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Barabanki News: मिसाल बनी ताजिया में हिस्सा देने की परंपरा

Fri, 04 Jul 2025 01:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Fri, 04 Jul 2025 01:09 AM IST
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The tradition of participating in Tazia became an example
कोटवाधाम (बाराबंकी)। सतनामी संप्रदाय के प्रवर्तक बाबा समर्थ साहेब जगजीवन दास (बड़े बाबा) द्वारा करीब तीन सौ वर्ष पहले शुरू की गई ताजिया में हिस्सा देने की अनूठी परंपरा मिसाल बनी है। कोटवाधाम मंदिर के बाहर स्थित बड़ी चौक पर रखे जाने वाला ताजिया हिंदू- मुस्लिम एकता का संदेश देता है।
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बाबा समर्थ साहेब के कोटवाधाम में रहने के दौरान मुहर्रम का त्योहार पड़ने पर यहां के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ताजिया बनाने में सहयोग का आग्रह किया था। तब बाबा ने मुगलकाल का एक सिक्का देकर ताजिया में सहयोग किया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। बड़ी गद्दी व छोटी गद्दी के सभी महंत इसमें सहयोग करते है। इसके अलावा मंदिर के चौमाल से भी हिस्सा दिया जाता है। समर्थ साहेब जगजीवन दास ने चौदह गद्दी बनाई थी। जिसमें मुस्लिम समुदाय को भी शिष्य बनाया था।
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कोटवाधाम बड़ी चौक पर रखा जाने वाला ताजिया बाबा का ताजिया के नाम से पुकारा जाता है। चौक से इसके उठाए जाने के बाद ही बाकी ताजिये उठाये जाने की परंपरा है। ताजिया को रखने की जिम्मेदारी मुस्लिम समाज निभाता है। छोटी गद्दी के महंत विशाल दास ने बताया कि मंदिर की ओर से ताजिया बनाने में पूरा सहयोग किया जाता है।
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दोहावली में भी मिलता है एकता का जिक्र
बाबा जगजीवन दास पर कीर्ति सिंधु बंदगी शब्द सुमन, वंदना के साथ एक हजार दोहा वाली पुस्तक दोहावली को लिखने वाले स्थानीय कवि प्रेम दास ने भी लिखा है की- हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, संगम है जगजीवन साई। (संवाद)
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