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शहाबपुर व जैदपुर में बुखार का प्रकोप
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Sun, 23 Oct 2016 12:02 AM IST
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अमरोहा के जिला अस्पताल में भर्ती बुखार के मरीज।
- फोटो : amar ujala
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शहाबपुर व जैदपुर में बुखार के प्रकोप को देखते हुए मरीजों में डेंगू का भय व्याप्त है। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में बुखार के मरीजों के उपचार में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। मरीजों को बेंच व स्ट्रेचर पर लिटा कर उपचार किया जा रहा है। शनिवार को इमरजेंसी में ऐसा ही नजारा दिखा।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रोजाना 150 से ज्यादा मरीज आते हैं। जिनमें से ज्यादातर बुखार से पीड़ित होते हैं। इनकी बढ़ती संख्या से उपलब्ध संसाधन कम पड़ते जा रहे हैं। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक संसाधनों के अभाव में मरीजों को सारी सुविधाएं नहीं दिलवा पा रहे हैं। इमरजेंसी में महज 16 बेड़ हैं जिसकी वजह से ज्यादा मरीज होने पर उनको बेंच या स्ट्रेचर पर भर्ती करके इलाज किया जा रहा है।
शनिवार को ऐसा ही नजारा इमरजेंसी का रहा। यहां बेंच पर भर्ती सुहेल (12) पुत्र इम्तियाज निवासी नबीगंज को तीन दिन से बुखार था। शनिवार को उसकी मां तलिमुननिशां उसे इमरजेंसी में लाई थी। बेेड न मिलने पर बेंच पर लिटाकर उसे ग्लूकोज चढ़ाया गया। वहीं मिथिलेश (28) पत्नी कमलेश निवासी पैसार चार दिन से उल्टी, बदन दर्द व तेज बुखार से पीड़ित हैं। इन्हें भी बेड नहीं मिल पाया। बेंच पर ही इलाज शुरू किया गया।
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अमोली कला निवासी बम बहादुर (50) को कमरा नंबर एक इंजेक्शन रूम में लिटाकर इलाज किया गया। पीरबटावन निवासी अफशां (15) पुत्री शऊफ को स्ट्रेचर पर लिटाकर ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। कुसुम (12) पुत्री पल्टू तीन दिन से बुखार से पीड़ित है। शनिवार को उसके पिता ने उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया। डेंगू के लक्षण मिलने पर चिकित्सकाें ने स्ट्रेचर पर उसका उपचार शुरू कर दिया।
इमरजेंसी वार्ड में बेड की संख्या से कहीं ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इलाज तो करना जरूरी है इसलिए किसी तरह बेंच व स्ट्रेचर पर भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अस्पताल में संसाधन का अभाव है। - डॉ. एसके सिंह, सीएमएस जिला पुरुष अस्पताल
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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रोजाना 150 से ज्यादा मरीज आते हैं। जिनमें से ज्यादातर बुखार से पीड़ित होते हैं। इनकी बढ़ती संख्या से उपलब्ध संसाधन कम पड़ते जा रहे हैं। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक संसाधनों के अभाव में मरीजों को सारी सुविधाएं नहीं दिलवा पा रहे हैं। इमरजेंसी में महज 16 बेड़ हैं जिसकी वजह से ज्यादा मरीज होने पर उनको बेंच या स्ट्रेचर पर भर्ती करके इलाज किया जा रहा है।
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शनिवार को ऐसा ही नजारा इमरजेंसी का रहा। यहां बेंच पर भर्ती सुहेल (12) पुत्र इम्तियाज निवासी नबीगंज को तीन दिन से बुखार था। शनिवार को उसकी मां तलिमुननिशां उसे इमरजेंसी में लाई थी। बेेड न मिलने पर बेंच पर लिटाकर उसे ग्लूकोज चढ़ाया गया। वहीं मिथिलेश (28) पत्नी कमलेश निवासी पैसार चार दिन से उल्टी, बदन दर्द व तेज बुखार से पीड़ित हैं। इन्हें भी बेड नहीं मिल पाया। बेंच पर ही इलाज शुरू किया गया।
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अमोली कला निवासी बम बहादुर (50) को कमरा नंबर एक इंजेक्शन रूम में लिटाकर इलाज किया गया। पीरबटावन निवासी अफशां (15) पुत्री शऊफ को स्ट्रेचर पर लिटाकर ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। कुसुम (12) पुत्री पल्टू तीन दिन से बुखार से पीड़ित है। शनिवार को उसके पिता ने उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया। डेंगू के लक्षण मिलने पर चिकित्सकाें ने स्ट्रेचर पर उसका उपचार शुरू कर दिया।
इमरजेंसी वार्ड में बेड की संख्या से कहीं ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इलाज तो करना जरूरी है इसलिए किसी तरह बेंच व स्ट्रेचर पर भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अस्पताल में संसाधन का अभाव है। - डॉ. एसके सिंह, सीएमएस जिला पुरुष अस्पताल