{"_id":"60ff0a7b8ebc3e586f19a96a","slug":"vaternary-barabanki-news-lko5886268172","type":"story","status":"publish","title_hn":"आठ वर्ष में कम हो गई गोवंश की संख्या, पशुगणना में खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आठ वर्ष में कम हो गई गोवंश की संख्या, पशुगणना में खुलासा
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बाराबंकी। गौवंश के संवर्धन व विस्तार से जुड़ी योजना के बावजूद जिले में आठ वर्षों में गौवंश की संख्या में खासी कमी आयी है। यह चौकाने वाला आंकड़ा भारत सरकार द्वारा कराई गई पशु गणना में सामने आया है। वर्ष 2012 में हुई 19वीं पशु गणना के बाद वर्तमान समय में गोवंशों की संख्या में जहां गिरावट दर्ज हुई वहीं भैंसों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। इसके अलावा भेंड, बकरी और सूकर की संख्या में भी गिरावट आई है। पशुुपालन विभाग ने आंकड़ों को भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड कराया है।
वैसे तो हर पांच साल पर पशुओं की गणना कराई जाती है लेकिन इस बार गणना आने में काफी समय लगा। अंतिम बार 2012 में हुई 19वीं पशुगणना में जिले के अंदर 3 लाख 37 हजार 326 गोवंश थे। आठ साल बाद कराई गई 20वीं पशुगणना के बाद जिले में गौवंश की संख्या में 12 हजार 564 की कमी आई है। 2012 में हुई पशुगणना में जहां 10 लाख 87 हजार 217 पशु थे। वहीं अब घट कर 10 लाख 68 हजार 844 पशु रह गए हैं। इनमें गाय, भैंस, भेंड, बकरी और सूकर शामिल हैं।
दुधारू पशुओं की आबादी छह फीसदी बढ़ी
देश में हर पांच साल पर पशु गणना होती रही है लेकिन इस बार गणना आने में काफी समय लगा। पिछली बार यह गणना वर्ष 2012 में की गई थी। केंद्रीय मत्स्यपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक गायों की संख्या 14.51 करोड़ है, जबकि गोधन (गाय-बैल) की आबादी 0.8 फीसदी बढ़कर करीब 18.25 करोड़ हो गई है।
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देश में भैंस की आबादी पिछली पशुगणना के मुकाबले करीब एक फीसदी बढ़कर 10.98 करोड़ हो गई है। दुधारू पशुओं (गाय और भैंस) की आबादी छह फीसदी बढ़कर 12.53 करोड़ हो गई है। देश में पोल्ट्री यानी कुक्कुटों (मुर्गा-मुर्गी) की आबादी 16.8 फीसदी से बढ़कर 85.18 करोड़ हो गई है।
जिले में पशुवार संख्या
गाय भैंस भेड़ बकरी सूकर कुल संख्या
19वीं पशुगणना (2012)-- 337326--445540-- 2023-- 286668--15660--1087217
20वीं पशुगणना (2020)-- 324762--508830-- 400-- 229206-- 5646-- 1068844
कमी/बढ़ोत्तरी-- 12564 -- 63260-- 1623-- 57462-- 10014--18373
20वीं पशुगणना में करीब साढ़े 12 हजार गोवंश में कमी आई है। यह गणना हर पांच साल पर कराई जाती है। इस बार थोड़ी देरी हुई है।
डॉ. मार्कंडेय, सीवीओ
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वैसे तो हर पांच साल पर पशुओं की गणना कराई जाती है लेकिन इस बार गणना आने में काफी समय लगा। अंतिम बार 2012 में हुई 19वीं पशुगणना में जिले के अंदर 3 लाख 37 हजार 326 गोवंश थे। आठ साल बाद कराई गई 20वीं पशुगणना के बाद जिले में गौवंश की संख्या में 12 हजार 564 की कमी आई है। 2012 में हुई पशुगणना में जहां 10 लाख 87 हजार 217 पशु थे। वहीं अब घट कर 10 लाख 68 हजार 844 पशु रह गए हैं। इनमें गाय, भैंस, भेंड, बकरी और सूकर शामिल हैं।
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दुधारू पशुओं की आबादी छह फीसदी बढ़ी
देश में हर पांच साल पर पशु गणना होती रही है लेकिन इस बार गणना आने में काफी समय लगा। पिछली बार यह गणना वर्ष 2012 में की गई थी। केंद्रीय मत्स्यपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक गायों की संख्या 14.51 करोड़ है, जबकि गोधन (गाय-बैल) की आबादी 0.8 फीसदी बढ़कर करीब 18.25 करोड़ हो गई है।
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देश में भैंस की आबादी पिछली पशुगणना के मुकाबले करीब एक फीसदी बढ़कर 10.98 करोड़ हो गई है। दुधारू पशुओं (गाय और भैंस) की आबादी छह फीसदी बढ़कर 12.53 करोड़ हो गई है। देश में पोल्ट्री यानी कुक्कुटों (मुर्गा-मुर्गी) की आबादी 16.8 फीसदी से बढ़कर 85.18 करोड़ हो गई है।
जिले में पशुवार संख्या
गाय भैंस भेड़ बकरी सूकर कुल संख्या
19वीं पशुगणना (2012)-- 337326--445540-- 2023-- 286668--15660--1087217
20वीं पशुगणना (2020)-- 324762--508830-- 400-- 229206-- 5646-- 1068844
कमी/बढ़ोत्तरी-- 12564 -- 63260-- 1623-- 57462-- 10014--18373
20वीं पशुगणना में करीब साढ़े 12 हजार गोवंश में कमी आई है। यह गणना हर पांच साल पर कराई जाती है। इस बार थोड़ी देरी हुई है।
डॉ. मार्कंडेय, सीवीओ