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अब प्रतिशत नहीं.. एक-एक नंबर की लड़ाई
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बरेली। देश के शिक्षा बोर्डों के बीच अपना रिजल्ट अच्छा रखने की होड़ ने छात्र-छात्राओं के लिए नई मुश्किल पैदा कर दी है। मूल्यांकन पद्धति को लगातार उदार बनाए जाने का नतीजा है कि परीक्षा में प्रतिशत की प्रतिस्पर्धा अब एक-एक नंबर की लड़ाई में बदल गई है। शिक्षाविदों का मानना है कि यह प्रतिस्पर्धा भविष्य में छात्र-छात्राओं पर एक मानसिक दबाव की भी वजह बन सकती है क्योंकि मूल्यांकन के नए पैटर्न ने देश के नंबर वन टॉपर और जिले के टॉपर्स के बीच अंतर एक प्रतिशत से भी कम कर दिया है। सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा में नंबर वन पर 13 टॉपर्स को भी इसी की वजह माना जा रहा है।
सीबीएसई दसवीं की परीक्षा में इस बार जिले में 500 अंकों की परीक्षा में प्रतिभागियों को 494 तक अंक मिले हैं, जो शत प्रतिशत से महज कुछ ही अंक दूर है। इसके अलावा तमाम ऐसे छात्र-छात्राएं भी हैं, जिन्होंने 97-98 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। मगर, एक-एक नंबर की प्रतिस्पर्धा के चलते वे टॉपर्स की सूची में जगह नहीं बना सके। परीक्षा में इतने अधिक अंक मिलने को लेकर शिक्षक भी अचरज में हैं क्योंकि पहले ऐसा नहीं होता था। इस एक-एक नंबर की लड़ाई में छात्र-छात्राओं में एक नई प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है। शिक्षकों का कहना है कि पहले लड़ाई प्रतिशत को लेकर होती थी, जो अब अंकों में बदल चुकी है। इसके चलते बच्चों पर एक-एक नंबर की लड़ाई के लिए कहीं न कहीं मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है। शिक्षाविद् कहते हैं कि अच्छा परीक्षा परिणाम देने के लिए अब विभिन्न बोर्ड में भी प्रतिस्पर्धा मची है ताकि उनके स्तर में गिरावट न आए। इसके चलते कॉपी जांचने में भी कुछ राहत दी गई है, जिससे रिजल्ट का प्रतिशत बढ़ गया है।
हैंडराइटिंग पर अब नहीं कटते मार्क्स
शिक्षा से जुड़े लोगों की मानें तो सीबीएसई ने अब चेकिंग का पैटर्न भी बदला है। पहले राइटिंग अच्छी न होने पर कुछ नंबर कट जाते थे लेकिन अब इससे कोई मतलब नहीं है। पहले प्रश्न को हल करने का निर्धारित तरीका होता था लेकिन अब छात्र उसे दूसरे पैटर्न से हल कर सकते हैं, बस उत्तर सही होना चाहिए। इसके चलते भी परीक्षा में प्राप्तांक बढ़ा है।
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सीबीएसई में दसवीं कक्षा के लिए दो साल से बोर्ड की परीक्षा शुरू हुई। मगर बच्चों को 98 प्रतिशत तक अंक मिलना और इसके बावजूद भी टॉप न करना हैरत की बात है। मैं तो कुछ हैरान हूं क्योंकि पहले तो इतने अंक आने की कल्पना ही नहीं होती थी।
- दीपक अग्रवाल, प्रिंसिपल बीबीएल एवं सीबीएसई कोआर्डिनेटर
इस बार देश भर में दर्जन भर से ज्यादा बच्चों को 499 अंक मिले हैं। इससे एक नया ट्रेंड पैदा हुआ है। अब प्रतिशत का नहीं नंबर का कंपटीशन हो गया है, जो हेल्दी नहीं है। पहले फुल मार्क्स नहीं मिलते थे क्योंकि कोई सबकुछ तो नहीं जान सकता।
- वेदप्रकाश मिश्रा, प्रिंसिपल, डीपीसी
कापी जांचने का पैटर्न बदला है और नंबर काटने की भी सीमाएं हैं। अगर बच्चे ने सही जवाब दिया है तो उसे नंबर पूरे मिलेंगे, उसकी राइटिंग गंदी होने पर भी नंबर नहीं काटे जा सकते। इससे बच्चों में ज्यादा नंबर लाने की एक नई प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
