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तीन आशियाने जले, गृहस्थी का सामान राख
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जहांगीराबाद (बाराबंकी)। थाना जहांगीराबाद क्षेत्र के कबीरपुर गांव में छप्परनुमा घर में अचानक आग लग गई। ग्रामीण आग पर काबू पाने का प्रयास करते रहे किंतु काबू न पा सके। फायर ब्रिगेड के नंबर नहीं लग सका। घटना में गृहस्थी के साथ ही नकदी जेवरात आदि भी जल गए। वहीं एक मवेशी झुलस गया।
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के कबीरपुर निवासी अरविंद के छप्परनुमा घर में मंगलवार शाम अचानक आग लग गई। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि पड़ोस में छप्पर रखकर रह रहे भाई अमित व अशोक के घर को आग अपनी आगोश में ले लिया। देखते ही देखते पास में स्थित राम लखन का छप्पर भी जलने लगा।
हादसे में गृहस्थी का सामान समेत गहने व करीब पांच हजार की नकदी भी जलकर राख हो गई। छप्पर के नीचे बंधी भैंस गंभीर रूप से झुलस गई। अरविंद ने बताया कि आग से झुलसने के बाद भैंस की हालत काफी नाजुक है। अरविंद ने बताया कि ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर किसी तरह परिवार पलता था। आग से सब कुछ राख हो गया। पानी को पीड़ित परिवार के लोग फायर ब्रिगेड को लगातार फोन लगाते रहे।
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किंतु फोन नहीं लगा। तो ग्रामीणों ने पंपिंग सेट का सहारा लेते हुए आग पर काबू पाने का प्रयास किया। अरविंद ने बताया कि आग से सब कुछ जलकर राख हो गया। खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हूं। अनाज भी नहीं है। गांव के कुछ लोग मदद किए हैं। किंतु अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं मिल सकी है। न ही कोई मौके पर देखने आया।
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जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के कबीरपुर निवासी अरविंद के छप्परनुमा घर में मंगलवार शाम अचानक आग लग गई। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि पड़ोस में छप्पर रखकर रह रहे भाई अमित व अशोक के घर को आग अपनी आगोश में ले लिया। देखते ही देखते पास में स्थित राम लखन का छप्पर भी जलने लगा।
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हादसे में गृहस्थी का सामान समेत गहने व करीब पांच हजार की नकदी भी जलकर राख हो गई। छप्पर के नीचे बंधी भैंस गंभीर रूप से झुलस गई। अरविंद ने बताया कि आग से झुलसने के बाद भैंस की हालत काफी नाजुक है। अरविंद ने बताया कि ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर किसी तरह परिवार पलता था। आग से सब कुछ राख हो गया। पानी को पीड़ित परिवार के लोग फायर ब्रिगेड को लगातार फोन लगाते रहे।
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किंतु फोन नहीं लगा। तो ग्रामीणों ने पंपिंग सेट का सहारा लेते हुए आग पर काबू पाने का प्रयास किया। अरविंद ने बताया कि आग से सब कुछ जलकर राख हो गया। खुले आसमान के नीचे रहने को विवश हूं। अनाज भी नहीं है। गांव के कुछ लोग मदद किए हैं। किंतु अभी तक कोई सरकारी मदद नहीं मिल सकी है। न ही कोई मौके पर देखने आया।