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हुस्नआरा व गुलाबखास संग मंडियों में जलवा बिखेर रहा यकुति
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बाराबंकी के मसौली चौराहा के निकट हाईवे के किनारे बाग में बिक रहा याकूती आम। संवाद
- फोटो : BARABANKI
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बाराबंकी। फलों के राजा आम की चर्चा हो और बाराबंकी का नाम न आए भला ऐसे कैसे हो सकता है। जिले में आम की 50 से अधिक किस्में मौजूद हैं मगर यहां का हुस्नआरा, गुलाबखास, यकुति व आम्रपाली आम की मांग देश की प्रमुख मंडियों में भी हो रही है। जहां से यह आम खाड़ी देशों तक भेजा जाने लगा है। कीमत की बात करें तो जिले में सबसे सस्ता 30 रुपये किलो दशहरी है और सबसे मंहगा हुस्नआरा है। हुस्नहारा 300 रुपये किलो तक बिक रहा है। बागवानों का कहना है कि एक बरसात के बाद आम का बहार और तेज हो जाएगी।
जिले में आम के बाग करीब साढ़े 15 हजार हेक्टेयर में हैं। इनमें सबसे अधिक रकबा मसौली, रामसनेहीघाट व सतरिख क्षेत्र में है। इस बार आंधी आने के कारण पकने से पहले कई टन आम गिर गया था लेकिन पैदावार की बात करें तो आंधी के बाद भी करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान है। मसौली क्षेत्र के बागों में यकुति व आम्रपाली, गुलाबखास व हुस्नआरा आम का उत्पादन होता है। रामसनेहीघाट में भी यही आम खूब पैदा होता है। आम्रपाली का पेड़ पांच साल बाद ही फल देने लगता है। इसलिए आम के काश्तकारों ने गत सालों में इसके हजारों पेड़ लगाए हैं। जून माह में आम की मंडियों में गर्माहट आनी शुरू हो गई है।
जिले में पैदा होने वाले हुस्नआरा, गुलाबखास व यकुति आम को दिल्ली, लखनऊ, गोंडा, बहराइच, अयोध्या व गोरखपुर मंडियों में भेजा जा रहा है। इनकी काफी मांग है। मसौली में आम के कारोबारी बड़ा गांव निवासी मोहर्रम अली कहते हैं कि गुलाबखास की कीमत 180 से 200 रुपये प्रति किलो है तो हुस्नआरा की कीमत 250 से 300 रुपये प्रति किलो है। एक दूसरे कारोबारी शाकिर अली ने बताया कि यकुति का दाम 250 रुपये किलो के आसपस है। शाकिर बताते हैं कि इस आम की मांग दुबई व सऊदी अरब में खूब है।
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डाल का दशहरी आना शुरू मगर रेट दो गुने
जिले में दशहरी आम का बाजार बड़े पैमाने पर होता है। इस समय कृत्रिम ढंग से पकाई गई दहशरी की कीमत 30 रुपये किलो के आसपास है मगर अब डाल की पकी दशहरी भी आने लगी है। जिसकी कीमत 50 रुपये किलो के आसपास है। आम कारोबारियों के अनुसार मंडियों दिन ब दिन डाल के आम की आवक बढ़ती जा रही है।
विदेशों में भी भेजा जाता जिले का आम
जिले में आम की 50 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां का हुस्नआरा, गुलाबखास व यकुति आम की मांग काफी है। यह किस्में प्रमुख मंडियों से विदेशों तक भेजी जा रही हैं। इस वर्ष भी करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान है। -महेश श्रीवास्तव, जिला उद्यान अधिकारी
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जिले में आम के बाग करीब साढ़े 15 हजार हेक्टेयर में हैं। इनमें सबसे अधिक रकबा मसौली, रामसनेहीघाट व सतरिख क्षेत्र में है। इस बार आंधी आने के कारण पकने से पहले कई टन आम गिर गया था लेकिन पैदावार की बात करें तो आंधी के बाद भी करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान है। मसौली क्षेत्र के बागों में यकुति व आम्रपाली, गुलाबखास व हुस्नआरा आम का उत्पादन होता है। रामसनेहीघाट में भी यही आम खूब पैदा होता है। आम्रपाली का पेड़ पांच साल बाद ही फल देने लगता है। इसलिए आम के काश्तकारों ने गत सालों में इसके हजारों पेड़ लगाए हैं। जून माह में आम की मंडियों में गर्माहट आनी शुरू हो गई है।
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जिले में पैदा होने वाले हुस्नआरा, गुलाबखास व यकुति आम को दिल्ली, लखनऊ, गोंडा, बहराइच, अयोध्या व गोरखपुर मंडियों में भेजा जा रहा है। इनकी काफी मांग है। मसौली में आम के कारोबारी बड़ा गांव निवासी मोहर्रम अली कहते हैं कि गुलाबखास की कीमत 180 से 200 रुपये प्रति किलो है तो हुस्नआरा की कीमत 250 से 300 रुपये प्रति किलो है। एक दूसरे कारोबारी शाकिर अली ने बताया कि यकुति का दाम 250 रुपये किलो के आसपस है। शाकिर बताते हैं कि इस आम की मांग दुबई व सऊदी अरब में खूब है।
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डाल का दशहरी आना शुरू मगर रेट दो गुने
जिले में दशहरी आम का बाजार बड़े पैमाने पर होता है। इस समय कृत्रिम ढंग से पकाई गई दहशरी की कीमत 30 रुपये किलो के आसपास है मगर अब डाल की पकी दशहरी भी आने लगी है। जिसकी कीमत 50 रुपये किलो के आसपास है। आम कारोबारियों के अनुसार मंडियों दिन ब दिन डाल के आम की आवक बढ़ती जा रही है।
विदेशों में भी भेजा जाता जिले का आम
जिले में आम की 50 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां का हुस्नआरा, गुलाबखास व यकुति आम की मांग काफी है। यह किस्में प्रमुख मंडियों से विदेशों तक भेजी जा रही हैं। इस वर्ष भी करीब डेढ़ लाख मीट्रिक टन आम के उत्पादन का अनुमान है। -महेश श्रीवास्तव, जिला उद्यान अधिकारी