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महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2015 11:16 PM IST
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हरितालिका तीज के अवसर पर बुधवार को लोधेश्वर महादेवा में भगवान भोलेनाथ के दर्शन व पूजन अर्चन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं के हर-हर महादेव व बम-बम के जयकारों से वातावरण शिवमय हो गया। जलाभिषेक के लिए भोर से ही लंबी कतारें लगी रहीं।
भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा कर महिलाएं पति की दीर्घायु व युवतियां उन्हें प्रसन्न कर अभीष्ट वर की कामना करती हैं। सुहाग की रक्षा के लिए महिलाएं हरितालिका तीज का कठिन व्रत रखती हैं। जिसमें मध्यरात्रि से ही अन्न-जल ग्रहण नहीं किया जाता और पूरा दिन निर्जला व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा कर पति के दीर्घायु की कामना की जाती है।
वहीं कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। बुधवार को शहर के कैलाश आश्रम, नागेश्वरनाथ, लखपेड़ाबाग आदि शिवमंदिरों में पूजा पाठ के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। रामनगर स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर मेें हरितालिका तीज के अवसर पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर में मंगलवार की से ही विभिन्न वाहनों से भक्तों का आना शुरू हो गया था। मध्यरात्रि के बाद कपाट खुलते ही हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयकारों के बीच भगवान शिव की पूजा अर्चना हुई। दूर दराज से आए कांवरियों ने फल, फूल, बिल्वपत्र चढ़ाकर जलाभिषेक किया। कांवरिए एक दिन पूर्व से ही महादेवा में डेरा जमाए थे।
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भगौली तीर्थ में उमड़े भक्त
फतेहपुर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के भगौलीतीर्थ गांव में स्थित शिव के प्राचीन मंदिर पर कजरी तीज का मेला लगता है। पंद्रह दिनों तक चलने वाले मेले में दूर दराज से श्रद्धालु आते हैं और जलाभिषेक कर अभीष्ट करते हैं। बुधवार को शुरू हुए मेले में भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए काफी भीड़ रही। मेले में डॉ. अंजू चंद्रा द्वारा चिकित्सा जांच शिविर लगाया गया।
पांडवों ने की थी शिवलिंग की स्थापना
भगौली तीर्थ स्थित प्राचीन शिवमंदिर के बारे में जनश्रुति है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों के उदर में पीड़ा हुई। इस कष्ट से छुटकारा पाने के लिए पांडवों ने कई वर्ष नैमिष चक्र के पास निवास किया, लेकिन छुटकारा नहीं मिला। इस पर पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण से उदर पीड़ा से कष्ट निवारण का उपाय पूछा तो उन्होंने बताया कि वट वृक्ष के नीचे शिवलिंग की स्थापना करें और जलाभिषेक करें। युधिष्ठिर ने वैसा ही किया और भगौली तीर्थ गांव पहुंच करके शिवलिंग की स्थापना वट वृक्ष के नीचे कर विधिवत पूजा अर्चना की। इसके बाद पांडवों के उदर की पीड़ा शांत हुई। तभी से इस शिवमंदिर का नाम प्रसन्ननाथ भोले शिवमंदिर है।
बुढवा बाबा शिव मंदिर पर लगा मेला
रामसनेहीघाट प्रतिनिधि के अनुसार भिटरिया दरियाबाद मार्ग पर स्थित कल्याणी नदी के तट पर ऊंचे टीले पर स्थित बुढवा बाबा शिव मंदिर पर मंगलवार को दूर दराज से आकर शिवभक्तों ने यहां डेरा जमा लिया था। बुधवार की भोर पहर से ही भक्तों ने कल्याणी नदी में स्नान कर शिवलिंग पर जल, फल, फूल, बिल्वपत्र आदि चढ़ाकर पूजा अर्चना की। इसके अलावा लालेश्वर, सुमेरगंज, मालिनपुर आदि स्थानों पर शिवमंदिरों में भक्तों ने पूजा अर्चना कर मंगल कामना की।
उधर हैदरगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार गोमती नदी तट पर स्थित प्राचीन औसानेशा्वर महादेव मंदिर पर मध्यरात्रि से ही शिवभक्तों का तांता लगा रहा। भोर में नदी में स्नान कर श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। कस्बा स्थित रामेश्वर शिवाला, लालपुर गांव में किल्लेश्वर महादेव मंदिर में कजरी तीज पर भक्तों ने पूजा अर्चना की। त्रिवेदीगंज के शिवनाम गांव में स्थित योगिनी शिवमंदिर तथा सिद्धौर में सिद्धेश्वर मंदिर में पूजा पाठ के लिए भक्तों की शाम तक भीड़ जुटी रही।
