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2000 के नोटों से मोटी हो रही कालेधन की गड्डी
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बरेली। 2000 के नोट बैंक, एटीएम और बाजार से लगातार कम हो रहे हैं। इनकी जगह पर 500 और 200 के नोटों का इस्तेमाल बढ़ा है। इससे बैंक अफसर भी हैरान है कि बैंक और एटीएम से दो हजार की जितनी करेंसी निकाली जा रही है, उसकी जमा करने का अनुपात 30 से 40 फीसदी तक कम हो गया है। बताते हैं कि कालेधन की जमाखोरी के लिए दो हजार के नोटों को बड़े पैमाने पर डंप किया जा रहा है। देश की सबसे बड़ी करेंसी होने के साथ साइज में छोटा होने से ब्लैक मनी में इस नोट को खूब खपाया जा रहा है।
पूर्व की मोदी सरकार ने नोटबंदी के बाद दो हजार के नोट चलन में लाया था। बैंक अधिकारियों की माने तो नोटबंदी के छह माह बाद यानी अप्रैल से जून 2017 तक दो हजार से नोटों जितनी संख्या में जमा हो रहे थे, उसके मुकाबले अब संख्या 30 फीसदी भी नहीं रही है। इससे एटीएम में भी दो हजार के नोटों की सप्लाई करने में बैंकों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। बताते हैं कि एक बार फिर से नोटों की जमाखोरी बड़ी पैमाने पर शुरू हो गई है। एक बैंक के अधिकारी ने बताया कि दो हजार के नोटों की किल्लत के बीच एटीएम में 70 से 80 फीसदी नोट पांच सौ के ही रखे जा रहे हैं। इसके अलावा 100 और 200 रुपये की करेंसी फीड हो पा रही है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि आरबीआई से दो हजार की जितनी गड्डी की डिमांड हो रही है, बैंकों के करेंसी चेस्ट में उसकी बमुश्किल 50 फीसदी ही सप्लाई बढ़ती जा रही है। आने वाले समय में दो हजार के नोटों का संकट और ज्यादा बढ़ने के आसार हैं।
बड़े लेनदेन में 2000 के नोटों का जमकर इस्तेमाल
नोटबंदी के बाद सरकार ने कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा दिया था। लोगों का रुझान बढ़ा लेकिन बाद में फिर से पुराना ढर्रा वापस लौट गया। दुकानदारों के यहां पॉज मशीनें एक कोने में पड़ी हैं। ऑनलाइन पेमेंट का ग्राफ भी नहीं बढ़ रहा है। बताते हैं कि ज्यादातर व्यापारी बड़े लेनदेन दो हजार के नोटों से ही कर रहे हैं। ऑनलाइन भुगतान न होने से इस पर आयकर की निगाह भी नहीं पड़ पा रही है। बताते हैं कि पेमेंट के तौर पर आने वाले दो हजार के 70 से 80 फीसदी नोट तिजोरियों में पहुंच रहे हैं।
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चुनाव के लिए भी खूब डंप हुए बड़े नोट
चुनाव खर्च को छिपाने के लिए भी लंबे वक्त से दो हजार के नोटों को डंप किया गया। इससे भी बाजार और बैंकों में इस करेंसी का सर्कुलेशन अचानक कम होने जाने की बात कही जा रही है।
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पूर्व की मोदी सरकार ने नोटबंदी के बाद दो हजार के नोट चलन में लाया था। बैंक अधिकारियों की माने तो नोटबंदी के छह माह बाद यानी अप्रैल से जून 2017 तक दो हजार से नोटों जितनी संख्या में जमा हो रहे थे, उसके मुकाबले अब संख्या 30 फीसदी भी नहीं रही है। इससे एटीएम में भी दो हजार के नोटों की सप्लाई करने में बैंकों को दिक्कत झेलनी पड़ रही है। बताते हैं कि एक बार फिर से नोटों की जमाखोरी बड़ी पैमाने पर शुरू हो गई है। एक बैंक के अधिकारी ने बताया कि दो हजार के नोटों की किल्लत के बीच एटीएम में 70 से 80 फीसदी नोट पांच सौ के ही रखे जा रहे हैं। इसके अलावा 100 और 200 रुपये की करेंसी फीड हो पा रही है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि आरबीआई से दो हजार की जितनी गड्डी की डिमांड हो रही है, बैंकों के करेंसी चेस्ट में उसकी बमुश्किल 50 फीसदी ही सप्लाई बढ़ती जा रही है। आने वाले समय में दो हजार के नोटों का संकट और ज्यादा बढ़ने के आसार हैं।
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बड़े लेनदेन में 2000 के नोटों का जमकर इस्तेमाल
नोटबंदी के बाद सरकार ने कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा दिया था। लोगों का रुझान बढ़ा लेकिन बाद में फिर से पुराना ढर्रा वापस लौट गया। दुकानदारों के यहां पॉज मशीनें एक कोने में पड़ी हैं। ऑनलाइन पेमेंट का ग्राफ भी नहीं बढ़ रहा है। बताते हैं कि ज्यादातर व्यापारी बड़े लेनदेन दो हजार के नोटों से ही कर रहे हैं। ऑनलाइन भुगतान न होने से इस पर आयकर की निगाह भी नहीं पड़ पा रही है। बताते हैं कि पेमेंट के तौर पर आने वाले दो हजार के 70 से 80 फीसदी नोट तिजोरियों में पहुंच रहे हैं।
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चुनाव के लिए भी खूब डंप हुए बड़े नोट
चुनाव खर्च को छिपाने के लिए भी लंबे वक्त से दो हजार के नोटों को डंप किया गया। इससे भी बाजार और बैंकों में इस करेंसी का सर्कुलेशन अचानक कम होने जाने की बात कही जा रही है।