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Barabanki News: दो किमी दूर हुआ विद्यालय बच्चों की पढ़ाई पर संकट
Sun, 27 Jul 2025 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 27 Jul 2025 12:55 AM IST
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विलय के बाद बंद पड़ा अमेठी ब्लॉक का प्राथमिक विद्यालय कुंडवा।
अमेठी। परिषदीय विद्यालयों के एकीकरण की नीति ने ग्रामीण बच्चों की शिक्षा को कठिन दौर में पहुंचा दिया है। अमेठी ब्लॉक के कुंडवा और पूरे पांडेय प्राथमिक विद्यालयों का विलय डेहरामर विद्यालय में कर दिया गया है, जिससे बच्चों को रोज दो किमी की जोखिमभरी यात्रा करनी पड़ रही है।
शनिवार को 36 नामांकित बच्चों में से केवल छह विद्यालय पहुंचे, बाकी घर पर ही रह गए। मार्ग में घने बाग और कुत्तों से बच्चे भयभीत हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें धानापुर-लोहियानगर मुख्य मार्ग पार करना होता है, जहां तेज रफ्तार वाहनों से हादसे का खतरा बना रहता है। नदी के पास से होकर गुजरना भी बच्चों में असुरक्षा की भावना बढ़ा रहा है।
कक्षा तीन की छात्रा अंशिका ने बताया कि पहले स्कूल नजदीक था, अब डर के कारण स्कूल नहीं जा पाती। छात्रा मीना ने बताया कि विद्यालय दूर होने से माता-पिता स्कूल नहीं भेजते। ऐसे में पढ़ाई रुक गई है। अभिभावक राम स्वरूप ने चिंता जताई कि जंगल के रास्ते में कुत्तों का झुंड बच्चों पर झपटता है, जिससे उनका स्कूल जाना असुरक्षित हो गया है। विवेक चौहान ने बताया कि बच्चों को सड़क पार करने में दिक्कत होती है। किसी न किसी को उनके साथ रहना होता है।
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इस कारण कई अभिभावकों ने अपने बच्चों का नामांकन निजी विद्यालयों में करवा दिया है, जबकि कुछ बच्चों की पढ़ाई ही छूट गई है। इस संबंध में बीईओ पूजा चौहान ने बताया कि प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों से संवाद स्थापित करें और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें विद्यालय तक लाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
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शनिवार को 36 नामांकित बच्चों में से केवल छह विद्यालय पहुंचे, बाकी घर पर ही रह गए। मार्ग में घने बाग और कुत्तों से बच्चे भयभीत हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें धानापुर-लोहियानगर मुख्य मार्ग पार करना होता है, जहां तेज रफ्तार वाहनों से हादसे का खतरा बना रहता है। नदी के पास से होकर गुजरना भी बच्चों में असुरक्षा की भावना बढ़ा रहा है।
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कक्षा तीन की छात्रा अंशिका ने बताया कि पहले स्कूल नजदीक था, अब डर के कारण स्कूल नहीं जा पाती। छात्रा मीना ने बताया कि विद्यालय दूर होने से माता-पिता स्कूल नहीं भेजते। ऐसे में पढ़ाई रुक गई है। अभिभावक राम स्वरूप ने चिंता जताई कि जंगल के रास्ते में कुत्तों का झुंड बच्चों पर झपटता है, जिससे उनका स्कूल जाना असुरक्षित हो गया है। विवेक चौहान ने बताया कि बच्चों को सड़क पार करने में दिक्कत होती है। किसी न किसी को उनके साथ रहना होता है।
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इस कारण कई अभिभावकों ने अपने बच्चों का नामांकन निजी विद्यालयों में करवा दिया है, जबकि कुछ बच्चों की पढ़ाई ही छूट गई है। इस संबंध में बीईओ पूजा चौहान ने बताया कि प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावकों से संवाद स्थापित करें और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें विद्यालय तक लाने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।