- आरके शर्मा, डायरेक्टर, एसआर इंटरनेशनल
बच्चों की पढ़ाई में अब अंतर आया है। उनमें प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और इसके साथ ही चीजों को मैनेज करने की क्षमता भी। इसके चलते ही परीक्षा परिणाम बढ़ा है। हो सकता है कि एक-एक नंबर की लड़ाई को लेकर बच्चों में दबाव हो लेकिन यह अच्छी प्रतिस्पर्धा है।
- भावना रुस्तगी, प्रिंसिपल, चिक्कर इंटरनेशनल स्कूल
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सीबीएसई दसवीं की परीक्षा में इस बार जिले में 500 अंकों की परीक्षा में प्रतिभागियों को 494 तक अंक मिले हैं, जो शत प्रतिशत से महज कुछ ही अंक दूर है। इसके अलावा तमाम ऐसे छात्र-छात्राएं भी हैं, जिन्होंने 97-98 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। मगर, एक-एक नंबर की प्रतिस्पर्धा के चलते वे टॉपर्स की सूची में जगह नहीं बना सके। परीक्षा में इतने अधिक अंक मिलने को लेकर शिक्षक भी अचरज में हैं क्योंकि पहले ऐसा नहीं होता था। इस एक-एक नंबर की लड़ाई में छात्र-छात्राओं में एक नई प्रतिस्पर्धा पैदा कर दी है। शिक्षकों का कहना है कि पहले लड़ाई प्रतिशत को लेकर होती थी, जो अब अंकों में बदल चुकी है। इसके चलते बच्चों पर एक-एक नंबर की लड़ाई के लिए कहीं न कहीं मानसिक दबाव भी बढ़ रहा है। शिक्षाविद् कहते हैं कि अच्छा परीक्षा परिणाम देने के लिए अब विभिन्न बोर्ड में भी प्रतिस्पर्धा मची है ताकि उनके स्तर में गिरावट न आए। इसके चलते कॉपी जांचने में भी कुछ राहत दी गई है, जिससे रिजल्ट का प्रतिशत बढ़ गया है।
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हैंडराइटिंग पर अब नहीं कटते मार्क्स
शिक्षा से जुड़े लोगों की मानें तो सीबीएसई ने अब चेकिंग का पैटर्न भी बदला है। पहले राइटिंग अच्छी न होने पर कुछ नंबर कट जाते थे लेकिन अब इससे कोई मतलब नहीं है। पहले प्रश्न को हल करने का निर्धारित तरीका होता था लेकिन अब छात्र उसे दूसरे पैटर्न से हल कर सकते हैं, बस उत्तर सही होना चाहिए। इसके चलते भी परीक्षा में प्राप्तांक बढ़ा है।
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सीबीएसई में दसवीं कक्षा के लिए दो साल से बोर्ड की परीक्षा शुरू हुई। मगर बच्चों को 98 प्रतिशत तक अंक मिलना और इसके बावजूद भी टॉप न करना हैरत की बात है। मैं तो कुछ हैरान हूं क्योंकि पहले तो इतने अंक आने की कल्पना ही नहीं होती थी।
- दीपक अग्रवाल, प्रिंसिपल बीबीएल एवं सीबीएसई कोआर्डिनेटर
इस बार देश भर में दर्जन भर से ज्यादा बच्चों को 499 अंक मिले हैं। इससे एक नया ट्रेंड पैदा हुआ है। अब प्रतिशत का नहीं नंबर का कंपटीशन हो गया है, जो हेल्दी नहीं है। पहले फुल मार्क्स नहीं मिलते थे क्योंकि कोई सबकुछ तो नहीं जान सकता।
- वेदप्रकाश मिश्रा, प्रिंसिपल, डीपीसी
कापी जांचने का पैटर्न बदला है और नंबर काटने की भी सीमाएं हैं। अगर बच्चे ने सही जवाब दिया है तो उसे नंबर पूरे मिलेंगे, उसकी राइटिंग गंदी होने पर भी नंबर नहीं काटे जा सकते। इससे बच्चों में ज्यादा नंबर लाने की एक नई प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
- आरके शर्मा, डायरेक्टर, एसआर इंटरनेशनल
बच्चों की पढ़ाई में अब अंतर आया है। उनमें प्रतिस्पर्धा बढ़ी है और इसके साथ ही चीजों को मैनेज करने की क्षमता भी। इसके चलते ही परीक्षा परिणाम बढ़ा है। हो सकता है कि एक-एक नंबर की लड़ाई को लेकर बच्चों में दबाव हो लेकिन यह अच्छी प्रतिस्पर्धा है।
- भावना रुस्तगी, प्रिंसिपल, चिक्कर इंटरनेशनल स्कूल