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मेंथा की पराली का डंपिंग जोन बन रहे गांव के सरकारी स्कूल
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बाराबंकी। रामनगर ब्लॉक क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय करन्धा में ग्रामीणों द्वारा कुछ इस त?
- फोटो : BARABANKI
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सूरतगंज (बाराबंकी)। गांवों में बने सरकारी स्कूलों को लकदक करने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प के तहत लाखों खर्च कर उनकी सूरत बदली गई थी। कई विद्यालयों ने तो मांटेसरी स्कूलों को भी फेल कर दिया। मगर कोविड-19 से बचाव को लेकर करीब दो माह से अधिक समय से बंद सरकारी स्कूल बदरंग हो रहे है। परिसर में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई तो गंदगी का अंबार है। इतना ही नहीं बंद पड़े स्कूल मेंथा पेराई के बाद निकलने वाला पराली (जंगरा) का डंपिंग जोन बना गया है।
ऐसी ही एक तस्वीर अमर उजाला ने अपने कैमरे में कैद की। जो रामनगर क्षेत्र के करंध पंचायत के पूर्व माध्यमिक विद्यालय की है। यहां पर स्कूल के बरामदे में मेंथा की पेराई के बाद निकलने वाला जंगरा डंप कर दिया गया है। इसमें जगह नहीं बची तो विद्यालय किचन में जंगरे को भर दिया गया। स्कूल के पूरे परिसर में इसे सुखाने के लिए फैलाकर गंदगी की गई है।
विभाग के अधिकारी व शिक्षक स्कूल बंद होने के बाद विद्यालय की ओर झांकने तक नहीं गए। ऐसे में ग्रामीणों को मेंथा के जंगरे को रखने व सुखाने का विद्यालय से अच्छा कोई और कोई सुरक्षित स्थान गांव में नहीं मिला। जिस पर वह अपना कब्जा जमा बैठे हैं। यह तो महज बानगी है। जिले में अधिकांश सरकारी स्कूल बंद होने से बदरंग हो गए है। वहीं कइयों में ग्रामीणों का कब्जा है।
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कोरोना काल में बंद सरकारी विद्यालयों में अगर किसी तरह का अनाधिकृत रूप से कब्जा किया गया है तो इसको लेकर सभी बीईओ को निर्देश देकर इसकी जांच कराई जाएगी। विद्यालयों में अनाधिकृत रूप से कब्जा मिला तो उसे खाली कराने के साथ ही संबंधित कब्जेदार पर कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश कुमार वर्मा, डीआईओएस
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ऐसी ही एक तस्वीर अमर उजाला ने अपने कैमरे में कैद की। जो रामनगर क्षेत्र के करंध पंचायत के पूर्व माध्यमिक विद्यालय की है। यहां पर स्कूल के बरामदे में मेंथा की पेराई के बाद निकलने वाला जंगरा डंप कर दिया गया है। इसमें जगह नहीं बची तो विद्यालय किचन में जंगरे को भर दिया गया। स्कूल के पूरे परिसर में इसे सुखाने के लिए फैलाकर गंदगी की गई है।
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विभाग के अधिकारी व शिक्षक स्कूल बंद होने के बाद विद्यालय की ओर झांकने तक नहीं गए। ऐसे में ग्रामीणों को मेंथा के जंगरे को रखने व सुखाने का विद्यालय से अच्छा कोई और कोई सुरक्षित स्थान गांव में नहीं मिला। जिस पर वह अपना कब्जा जमा बैठे हैं। यह तो महज बानगी है। जिले में अधिकांश सरकारी स्कूल बंद होने से बदरंग हो गए है। वहीं कइयों में ग्रामीणों का कब्जा है।
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कोरोना काल में बंद सरकारी विद्यालयों में अगर किसी तरह का अनाधिकृत रूप से कब्जा किया गया है तो इसको लेकर सभी बीईओ को निर्देश देकर इसकी जांच कराई जाएगी। विद्यालयों में अनाधिकृत रूप से कब्जा मिला तो उसे खाली कराने के साथ ही संबंधित कब्जेदार पर कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश कुमार वर्मा, डीआईओएस