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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   this is railway station or garbage house

रेलवे स्टेशन या फिर कूड़ा घर

Thu, 11 Jun 2015 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी Updated Thu, 11 Jun 2015 11:36 PM IST
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बाराबंकी। यात्रियों की सुविधा के लिए रेल मंत्रालय ने रेल यात्री पखवाड़ा मनाया। लेकिन यह पखवाड़ा भी यात्रियों की तमाम परेशानी को दूर नहीं कर सका। स्टेेशन पर खुले में पड़ी सीटों पर किसी यात्री की बैठने की हिम्मत तक नहीं होती है। शौचालय में ताले पड़े, तो सीढ़ी के पास कूड़े का ढेर जमा रहता है। प्लेटफार्म एक पर तो पंखे ही नहीं चल रहे। सीटों के अभाव में यात्री प्लेटफार्म की फर्श पर ही अपना डेरा जमा ट्रेन के आने का इंतजार करते हैं।

यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने रेल यात्री पखवाड़ा मनाया, लेकिन इसमें भी यात्रियों को कोई राहत नहीं मिली। स्टेशन पर साफ सफाई का अभाव तो है ही सुविधाएं न के बराबर रहीं। गर्मी में भी स्टेशन पर पंखे नहीं चलने से यात्री गुरुवार को भी हलकान रहे। दरियाबाद निवासी सुनील कुमार किसी काम से बाराबंकी शहर आए हुए थे। यात्री सुविधाओं के सवाल पर बंद पंखों की ओर इशारा करते हुए कहा कि देेख लीजिए भीषण गर्मी में भी पंखे बंद है। अन्य सुविधाओं का आंकलन आप स्वयं कर लीजिए। जीआरपी के पास बैठे पटरंगा क्षेत्र के निवासी राम प्रकाश कहते हैं कि बस के सापेक्ष ट्रेनों का किराया सस्ता है। जिसके चलते आम आदमी इनमें सफर करने को मजबूर है। वरना स्टेशन पर बैठने तक की सुविधाओं का अभाव है। जहां सीटें हैं भी तो उसके ऊपर टिन शेड नहीं है। जिससे वहां बैठ पाना किसी के बस की बात नहीं है। देवा क्षेत्र के निवासी जनार्दन सिंह कहते हैं रेलवे यात्री सुविधाएं देने की बात करती है। लेकिन ट्रेनों का संचालन ही सही नहीं है। ठंडक में कोहरे का बहाना रहता है तो गर्मी में भी ट्रेनें लेट रहती है। अब बनारस जाने वाली किसान एक्सप्रेस को लीजिए उसे मल्लौर में खड़ा कर दिया गया है। जबकि डबल रूट है। शौचलायों में ताले लटके हैं। जबकि बाहर बने डिलक्स शौचालय में दो गुना पैसा लिया जाता है। दरियाबाद किसी काम से जा रहे देवा कस्बा के मुन्ना कहते हैं प्लेटफार्म पर आवारा मवेशी घूमा करते हैं। जिनसे यात्रियों का काफी दिक्कतें रहती हैं। जब विभाग यह समस्या दूर नहीं कर पा रहा है तो बुकिंग, आरक्षण खिड़कियों पर आने वाली असुविधाओं का समाधान दूर की बात है।

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