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भूमाफिया पर लगाम- खामोशी से अब इधर से उधर नहीं खिसकेंगी जमीनें

Sat, 15 Jun 2019 02:33 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 15 Jun 2019 02:33 AM IST
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भूमाफिया पर लगाम- खामोशी से अब इधर से उधर नहीं खिसकेंगी जमीनें
बरेली। हाल ही में कई घटनाओं ने साबित किया कि न सिर्फ कलक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम बल्कि सरकारी सिस्टम को भी बेशकीमती जमीनों पर नजर रखने वाले माफिया ने अपनी मुट्ठी में कैद कर लिया है। कमिश्नर रणवीर प्रसाद इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए जमीनों के दाखिल-खारिज में सभी खाताधारकों की सहमति को अनिवार्य कर दिया है। कमिश्नर के आदेश के मुताबिक किसी भी जमीन का खतौनी में दाखिल-खारिज अब तभी होगा जब उसके सभी खाताधारकों को बाकायदा नोटिस जारी करने के बाद यह सहमति ले ली जाएगी कि जमीन के क्रय-विक्रय पर उन्हें कोई एतराज नहीं है। कमिश्नर के इस आदेश से पूरे मंडल में उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है जिनकी जमीन पर माफिया अपने दांत गड़ाए हुए हैं।
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कलक्ट्रेट के रिकार्ड रूम में खतौनियों को खुरचकर जमीन पर कब्जा करने का सबसे बड़ा मामला फतेहगंज पूर्वी में सामने आया था। यहां माफिया ने सरकारी स्टाफ की सांठगांठ से सैकड़ों बीघा जमीन अपने नाम कराकर उस पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद ऐसा ही मामला नवाबगंज के गांव डंडिया नजमुल निशा में हुआ जहां एक किसान की सौ बीघा जमीन पर जालसाजी से दाखिल-खारिज कराकर कब्जा कर लिया गया। शहर के नामचीन सराफ राजकुमार अग्रवाल भी ऐसी ही जालसाजी के शिकार हुए। प्रशासन के ही लोगों ने उनकी पीलीभीत बाईपास पर करोड़ों की जमीन पर राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी करके कब्जा करा दिया। सबसे गंभीर बात यह है कि इन घोटालों में लेखपाल-कानूनगो जैसे निचले स्तर के स्टाफ के अलावा डिप्टी कलक्टर जैसे अधिकारियों का भी हाथ सामने आया है। इन घोटालों का शिकार हुए ज्यादातर लोगों को इसकी भनक भी तब लगी जब उनकी जमीन पर कब्जा हो गया।
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कायदे के मुताबिक अगर किसी जमीन के दस खाताधारक हैं और कोई दो खाताधारकों की जमीन खरीदता है तो बाकी आठ खाताधारकों को इसकी कोई सूचना नहीं दी जाती। ऐसे में लेखपाल और तहसील का स्टाफ गाटा नंबर में अगर हेराफेरी भी कर दे तो सह खातेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगती। गुपचुप तरीके से रजिस्ट्री के कब्जा भी दिला दिया जाता है। हाल ही में कमिश्नर के कोर्ट में इस तरह के कई केस पहुंचे जिनमें जमीनों की खरीद-फरोख्त में नियमों का पूरी तरह अनुपालन नहीं किया गया। इसके बाद कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने मंडल के सभी डीएम, एसडीएम और तहसीलदार को आदेश जारी किया है कि किसी भी जमीन का खतौनी में अमल-दरामद कराने से पहले सभी खाताधारकों को इसकी लिखित सूचना भेजने के साथ उन्हें आपत्ति दाखिल करने का भी समय दिया जाएगा ताकि यह तय हो सके कि जमीन बेचने में कोई घपला नहीं हुआ है। कमिश्नर ने अपने आदेश में कहा है कि अगर राजस्व स्टाफ कोई गड़बड़ी करता है तो उसके खिलाफ पूरी सख्ती से एफआईआर और निलंबन की कार्रवाई की जाए।
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इसका कड़ाई से अनुपालन कराया जा रहा है कि अगर किसी जमीन के कई खाताधारक हैं और उस संपत्ति का क्रय-विक्रय हो रहा है तो सभी खाताधारकों को इसकी लिखित सूचना जाएगी। प्रशासन को सभी खाताधारकों की लिखित सहमति के बाद ही खतौनी में नए खाताधारक का इंट्री दर्ज होगी। -रणवीर प्रसाद, कमिश्नर
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