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बच्चे में दिखे मेनेंजाइटिस के लक्षण
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Fri, 25 Mar 2016 11:07 PM IST
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बाराबंकी। शुक्रवार को जिला अस्पताल में भर्ती दिमागी बुखार से पीड़ित बच्चा।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में मेनेंजाइटिस की दस्तक से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। इसकी चपेट में आने पर शुक्रवार को एक बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार न होते देख डॉक्टरों ने उसे केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया। लेकिन बच्चे के परिवारीजन उसे लखनऊ न ले जाकर शहर के ही एक निजी अस्पताल में ले गए जहां उसका इलाज चल रहा है।
शहर के बंकी कस्बे के दक्षिण टोला निवासी लवकुश कुमार का 6 वर्षीय पुत्र सुमित को कई दिनों से बुखार था। शुक्रवार सुबह 6 बजे उसकी हालत गंभीर होने पर परिवारीजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। उस समय जिला अस्पताल की इमरजेंसी मेें डॉ. एसके सिंह मौजूद थे। उन्होंने बच्चे को देखा तो उस समय उसे काफी तेज बुखार था।
जिसे आनन फानन में वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया गया लेकिन यह तेजी सिर्फ भर्ती करने तक ही दिखाई गई। उसके बाद हर पल बच्चे की हालत बिगड़ती जा रही थी। परिवारीजन डॉक्टर से बच्चे को देखने का आग्रह बार-बार कर रहे थे लेकिन वहां कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।
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मासूम के चाचा मुन्ना ने बताया कि बच्चे की हालत बिगड़ती देख डॉक्टर को एक बार देख लेने को कहा गया तो डॉ. एसके सिंह बमुश्किल आए और कहा कि इसका उपचार यहां संभव नहीं है इसलिए उसे लखनऊ केजीएमयू रेफर कर दिया। उसके बाद परिवारीजन मासूम को शहर के एक निजी नर्सिंग होम लेकर चले गए।
इस संबंध में डॉ. एसके सिंह ने बताया कि बच्चे में मेनेजाइटिस के पूरे लक्षण लग रहे हैं जिस कारण उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया लेकिन परिवार वाले उसे दलालों के कहने पर निजी चिकित्सक के यहां लेकर चले गए।
केजीएमयू में बच्चे का सिटी स्कैन व खून की अन्य जांचे होने पर, किस प्रकार का मेनेंजाइटिस है इसकी पुष्टि हो जाती जिसके बाद उपचार किया जाता। लेकिन बिना बताए बच्चे को अन्य किसी जगह ले जाना खतरे से खाली नहीं है।
क्या है मेनेंजाइटिस : मेननजाइटिस बीमारी एक विषाणु ग्रुप बी वायरस के कारण होता है। यह विषाणु बहुत थोड़े समय में मस्तिष्क के स्पाइनल कार्ड तथा मस्तिष्क की झिल्लियों (मेनिनजीज) में संक्रमण पैदा करता है। सुधार न होने पर मौत हो जाती है।
यह हैं लक्षण : अचानक तेज बुखार, भयानक सिर दर्द, शरीर खासकर गर्दन का अकड़ना, झटके लगना, उल्टी आना, आधी या पूरी बेहोशी।
बचाव के उपाय : जहां तक संभव हो रोगी को शांत और अंधेेरे हवादार कमरे में रखा जाए। शरीर में पानी की कमी और अधिकता दोनों से बचना चाहिए। भोजन एवं खाने पीने में नमक की मात्रा कम होनी चाहिए और कब्ज नहीं होने देना चाहिए।
