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Barabanki News: एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा एसएनसीयू
Wed, 23 Sep 2026 12:49 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 23 Sep 2026 12:49 AM IST
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संयुक्त चिकित्सालय मे बना एसएनसीयू वार्ड।
सिरौलीगौसपुर। संयुक्त चिकित्सालय में संचालित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी से जूझ रही है। 100 बेड के अस्पताल की यह महत्वपूर्ण यूनिट अब महज एक डॉक्टर के भरोसे चल रही है। स्टाफ की कमी के कारण गंभीर नवजातों का इलाज प्रभावित हो रहा है और उन्हें जिला अस्पताल रेफर करना पड़ रहा है।
तराई क्षेत्र के गंभीर नवजातों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2024 में एसएनसीयू की स्थापना की गई थी। यहां कम वजन, समय से पहले जन्मे और पीलिया से पीड़ित बच्चों का 24 घंटे इलाज किया जाता था। यूनिट में छह डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। पहले तीन डॉक्टर तैनात थे, लेकिन मार्च में डॉ. सीपी कनौजिया और डॉ. संयुक्त गुप्ता का तबादला हो गया। इसके बाद नई तैनाती नहीं हुई। अब डॉ. शिवम जायसवाल ही पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
नर्सिंग स्टाफ के भी छह पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक भी कर्मचारी तैनात नहीं है। इससे नवजातों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। गंभीर बच्चों को जिला अस्पताल रेफर करने से गरीब परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। वहीं, इलाज में देरी से बच्चों की जान को भी खतरा बना हुआ है।
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वर्जन
अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी के संबंध में उच्चाधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है। जल्द ही नए स्टाफ की तैनाती की उम्मीद है, ताकि नवजातों को समय पर बेहतर इलाज मिल सके।
- डॉ. अजय सिंह, सीएमएस
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तराई क्षेत्र के गंभीर नवजातों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2024 में एसएनसीयू की स्थापना की गई थी। यहां कम वजन, समय से पहले जन्मे और पीलिया से पीड़ित बच्चों का 24 घंटे इलाज किया जाता था। यूनिट में छह डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। पहले तीन डॉक्टर तैनात थे, लेकिन मार्च में डॉ. सीपी कनौजिया और डॉ. संयुक्त गुप्ता का तबादला हो गया। इसके बाद नई तैनाती नहीं हुई। अब डॉ. शिवम जायसवाल ही पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
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नर्सिंग स्टाफ के भी छह पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक भी कर्मचारी तैनात नहीं है। इससे नवजातों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। गंभीर बच्चों को जिला अस्पताल रेफर करने से गरीब परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। वहीं, इलाज में देरी से बच्चों की जान को भी खतरा बना हुआ है।
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अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी के संबंध में उच्चाधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है। जल्द ही नए स्टाफ की तैनाती की उम्मीद है, ताकि नवजातों को समय पर बेहतर इलाज मिल सके।
- डॉ. अजय सिंह, सीएमएस