शन था। पानी की कमी थी। डॉ खन्ना हमारे यहां बाल रोग विशेषज्ञ हैं उन्होंने बच्चे को देखा वह कराह रहा था इसलिए उसे शिफ्ट करने की जरूरत बतायी।
- डॉ नीरा अग्रवाल, मानस अस्पताल
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आलोक नगर के राजीव कुमार और उनकी पत्नी दुर्गेश की शादी के चार साल बाद घर में बेटी जन्मी तो खुशियां आई लेकिन अब पूरा परिवार परेशान है। इलाज के चक्कर में एक माह की बच्ची का पैर खराब हो गया अब डॉक्टर कह रहे हैं पैर काटना पड़ेगा। राजीव और दुर्गेश के आंसू रुक नहीं रहे हैं । परिवार ने पहले पुलिस से मदद मांगी बात नहीं बनी तो अब सीजेएम की अदलत में वाद दायर किया है मवाधिकार आयोग तक कई जगह शिकायत भेजी है। इस बीच सीएमओ ने मामले का संज्ञान लेकर पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय बोर्ड गठित कर दिया है।
आलोक नगर शिव मंदिर के पास रहने वाले राजीव कुमार की पत्नी दुर्गेश को 2 मई को गर्भवती हालत में राजेंद्र नगर स्थित डॉ. नीरा अग्रवाल के मानस अस्पताल में भर्ती किया गया था। परिजनों ने कोर्ट में पत्र देकर कहा है कि डॉ. नीरा ने जच्चा- बच्चा की जान को खतरा बताते हुए तुरंत आपरेशन करने को बताया। मेजर आपरेशन से तीन किलो छह सौ ग्राम की स्वस्थ बच्ची ने जन्म लिया। आरोप है कि तीन मई को डॉ. नीरा ने डॉ. रवि खन्ना से बात कर बच्चे को सांस लेने में तकलीफ बताते हुए वेंटीलेटर की जरूरत बताई और डॉ. खन्ना के अस्पताल से आकर एंबुलेंस बच्ची को रामपुरबाग स्थित रवि खन्ना के अस्पताल में ले आई। परिजनाें ने बताया कि 4 मई से 8 मई तक डॉ. रवि खन्ना के अस्पताल में बच्ची भर्ती रही। बच्ची को वेंटीलेटर में रखा गया और ठीक होने का दिलासा देते रहे। आरोप है कि डॉ. खन्ना बाहर चले गए और फोन के माध्यम से स्टॉफ से इलाज करवाते रहे। इस दौरान बच्ची का दायां पैर उठना बंद हो गया और पैर सड़ने लगा। परिजनाें ने डिस्चार्ज कराने के लिए कहा तो इस पर भी झगड़ा हुआ। परिजनों ने बताया कि जब तक बेटी वेंटीलेटर पर रही तब तक 15 हजार रुपये रोज लिए गए और किसी को मिलने नहीं दिया गया। जब मिलने गए तो बच्ची का पैर खराब पाया। मेंहदी रत्ता अस्पताल में ले गए तो डॉक्टर ने केस गंभीर बताकर भर्ती करने से मना कर दिया और दिल्ली ले जाने को कहा। हालांकि बहुत सिफारिश के बाद मेंहदी रत्ता में बच्ची को भर्ती किया और बाहर से बाल रोग विशेषज्ञ बुलाकर दिखाया तो उन्हाेंने पैर काटने की बात कही है। अब बच्ची एसआरएमएस में भर्ती है और वहीं इलाज चल रहा है।
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डॉक्टरों का पैनल 12 को देगा रिपोर्ट
परिजनाें ने शिकायत डीएम पिंकी जोवल से भी की है। जिन्होंने सीएमओ को मामला देखने के लिए कहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव ने इस मामले में तीन सदस्यीय बोर्ड गठित किया है। 12 जून को सभी सदस्याें के सामने परिजनों और डॉक्टराें को बुलाया गया है ताकि वे अपने साक्ष्य पेश करें। इसमें दो एसीएमओ और एक बाल रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।
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बच्ची में जहरवाद था उसकी पहले दिन की रिपोर्ट में ही इसकी पुष्टि हो गई थी। इंफेक्शन से खून की सप्लाई रुकने लगती है और खून के थक्के जमने से उंगली व शरीर के अन्य छोटे अंगाें में इंफेक्शन बढ़ता है। बच्ची की नब्ज भी कम थी और बीपी भी नहीं उठ रहा था। मां के पेशाब में भी इंफेक्शन पाया गया। वह शॉक में थी। फोन से इलाज करने की बात गलत है। बच्ची हमारे यहां 4 से 5 दिन रहीं। परिजनाें को सब बता दिया गया था।
- डॉ. रवि खन्ना, बाल रोग विशेषज्ञ
मां को इन्फेक्शन था। पानी की कमी थी। डॉ खन्ना हमारे यहां बाल रोग विशेषज्ञ हैं उन्होंने बच्चे को देखा वह कराह रहा था इसलिए उसे शिफ्ट करने की जरूरत बतायी।
- डॉ नीरा अग्रवाल, मानस अस्पताल