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कितनी मिट्टी खोदी और कहां खपाई सेतु निगम से हिसाब लेगा प्रशासन
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बरेली। जिला प्रशासन सेतु निगम के अधिकारियों से पुलों के निर्माण में इस्तेमाल की जा रही लाखों की मिट्टी का हिसाब लेगा। दरअसल शहर में निर्माणाधीन ओवरब्रिज और फ्लाईओवर के लिए जमीन की खुदाई से निकलने वाली मिट्टी को गुपचुप तरीके से ठिकाने लगाए जाने का खेल उजागर होने के बाद प्रशासन सजग हुआ है। गंभीर बात यह है कि न तो खनन विभाग के पास और न राजस्व विभाग के अधिकारियों के पास ऐसा कोई रिकार्ड है, जिसमें यह पता चल सके कि पुलों को बनाने के दौरान कितनी मिट्टी का खुदान हुआ है। इस मामले में एडीएम वित्त ने खनन अधिकारी को जांच का आदेश दिया है।
ओवरब्रिज या फ्लाईओवर के निर्माण के लिए पिलर का फाउंडेशन बनाने को 20 से 25 मीटर गहराई तक पाइलिंग मशीन से खुदाई कराई जाती है। इस प्रक्रिया में प्रत्येक पिलर के लिए की जाने वाली खुदाई से भारी मात्रा में पहले मिट्टी और फिर रेत निकलता है। नियम यह है कि इस मिट्टी और रेत का प्रशासन के माध्यम से निस्तारण कराया जाना चाहिए ताकि उससे अर्जित होने वाला राजस्व सरकार के खाते में जमा हो सके लेकिन सेतु निगम के अधिकारी इसे खुद ही ठिकाने लगाकर अपनी जेबें गरम कर रहे हैं। मिट्टी और रेत को या तो गुपचुप ढंग से बेच दिया गया या फिर पुल का स्लोप बनाने में खपा दिया गया। पुल के निर्माण में लगाई गई मिट्टी का खर्च भी एस्टीमेट में समायोजित किया जा रहा था।
कायदा यह है कि पुल का स्लोप या सर्विस लेन बनाने के लिए भी ठेकेदार को मिट्टी की खरीद करनी चाहिए जबकि इंजीनियर और ठेकेदार दोनों मिलकर मिट्टी का खेल कर रहे हैं। अमर उजाला में सेतु निगम के अधिकारियों का यह गोलमाल उजागर किए जाने के बाद प्रशासन सजग हो गया है। पूरे गोरखधंधे पर जांच बैठा दी गई है। प्रशासन की ओर से जिला खनन अधिकारी को जांच अधिकारी नामित कर दिया गया है। बता दें कि शहर में लालफाटक और आईवीआरआई ओवरब्रिज का करीब तीन सालों से निर्माण चल रहा है जबकि हाल ही में सेटेलाइट और चौपुला पर फ्लाईओवर का निर्माण भी सेतु निगम के अधिकारियों ने शुरू कराया है।
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सेतु निगम के अफसरों ने चुप्पी साधी
शहर में बन रहे कई ओवरब्रिज और फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान सेतु निगम के अधिकारियों पर गोलमाल के कई आरोप लगे हैं। इससे पहले लालफाटक ओवरब्रिज की सर्विस लेन बनाने के लिए आया पैसा दबा लेने का आरोप लगा था। यहां सर्विस लेन न बनाए जाने की वजह से जब एक के बाद एक कई हादसों में नौ लोगों की जान चली गई तो सर्विस लेन न बनाए जाने पर सवाल उठा। तब इसका खुलासा हुआ कि सर्विस लेन बनाने के लिए मिली दो करोड़ रुपये से ज्यादा धनराशि तो सेतु निगम के अफसर दबाए पड़े हैं। अब यह नए मामले का खुलासा होने के बाद सेतु निगम के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है।
सेतु निगम ने पुलों के निर्माण में मिट्टी का कितना खनन किया है और उसका निस्तारण किस ढंग से किया गया है, इसकी जांच खनन अधिकारी को सौंप दी गई है। इसमें जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। - मनोज कुमार पांडेय, अपर जिलाधिकारी (वित्त)
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ओवरब्रिज या फ्लाईओवर के निर्माण के लिए पिलर का फाउंडेशन बनाने को 20 से 25 मीटर गहराई तक पाइलिंग मशीन से खुदाई कराई जाती है। इस प्रक्रिया में प्रत्येक पिलर के लिए की जाने वाली खुदाई से भारी मात्रा में पहले मिट्टी और फिर रेत निकलता है। नियम यह है कि इस मिट्टी और रेत का प्रशासन के माध्यम से निस्तारण कराया जाना चाहिए ताकि उससे अर्जित होने वाला राजस्व सरकार के खाते में जमा हो सके लेकिन सेतु निगम के अधिकारी इसे खुद ही ठिकाने लगाकर अपनी जेबें गरम कर रहे हैं। मिट्टी और रेत को या तो गुपचुप ढंग से बेच दिया गया या फिर पुल का स्लोप बनाने में खपा दिया गया। पुल के निर्माण में लगाई गई मिट्टी का खर्च भी एस्टीमेट में समायोजित किया जा रहा था।
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कायदा यह है कि पुल का स्लोप या सर्विस लेन बनाने के लिए भी ठेकेदार को मिट्टी की खरीद करनी चाहिए जबकि इंजीनियर और ठेकेदार दोनों मिलकर मिट्टी का खेल कर रहे हैं। अमर उजाला में सेतु निगम के अधिकारियों का यह गोलमाल उजागर किए जाने के बाद प्रशासन सजग हो गया है। पूरे गोरखधंधे पर जांच बैठा दी गई है। प्रशासन की ओर से जिला खनन अधिकारी को जांच अधिकारी नामित कर दिया गया है। बता दें कि शहर में लालफाटक और आईवीआरआई ओवरब्रिज का करीब तीन सालों से निर्माण चल रहा है जबकि हाल ही में सेटेलाइट और चौपुला पर फ्लाईओवर का निर्माण भी सेतु निगम के अधिकारियों ने शुरू कराया है।
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सेतु निगम के अफसरों ने चुप्पी साधी
शहर में बन रहे कई ओवरब्रिज और फ्लाईओवर के निर्माण के दौरान सेतु निगम के अधिकारियों पर गोलमाल के कई आरोप लगे हैं। इससे पहले लालफाटक ओवरब्रिज की सर्विस लेन बनाने के लिए आया पैसा दबा लेने का आरोप लगा था। यहां सर्विस लेन न बनाए जाने की वजह से जब एक के बाद एक कई हादसों में नौ लोगों की जान चली गई तो सर्विस लेन न बनाए जाने पर सवाल उठा। तब इसका खुलासा हुआ कि सर्विस लेन बनाने के लिए मिली दो करोड़ रुपये से ज्यादा धनराशि तो सेतु निगम के अफसर दबाए पड़े हैं। अब यह नए मामले का खुलासा होने के बाद सेतु निगम के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है।
सेतु निगम ने पुलों के निर्माण में मिट्टी का कितना खनन किया है और उसका निस्तारण किस ढंग से किया गया है, इसकी जांच खनन अधिकारी को सौंप दी गई है। इसमें जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। - मनोज कुमार पांडेय, अपर जिलाधिकारी (वित्त)