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Barabanki News: साधु की हुई जीत, 20 साल पुराना आदेश निरस्त
Sat, 26 Aug 2023 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 26 Aug 2023 12:55 AM IST
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नईसड़क (बाराबंकी)। असंद्रा थाना क्षेत्र के श्रीरामजानकी मठ किठैया की भूमि के स्वामित्व को लेकर चल रहे वाद की सुनवाई करते हुए तहसीलदार न्यायिक रामसनेहीघाट ने शुक्रवार को अपंजीकृत वसीयत के आधार पर वर्ष 2003 में किए गए नामांतरण आदेश को निरस्त कर दिया। इसे लेकर जिंदा समाधि लेने की घोषणा करने वाले साधु की बड़ी जीत माना जा रहा है। बताते हैं कि मामला सीएम योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा था।
किठैया गांव स्थित श्रीरामजानकी मठ के नाम दर्ज जमीन का फर्जी तरीके से बैनामा किए जाने का आरोप लगाकर मठ के साधु मुकुंदपुरी ने एक सितंबर को जिंदा समाधि लेने की घोषणा की थी। स्वयं ही समाधि के लिए गड्ढा खोदा था। मुकुंदपुरी के अनुसार करीब डेढ़ दशक पूर्व यहां के महंत रहे राजेश्वर पुरी ने एक पंजीकृत वसीयत करते हुए समस्त चल-अचल संपत्ति नीलकंठेश्वर महादेव के नाम कर दी थी, जिसे गांव के ही एक व्यक्ति ने अपंजीकृत वसीयत के आधार पर भूमि को अपने नाम दर्ज करा लिया था और बाद में कई लोगों के नाम बैनामा भी कर दिया। गुरुवार को भाजपा जिलाध्यक्ष शशांक कुशमेश व एसडीएम रामआसरे वर्मा के आश्वासन पर साधु ने घोषणा वापस ली थी।
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किठैया गांव स्थित श्रीरामजानकी मठ के नाम दर्ज जमीन का फर्जी तरीके से बैनामा किए जाने का आरोप लगाकर मठ के साधु मुकुंदपुरी ने एक सितंबर को जिंदा समाधि लेने की घोषणा की थी। स्वयं ही समाधि के लिए गड्ढा खोदा था। मुकुंदपुरी के अनुसार करीब डेढ़ दशक पूर्व यहां के महंत रहे राजेश्वर पुरी ने एक पंजीकृत वसीयत करते हुए समस्त चल-अचल संपत्ति नीलकंठेश्वर महादेव के नाम कर दी थी, जिसे गांव के ही एक व्यक्ति ने अपंजीकृत वसीयत के आधार पर भूमि को अपने नाम दर्ज करा लिया था और बाद में कई लोगों के नाम बैनामा भी कर दिया। गुरुवार को भाजपा जिलाध्यक्ष शशांक कुशमेश व एसडीएम रामआसरे वर्मा के आश्वासन पर साधु ने घोषणा वापस ली थी।
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