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Barabanki News: बेहतर शिक्षा का सपना अधूरा बच्चों की 70 फीसदी सीटें खाली
Thu, 07 May 2026 01:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 07 May 2026 01:16 AM IST
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बाराबंकी। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून का मकसद हर गरीब बच्चे को बड़े स्कूलों की दहलीज पार कराना था, लेकिन धरातल पर तस्वीर इसके उलट है। जिले में तीन चरणों की लंबी काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया के बावजूद 70 फीसदी सीटें खाली रह गई हैं।
5600 सीटों में से अभी तक सिर्फ 1743 सीटों पर हुए चयन में से 1675 बच्चों की ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो सकी है। एक तरफ जरूरतमंद अभिभावक बच्चों के दाखिले के लिए स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पसंदीदा स्कूलों की सीटों पर प्रवेश देने में आनाकानी की जा रही है।
प्रशासनिक सख्ती के दावों के बीच निजी स्कूलों की मनमानी और तकनीकी पेच बच्चों के प्रवेश में अड़ंगा बना है। सरकार आरटीई के तहत प्रवेश देने वाले निजी शिक्षण संस्थानों को प्रति छात्र के हिसाब से अलग से विशेष ग्रांट आवंटित करती है।
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भारी-भरकम बजट के बावजूद कई नामी स्कूल वंचित वर्ग के बच्चों को दाखिला देने में तमाम तरह की अड़ंगा लगाते हैं। कागजी औपचारिकताएं और दूरी के नियमों का हवाला देकर बच्चों को प्रवेश से वंचित रखा जा रहा है।
इनमें से कुछ स्कूल सरकारी भुगतान में देरी का बहाना बनाकर गरीब बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं।
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5600 सीटों में से अभी तक सिर्फ 1743 सीटों पर हुए चयन में से 1675 बच्चों की ही प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो सकी है। एक तरफ जरूरतमंद अभिभावक बच्चों के दाखिले के लिए स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पसंदीदा स्कूलों की सीटों पर प्रवेश देने में आनाकानी की जा रही है।
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प्रशासनिक सख्ती के दावों के बीच निजी स्कूलों की मनमानी और तकनीकी पेच बच्चों के प्रवेश में अड़ंगा बना है। सरकार आरटीई के तहत प्रवेश देने वाले निजी शिक्षण संस्थानों को प्रति छात्र के हिसाब से अलग से विशेष ग्रांट आवंटित करती है।
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भारी-भरकम बजट के बावजूद कई नामी स्कूल वंचित वर्ग के बच्चों को दाखिला देने में तमाम तरह की अड़ंगा लगाते हैं। कागजी औपचारिकताएं और दूरी के नियमों का हवाला देकर बच्चों को प्रवेश से वंचित रखा जा रहा है।
इनमें से कुछ स्कूल सरकारी भुगतान में देरी का बहाना बनाकर गरीब बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी कर रहे हैं।