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भैयादूज कल
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Nov 2015 06:26 PM IST
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भैयादूज पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों का टीका कर उनकी लंबी उम्र और खुशहाली भगवान से मांगती हैं।
टीका करने से पहले भगवान की पूजा की जाती है। इसके बाद रोली का टीका करके खील लगाकर मिठाई खिलाती हैं।
स्नेह के पर्व भैयादूज पर बहनें परंपरा के अनुसार घर की छत व आंगन में हल्दी से भगवान सूर्य, चांद, शेर, मोर, पेड़, लंगड़ा राजा, खिलौने आदि का चित्र बनाती हैं। फिर चावल के चौरीठा से नवग्रह बनाकर परंपरागत चीजों पहरुवा, सिलबट आदि वस्तुओं से विधि विधान से पूजन किया जाता है।
भाईदूज पर बहन-भइया गए बेर लेने कांटा न लगे... गीत गाते हुए सात बार पत्तियां तोड़कर लंगड़े राजा को चढ़ाती हैं, इसके बाद रुई की बत्ती बनाकर हल्दी में गांठ देकर भाइयों के दीर्घायु होने की कामना करती हैं। भाई भी इस मौके पर भाइयों द्वारा बहनों को उपहार स्वरूप उनकी मनपसंद वस्तुएं या नगद भेंट कर उनकी रक्षा का वचन देने की परंपरा है।
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टीका करने से पहले भगवान की पूजा की जाती है। इसके बाद रोली का टीका करके खील लगाकर मिठाई खिलाती हैं।
स्नेह के पर्व भैयादूज पर बहनें परंपरा के अनुसार घर की छत व आंगन में हल्दी से भगवान सूर्य, चांद, शेर, मोर, पेड़, लंगड़ा राजा, खिलौने आदि का चित्र बनाती हैं। फिर चावल के चौरीठा से नवग्रह बनाकर परंपरागत चीजों पहरुवा, सिलबट आदि वस्तुओं से विधि विधान से पूजन किया जाता है।
भाईदूज पर बहन-भइया गए बेर लेने कांटा न लगे... गीत गाते हुए सात बार पत्तियां तोड़कर लंगड़े राजा को चढ़ाती हैं, इसके बाद रुई की बत्ती बनाकर हल्दी में गांठ देकर भाइयों के दीर्घायु होने की कामना करती हैं। भाई भी इस मौके पर भाइयों द्वारा बहनों को उपहार स्वरूप उनकी मनपसंद वस्तुएं या नगद भेंट कर उनकी रक्षा का वचन देने की परंपरा है।
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