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भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा कर महिलाएं पति की दीर्घायु व युवतियां उन्हें प्रसन्न कर अभीष्ट वर की कामना करती हैं। सुहाग की रक्षा के लिए महिलाएं हरितालिका तीज का कठिन व्रत रखती हैं। जिसमें मध्यरात्रि से ही अन्न-जल ग्रहण नहीं किया जाता और पूरा दिन निर्जला व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा कर पति के दीर्घायु की कामना की जाती है।
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वहीं कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। बुधवार को शहर के कैलाश आश्रम, नागेश्वरनाथ, लखपेड़ाबाग आदि शिवमंदिरों में पूजा पाठ के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। रामनगर स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर मेें हरितालिका तीज के अवसर पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर में मंगलवार की से ही विभिन्न वाहनों से भक्तों का आना शुरू हो गया था। मध्यरात्रि के बाद कपाट खुलते ही हर-हर महादेव, बम-बम भोले के जयकारों के बीच भगवान शिव की पूजा अर्चना हुई। दूर दराज से आए कांवरियों ने फल, फूल, बिल्वपत्र चढ़ाकर जलाभिषेक किया। कांवरिए एक दिन पूर्व से ही महादेवा में डेरा जमाए थे।
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भगौली तीर्थ में उमड़े भक्त
फतेहपुर प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के भगौलीतीर्थ गांव में स्थित शिव के प्राचीन मंदिर पर कजरी तीज का मेला लगता है। पंद्रह दिनों तक चलने वाले मेले में दूर दराज से श्रद्धालु आते हैं और जलाभिषेक कर अभीष्ट करते हैं। बुधवार को शुरू हुए मेले में भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए काफी भीड़ रही। मेले में डॉ. अंजू चंद्रा द्वारा चिकित्सा जांच शिविर लगाया गया।
पांडवों ने की थी शिवलिंग की स्थापना
भगौली तीर्थ स्थित प्राचीन शिवमंदिर के बारे में जनश्रुति है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों के उदर में पीड़ा हुई। इस कष्ट से छुटकारा पाने के लिए पांडवों ने कई वर्ष नैमिष चक्र के पास निवास किया, लेकिन छुटकारा नहीं मिला। इस पर पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण से उदर पीड़ा से कष्ट निवारण का उपाय पूछा तो उन्होंने बताया कि वट वृक्ष के नीचे शिवलिंग की स्थापना करें और जलाभिषेक करें। युधिष्ठिर ने वैसा ही किया और भगौली तीर्थ गांव पहुंच करके शिवलिंग की स्थापना वट वृक्ष के नीचे कर विधिवत पूजा अर्चना की। इसके बाद पांडवों के उदर की पीड़ा शांत हुई। तभी से इस शिवमंदिर का नाम प्रसन्ननाथ भोले शिवमंदिर है।
बुढवा बाबा शिव मंदिर पर लगा मेला
रामसनेहीघाट प्रतिनिधि के अनुसार भिटरिया दरियाबाद मार्ग पर स्थित कल्याणी नदी के तट पर ऊंचे टीले पर स्थित बुढवा बाबा शिव मंदिर पर मंगलवार को दूर दराज से आकर शिवभक्तों ने यहां डेरा जमा लिया था। बुधवार की भोर पहर से ही भक्तों ने कल्याणी नदी में स्नान कर शिवलिंग पर जल, फल, फूल, बिल्वपत्र आदि चढ़ाकर पूजा अर्चना की। इसके अलावा लालेश्वर, सुमेरगंज, मालिनपुर आदि स्थानों पर शिवमंदिरों में भक्तों ने पूजा अर्चना कर मंगल कामना की।
उधर हैदरगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार गोमती नदी तट पर स्थित प्राचीन औसानेशा्वर महादेव मंदिर पर मध्यरात्रि से ही शिवभक्तों का तांता लगा रहा। भोर में नदी में स्नान कर श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। कस्बा स्थित रामेश्वर शिवाला, लालपुर गांव में किल्लेश्वर महादेव मंदिर में कजरी तीज पर भक्तों ने पूजा अर्चना की। त्रिवेदीगंज के शिवनाम गांव में स्थित योगिनी शिवमंदिर तथा सिद्धौर में सिद्धेश्वर मंदिर में पूजा पाठ के लिए भक्तों की शाम तक भीड़ जुटी रही।