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बांध को बचाने की जद्दोजहद तेज
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Sat, 30 Jul 2016 11:00 PM IST
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नदी का जलस्तर घटा
- फोटो : अमर उजाला
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एल्गिन-चरसड़ी बांध की स्थिति बेहद नाजुक है। महज बालू भरी बोरियों और बल्लियों के सहारे बांध में कटान रोकने की जद्दोजहद चल रही है। बस एक मसीना बांध को धरासाई करने के लिए काफी है।
मसीने को काबू में करने के लिए महज हरे पेड़ों को नदी में डालने का एक मात्र प्रयोग चल रहा है। शनिवार को घाघरा का पानी स्थिर रहा तो बैक रोलिंग का काम तेज चल रहा था। रविवार को घाघरा का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने की आशंका है। शनिवार को नदी का पानी खतरे के निशान से 50 सेमी ऊपर बह रहा था।
लगातार हो रही धीरे-धीरे कटान से एल्गिन-चरसड़ी बांध दिनों-दिन कमजोर होता जा रहा है। सीमेंट की बोरियों में मिट्टी एवं बालू भरकर नदी में बैक रोलिंग के सहारे बांध को बचाने की कवायद चल रही है। बांध पर नदी का लगातार दबाव बढ़ रहा है।
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ऊपर से मशीने का खतरा पल-पल बना रहता है। शुक्रवार की देर शाम को उठे मसीने ने करीब 3 मीटर कटवन को नदी की धारा में काटकर गिरा दिया। बाद में हरे पेड़ों को नदी में डालकर कटान को रोका गया। करीब दो किलोमीटर की बांध को डेंजर जोन में रखा गया है।
जहां करीब 29 कट्स एंव 6 स्पर बनाए गए थे। घाघरा में बाढ़ का पानी उन स्परों के बराबर चल रहा है तथा कटान होते-होते नदी की धारा बांध से सटकर बहनें लगी है। जहंा मसीना उठने पर कटान का जबरदस्त खतरा बना हुआ है। नदी में बल्लियां लगाकर बैरीकेडिंग की जा रही है। जिससे पानी का बहाव कम किया जा सके।
बांध कटा तो हजारों बीघा जमीन होगी जलमग्न
एल्गिन-चरसड़ी बांध के कटने की स्थिति मे बाराबंकी की तहसील रामसनेहीघाट के चार गांव व तहसील रामनगर के दो गांव के मजरों सहित लगभग 5 हजार की आबादी व 800 परिवार एवं करीब दो हजार बीघे कृषि योग्य भूमि जलमग्न होगी।
इसी तरह जनपद गोंडा के करनैलगंज तहसील की 72 ग्राम पंचायतों के 670 मजरे, 21 हजार 968 परिवारों की 1 लाख 8 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित होगी। तथा 10250 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि जलमग्न हो जाएगी।
जारी है बचाव कार्य
बंाध पर मौजूद सहायक अभियंता अशोक कुमार बताते हैं कि घाघरा अब बांध से सटकर बह रही है। पानी धीरे-धीरे घट रहा है। तथा शनिवार को पानी पूरी तरह स्थिर रहा। जिससे खतरा नहीं है। यदि तेजी से पानी घटा तो दिक्कत हो सकती है। फि लहाल बचाव कार्य जारी है।
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मसीने को काबू में करने के लिए महज हरे पेड़ों को नदी में डालने का एक मात्र प्रयोग चल रहा है। शनिवार को घाघरा का पानी स्थिर रहा तो बैक रोलिंग का काम तेज चल रहा था। रविवार को घाघरा का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने की आशंका है। शनिवार को नदी का पानी खतरे के निशान से 50 सेमी ऊपर बह रहा था।
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लगातार हो रही धीरे-धीरे कटान से एल्गिन-चरसड़ी बांध दिनों-दिन कमजोर होता जा रहा है। सीमेंट की बोरियों में मिट्टी एवं बालू भरकर नदी में बैक रोलिंग के सहारे बांध को बचाने की कवायद चल रही है। बांध पर नदी का लगातार दबाव बढ़ रहा है।
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ऊपर से मशीने का खतरा पल-पल बना रहता है। शुक्रवार की देर शाम को उठे मसीने ने करीब 3 मीटर कटवन को नदी की धारा में काटकर गिरा दिया। बाद में हरे पेड़ों को नदी में डालकर कटान को रोका गया। करीब दो किलोमीटर की बांध को डेंजर जोन में रखा गया है।
जहां करीब 29 कट्स एंव 6 स्पर बनाए गए थे। घाघरा में बाढ़ का पानी उन स्परों के बराबर चल रहा है तथा कटान होते-होते नदी की धारा बांध से सटकर बहनें लगी है। जहंा मसीना उठने पर कटान का जबरदस्त खतरा बना हुआ है। नदी में बल्लियां लगाकर बैरीकेडिंग की जा रही है। जिससे पानी का बहाव कम किया जा सके।
बांध कटा तो हजारों बीघा जमीन होगी जलमग्न
एल्गिन-चरसड़ी बांध के कटने की स्थिति मे बाराबंकी की तहसील रामसनेहीघाट के चार गांव व तहसील रामनगर के दो गांव के मजरों सहित लगभग 5 हजार की आबादी व 800 परिवार एवं करीब दो हजार बीघे कृषि योग्य भूमि जलमग्न होगी।
इसी तरह जनपद गोंडा के करनैलगंज तहसील की 72 ग्राम पंचायतों के 670 मजरे, 21 हजार 968 परिवारों की 1 लाख 8 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित होगी। तथा 10250 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि जलमग्न हो जाएगी।
जारी है बचाव कार्य
बंाध पर मौजूद सहायक अभियंता अशोक कुमार बताते हैं कि घाघरा अब बांध से सटकर बह रही है। पानी धीरे-धीरे घट रहा है। तथा शनिवार को पानी पूरी तरह स्थिर रहा। जिससे खतरा नहीं है। यदि तेजी से पानी घटा तो दिक्कत हो सकती है। फि लहाल बचाव कार्य जारी है।