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Barabanki News: ‘शहादत जिनकी आरजू थी जो न झुका, न डरा...’
Fri, 06 Mar 2026 02:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 06 Mar 2026 02:00 AM IST
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जैदपुर स्थित वक्फ इमामबाड़ा मोहल्ला गढ़ी जदीद में ईरान के सुप्रीम लीडर की याद में कैंडल जलाकर
जैदपुर। ईरान के सर्वोच्च धर्मगुरु अयातुल्ला सैयद अली हुसैनी खामनेई की याद में मंगलवार एक शोक सभा वक्फ इमामबाड़ा मोहल्ला गढ़ी जदीद में हुई। अमेरिका और इस्राइल संयुक्त सैन्य कार्रवाई में मारे गए खामनेई को श्रद्धांजलि दी गई। उन्हें शहीद बताया गया। मजलिस की शुरुआत ‘शहादत जिनकी आरज़ू थी जो न झुका, न डरा, और न पीछे हटा’ पंक्तियों से हुई।
मौलाना फैज अब्बास मशहदी ने कहा कि ज़माना हमेशा यजीद के खिलाफ लड़ाई में अपने उसूल के लिए शहीद होने को याद रखेगा। उन्होंने हजरत खामनेई को कर्बला के सबक पर खरा उतरने वाला बताया। ईरानी हमले के विरोध में मौलाना सैयद रजा मूसवी, मौलाना सैयद जहीन रिज़वी, मौलाना अबू तालिब, मौलाना सैयद बिजाअत हुसैन रिज़वी, मौलाना सैयद अतामेहंदी ज़ैदपुरी, मौलाना सैयद आलिम मेंहदी और मास्टर मो. आसिफ ने अपने विचार रखे। मक्की मियां और सईद ने कलाम पेश कर खिराजे अकीदत दी।
धर्मगुरुओं ने कहा कि अयातुल्ला किसी एक समुदाय के प्रिय नहीं थे। वे मजलूम और कमजोर सताए हुए लोगों की आवाज़ को हमेशा बुलंद करते थे। उनकी विचारधारा हर शख्स के दिल और दिमाग में एक प्रेरणा बनकर जिंदा रहेगी।
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जलसे में रियाज अहमद, अबू उमैर अंसारी, फैजान अंसारी, जौहर रज़ा, हारून राईन, रजा रिजवी, मो. सालिम, जावेद रिजवी, सगीर अंसारी, शैजी रिजवी, मो. कौसर, समीर रिज़वी, अबान रिजवी और जैदी आर्ट जैसे प्रमुख लोग मौजूद थे। लोगों ने खामनेई जिंदाबाद के नारे भी लगाए।
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मौलाना फैज अब्बास मशहदी ने कहा कि ज़माना हमेशा यजीद के खिलाफ लड़ाई में अपने उसूल के लिए शहीद होने को याद रखेगा। उन्होंने हजरत खामनेई को कर्बला के सबक पर खरा उतरने वाला बताया। ईरानी हमले के विरोध में मौलाना सैयद रजा मूसवी, मौलाना सैयद जहीन रिज़वी, मौलाना अबू तालिब, मौलाना सैयद बिजाअत हुसैन रिज़वी, मौलाना सैयद अतामेहंदी ज़ैदपुरी, मौलाना सैयद आलिम मेंहदी और मास्टर मो. आसिफ ने अपने विचार रखे। मक्की मियां और सईद ने कलाम पेश कर खिराजे अकीदत दी।
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धर्मगुरुओं ने कहा कि अयातुल्ला किसी एक समुदाय के प्रिय नहीं थे। वे मजलूम और कमजोर सताए हुए लोगों की आवाज़ को हमेशा बुलंद करते थे। उनकी विचारधारा हर शख्स के दिल और दिमाग में एक प्रेरणा बनकर जिंदा रहेगी।
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जलसे में रियाज अहमद, अबू उमैर अंसारी, फैजान अंसारी, जौहर रज़ा, हारून राईन, रजा रिजवी, मो. सालिम, जावेद रिजवी, सगीर अंसारी, शैजी रिजवी, मो. कौसर, समीर रिज़वी, अबान रिजवी और जैदी आर्ट जैसे प्रमुख लोग मौजूद थे। लोगों ने खामनेई जिंदाबाद के नारे भी लगाए।