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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   The future of 310 girls with the help of two teachers

310 बालिकाओं का भविष्य सिर्फ दो शिक्षकों के सहारे

Wed, 16 Dec 2015 11:09 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 16 Dec 2015 11:09 PM IST
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बालिकाओं के शिक्षा स्तर में सुधार लाने के लिए हर साल अरबों रुपया खर्च कर रही है, लेकिन खर्च अनुपात में शिक्षा की गुणवत्ता में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। करोड़ों की लागत से जिले में मल्टी सेक्टोरियल डेवलपमेंट प्लान के तहत चार जीजीआईसी खोले गए।
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इमारत बनने के बाद बिना आधारभूत सुविधाओं के शिक्षा विभाग ने आनन-फानन में पढ़ाई शुरू करा दिया। जिसका खामियाजा छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। इसी में एक है राजकीय बालिका इंटर कॉलेज जैदपुर। यहां पर 310 छात्राएं पंजीकृत हैं।
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इनमें हाईस्कूल में 80 व इंटरमीडिएट में 14 छात्राएं पढ़ रही हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए प्रिंसिपल को लेकर सिर्फ दो शिक्षक हैं। बेंच न होने से छात्राएं जमीन पर बैठक करती हैं। कॉलेज की बिजली भी एक माह से काट दी गई है।
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ज्वाइन करने के बाद अवकाश पर गई मैडम
जीजीआईसी जैदपुर में कला व विज्ञान वर्ग में 12वीं तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। यहां पर 310 छात्राएं पंजीकृत, लेकिन यहां पर शिक्षकों का घोर अभाव है। इस कॉलेज में प्रभारी प्रधानाचार्य के तौर पर घरभरन सिंह की तैनाती है। इसके अलावा एलटी ग्रेड के दिनेश कुमार व अलका की तैनाती बतौर शिक्षक है। इसमें अलका ने ज्वाइन करने के एक सप्ताह के अंदर ही प्रसूता अवकाश ले लिया।   

एक महीने पहले कट गई बिजली
कॉलेज में विद्युत आपूर्ति पिछले एक माह से बंद है। विभाग के लोगों की माने तो बिजली का बिल करीब 86000 हजार रुपये आया है। बिल नहीं जमा होने के चलते पावर कॉर्पोरेशन ने कॉलेज का कनेक्शन काट दिया है। बिजली नहीं होने से यहां पर पेयजल की भी समस्या रहती है। एक हैंडपंप के सहारे ही करीब तीन सौ छात्राएं व शिक्षक हैं।

लैब में उपकरण न साल्ट
कॉलेज में विज्ञान वर्ग की भी पढ़ाई होती है। यहां पर प्रयोगात्मक कार्य के लिए प्रयोगशाला भी बनाई गई है, लेकिन इसमें उपकरण हैं न ही साल्ट व केमिकल। जिसके चलते यहां पर आज तक प्रयोग कार्य कराए ही नहीं गए हैं। विज्ञान का कोई शिक्षक भी अलग से नहीं है।

घर से लाती टाट पट्टी
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कॉलेज में फर्नीचर तक की व्यवस्था नहीं की। छोटे से छोटे निजी कॉलेज में फर्नीचर की अच्छी व्यवस्था होती है, लेकिन जीजीआईसी जैदपुर में आज भी छात्राएं जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को विवश हैं। टाट पट्टी भी उन्हें घर से लाना पड़ता है।

कॉलेज में शिक्षकों का अभाव है। संसाधन भी नहीं है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को कई बार लिखा भी गया है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। फर्नीचर नहीं होने से बच्चों का टाट पट्टी पर बैठाना मजबूरी है। अभिभावकों की सहमति से पीटीए के तहत छात्राओं से शुल्क लेकर शिक्षकों की व्यवस्था की गई है।  

- घरभरन सिंह, प्रभारी प्रधानाचार्य जीजीआईसी जैदपुर

कॉलेजों में शिक्षकों की कमी है। जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। आयोग द्वारा शिक्षकों की चयन प्रक्रिया चल रही है। पीटीए के तहत शिक्षकों की अस्थाई तैनाती कर शिक्षण कार्य कराया जा रहा है। कॉलेजों में संसाधन बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा लगातार पत्राचार किया जाता है।  
- अशोक कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक
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