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एएमयू करेगा वक्फ संपत्तियों का सर्वे
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बाराबंकी। जिले की वक्फ संपत्तियों का सर्वे कर उसका डाटा भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। हर एक वक्त संपत्ति की जीओ टैगिंग की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) को मिली है। जिले में शिया और सुन्नी समुदाय की कुल 4358 वक्फ संपत्तियां हैं। इसके साथ ही इन संपत्तियों को अतिक्रमण मुक्त भी बनाया जाएगा। वक्फ संपत्तियों का सर्वे और जीओ टैगिंग शुरू भी हो गई है।
वास्तविक स्थिति, मुतवल्ली और अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से जिले में वक्फ संपत्तियों का सर्वे कराया जाएगा। हर एक प्रापर्टी की बाकायदा जीओ टैगिंग कराई जाएगी। इसकी जिम्मेदारी शासन स्तर से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) को दी गई है। एएमयू के अधिकारी और कर्मचारी टीमवार इन संपत्तियों का सर्वे करेंगे। सर्वे और जीओ टैगिंग की कार्यवाही पूरी तरह से डिजिटल रहेगी।
सर्वे के दौरान नामित संस्था द्वारा मोबाइल एप के माध्यम से संपत्ति की वर्तमान स्थिति की फोटो, मुतवल्ली का नाम व पता समेत कई अन्य जानकारियां पोर्टल पर अपलोड की जाएंगी। अभी तक वक्फ संपत्तियों का डाटा अल्पसंख्यक विभाग के पास कागजी तौर पर था जिसे अब पूरी तरह सेे डिजिटल बनाया जा रहा है।
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जिले में कुल 4358 वक्फ संपत्तियां हैं। इनमें सबसे अधिक 4282 सुन्नी समुदाय और शेष 76 संपत्तियां शिया समुदाय की हैं। एएमयू द्वारा जिन वक्फ संपत्तियों का सर्वे और उसकी जीओ टैगिंग करनी है, उनमें 3952 कब्रिस्तान, 1309 मस्जिद समेत कर्बला, दरगाह और मजार की 97 संपत्तियां शामिल हैं। शासन स्तर से नामित संस्था द्वारा इन संपत्तियों को चार माह के अंदर सर्वे और जीओ टैगिंग की कार्यवाही पूरी करनी है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सोन कुुमार ने बताया कि जिले में 4358 वक्फ संपत्तियां हैं। इन सभी का सर्वे कर उसकी जीओ टैगिंग करनी है। इसकी जिम्मेेदारी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को मिली है। पूरा डाटा भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
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वास्तविक स्थिति, मुतवल्ली और अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से जिले में वक्फ संपत्तियों का सर्वे कराया जाएगा। हर एक प्रापर्टी की बाकायदा जीओ टैगिंग कराई जाएगी। इसकी जिम्मेदारी शासन स्तर से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) को दी गई है। एएमयू के अधिकारी और कर्मचारी टीमवार इन संपत्तियों का सर्वे करेंगे। सर्वे और जीओ टैगिंग की कार्यवाही पूरी तरह से डिजिटल रहेगी।
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सर्वे के दौरान नामित संस्था द्वारा मोबाइल एप के माध्यम से संपत्ति की वर्तमान स्थिति की फोटो, मुतवल्ली का नाम व पता समेत कई अन्य जानकारियां पोर्टल पर अपलोड की जाएंगी। अभी तक वक्फ संपत्तियों का डाटा अल्पसंख्यक विभाग के पास कागजी तौर पर था जिसे अब पूरी तरह सेे डिजिटल बनाया जा रहा है।
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जिले में कुल 4358 वक्फ संपत्तियां हैं। इनमें सबसे अधिक 4282 सुन्नी समुदाय और शेष 76 संपत्तियां शिया समुदाय की हैं। एएमयू द्वारा जिन वक्फ संपत्तियों का सर्वे और उसकी जीओ टैगिंग करनी है, उनमें 3952 कब्रिस्तान, 1309 मस्जिद समेत कर्बला, दरगाह और मजार की 97 संपत्तियां शामिल हैं। शासन स्तर से नामित संस्था द्वारा इन संपत्तियों को चार माह के अंदर सर्वे और जीओ टैगिंग की कार्यवाही पूरी करनी है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सोन कुुमार ने बताया कि जिले में 4358 वक्फ संपत्तियां हैं। इन सभी का सर्वे कर उसकी जीओ टैगिंग करनी है। इसकी जिम्मेेदारी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को मिली है। पूरा डाटा भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।