शरीर में होने वाले इंफेक्शन को हलके में न लें। खास कर नाक, कान व गले में होने वाले फोड़ा फुंसी को न छेड़ें। चिकित्सक की सलाह लें। निमोनिया होने पर तुरंत डॉक्टर से उपचार कराएं। मेनेंजाइटिस काफी घातक साबित हो सकता है। जिला अस्पताल में शुक्रवार को एक बच्चे में यह रोग पाया गया। जिसे सभी चिकित्सकों को ऐसे मरीजों के उपचार में कोई लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए जा चुके हैं। - डॉ. रविन्द्र कुमार, सीएमओ
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शहर के बंकी कस्बे के दक्षिण टोला निवासी लवकुश कुमार का 6 वर्षीय पुत्र सुमित को कई दिनों से बुखार था। शुक्रवार सुबह 6 बजे उसकी हालत गंभीर होने पर परिवारीजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया। उस समय जिला अस्पताल की इमरजेंसी मेें डॉ. एसके सिंह मौजूद थे। उन्होंने बच्चे को देखा तो उस समय उसे काफी तेज बुखार था।
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जिसे आनन फानन में वार्ड में भर्ती कर उपचार शुरू कर दिया गया लेकिन यह तेजी सिर्फ भर्ती करने तक ही दिखाई गई। उसके बाद हर पल बच्चे की हालत बिगड़ती जा रही थी। परिवारीजन डॉक्टर से बच्चे को देखने का आग्रह बार-बार कर रहे थे लेकिन वहां कोई सुनवाई नहीं हो रही थी।
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मासूम के चाचा मुन्ना ने बताया कि बच्चे की हालत बिगड़ती देख डॉक्टर को एक बार देख लेने को कहा गया तो डॉ. एसके सिंह बमुश्किल आए और कहा कि इसका उपचार यहां संभव नहीं है इसलिए उसे लखनऊ केजीएमयू रेफर कर दिया। उसके बाद परिवारीजन मासूम को शहर के एक निजी नर्सिंग होम लेकर चले गए।
इस संबंध में डॉ. एसके सिंह ने बताया कि बच्चे में मेनेजाइटिस के पूरे लक्षण लग रहे हैं जिस कारण उसे लखनऊ रेफर कर दिया गया लेकिन परिवार वाले उसे दलालों के कहने पर निजी चिकित्सक के यहां लेकर चले गए।
केजीएमयू में बच्चे का सिटी स्कैन व खून की अन्य जांचे होने पर, किस प्रकार का मेनेंजाइटिस है इसकी पुष्टि हो जाती जिसके बाद उपचार किया जाता। लेकिन बिना बताए बच्चे को अन्य किसी जगह ले जाना खतरे से खाली नहीं है।
क्या है मेनेंजाइटिस : मेननजाइटिस बीमारी एक विषाणु ग्रुप बी वायरस के कारण होता है। यह विषाणु बहुत थोड़े समय में मस्तिष्क के स्पाइनल कार्ड तथा मस्तिष्क की झिल्लियों (मेनिनजीज) में संक्रमण पैदा करता है। सुधार न होने पर मौत हो जाती है।
यह हैं लक्षण : अचानक तेज बुखार, भयानक सिर दर्द, शरीर खासकर गर्दन का अकड़ना, झटके लगना, उल्टी आना, आधी या पूरी बेहोशी।
बचाव के उपाय : जहां तक संभव हो रोगी को शांत और अंधेेरे हवादार कमरे में रखा जाए। शरीर में पानी की कमी और अधिकता दोनों से बचना चाहिए। भोजन एवं खाने पीने में नमक की मात्रा कम होनी चाहिए और कब्ज नहीं होने देना चाहिए।
शरीर में होने वाले इंफेक्शन को हलके में न लें। खास कर नाक, कान व गले में होने वाले फोड़ा फुंसी को न छेड़ें। चिकित्सक की सलाह लें। निमोनिया होने पर तुरंत डॉक्टर से उपचार कराएं। मेनेंजाइटिस काफी घातक साबित हो सकता है। जिला अस्पताल में शुक्रवार को एक बच्चे में यह रोग पाया गया। जिसे सभी चिकित्सकों को ऐसे मरीजों के उपचार में कोई लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए जा चुके हैं। - डॉ. रविन्द्र कुमार, सीएमओ